नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के निर्धारित स्थलों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और दिल्ली पुलिस के बीच विवाद एक बार फिर सामने आया है। मंगलवार को CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका को जंतर-मंतर से हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। दोनों नेता उस समय जंतर-मंतर पहुंचे थे, जब दिल्ली पुलिस ने इस स्थान को निर्धारित धरना-प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया है। फिलहाल, दोनों नेताओं को हिरासत में लेने के बाद कहां ले जाया गया, इसकी तत्काल जानकारी सामने नहीं आई।
जंतर-मंतर पहुंचते ही CJP नेताओं पर पुलिस की कार्रवाई
मिली जानकारी के अनुसार, सौरव दास और आशुतोष रांका मंगलवार को जंतर-मंतर पहुंचे थे। इसी दौरान दिल्ली पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब राजधानी में विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों में बदलाव को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस जारी है।
CJP नेताओं ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से बाहर किए जाने के फैसले पर आपत्ति जताई है। हालांकि, मंगलवार को हुई कार्रवाई के संबंध में हिरासत में लेने के सटीक कारणों और पुलिस की आगे की प्रक्रिया को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी तत्काल उपलब्ध नहीं हो सकी। ऐसे में इस कार्रवाई से जुड़ी परिस्थितियों पर आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है।
10 अक्टूबर को भी हिरासत में लिए गए थे CJP नेता
सौरव दास और आशुतोष रांका इससे पहले भी दिल्ली में पुलिस कार्रवाई का सामना कर चुके हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 10 अक्टूबर को CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका को दिल्ली में प्रदर्शन की योजना के बीच हिरासत में लिया गया था।
इसके बाद तीनों को एहतियातन गिरफ्तार कर कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया था। रविवार को उन्हें रिहा कर दिया गया। बताया गया कि रिहाई के दौरान उनसे एक साल तक शांति भंग करने वाली गतिविधियों से दूर रहने और अच्छा व्यवहार बनाए रखने की शर्त रखी गई थी।
अब सौरव दास और आशुतोष रांका को दोबारा हिरासत में लिए जाने से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि, मंगलवार की कार्रवाई का पिछली हिरासत से कानूनी संबंध क्या है, इस बारे में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
दिल्ली पुलिस ने क्यों बदले प्रदर्शन के निर्धारित स्थल?
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने का फैसला दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार के 11 अक्टूबर के स्थायी आदेश के तहत लिया गया बताया गया है। इस व्यवस्था के अंतर्गत जंतर-मंतर के स्थान पर दिल्ली में तीन अन्य जगहों को धरना-प्रदर्शन के लिए निर्धारित किया गया है।
इन स्थलों में मध्य दिल्ली का रामलीला मैदान, उत्तरी दिल्ली का बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी मैदान शामिल हैं। पुलिस के फैसले के पीछे गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति की सिफारिशों का हवाला दिया गया है। साथ ही, नए निर्धारित स्थलों पर प्रदर्शन आयोजित करने के लिए संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी किए जाने की बात भी कही गई है।
इस बदलाव के बाद अब प्रदर्शन करने वाले संगठनों को निर्धारित स्थानों और लागू नियमों के अनुसार अपनी गतिविधियां आयोजित करनी होंगी। वहीं, जंतर-मंतर को सूची से हटाए जाने के फैसले को लेकर CJP ने अपनी असहमति जाहिर की है।
‘अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा’, CJP संस्थापक का बयान
जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से बाहर किए जाने पर CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने पहले कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था, ‘अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा।’ उनके इस बयान को प्रदर्शन के स्थान में बदलाव के खिलाफ संगठन के विरोध के तौर पर देखा जा रहा है।
वहीं, CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने भी इस फैसले को मनमाना बताते हुए इसे स्वीकार करने से इनकार किया था। संगठन का कहना है कि जंतर-मंतर जैसे स्थान पर प्रदर्शन से जुड़ा फैसला शांतिपूर्ण विरोध और लोगों के एकत्र होने के अधिकार से संबंधित सवाल खड़े करता है।
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस की ओर से प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों में बदलाव किया गया है। ऐसे में इस मुद्दे पर संगठन की आपत्ति और पुलिस की ओर से तय की गई व्यवस्था के बीच आगे भी टकराव की स्थिति बन सकती है। हालांकि, आगे की स्थिति पुलिस की कार्रवाई, लागू आदेशों और संबंधित पक्षों के रुख पर निर्भर करेगी।
जंतर-मंतर विवाद में आगे क्या होगा?
सौरव दास और आशुतोष रांका की दोबारा हिरासत के बाद दिल्ली में प्रदर्शन स्थलों को लेकर जारी विवाद फिर सुर्खियों में है। इस मामले में अब हिरासत के कारणों, पुलिस की आगे की कार्रवाई और CJP के अगले कदमों पर नजर रहेगी।
फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले पर CJP ने विरोध जताया है और इसी विवाद के बीच उसके दो नेताओं को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई है। मामले के सभी पहलुओं की स्पष्ट तस्वीर संबंधित अधिकारियों की विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही मिल सकेगी।
