Delhi Ramlila 2026: दिल्ली के पीतमपुरा में इस बार रामलीला के दौरान रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों के साथ 30 फुट ऊंचे कॉकरोच यानी तिलचट्टे का पुतला भी जलाने की तैयारी है। आयोजकों की ओर से इसे गंदगी के खिलाफ संदेश देने की पहल बताया गया है। हालांकि, इस अनोखे विचार को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कुछ लोग इसका समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ इसे दशहरे और रामलीला के आयोजन के लिए अनुचित बता रहे हैं। इस बीच, एक्स (X) पर यूजर्स AI की मदद से ऐसे वीडियो भी साझा कर रहे हैं, जिनमें रावण को कॉकरोच के साथ खड़ा देखकर नाराज होते हुए दिखाया गया है।
नई दिल्ली। दशहरा और विजयादशमी के अवसर पर देशभर में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक रावण दहन किया जाता है। लेकिन दिल्ली की एक रामलीला में इस बार रावण के साथ 30 फुट ऊंचे कॉकरोच का पुतला भी चर्चा का विषय बन गया है। पीतमपुरा में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों के अलावा तिलचट्टे का विशाल पुतला जलाने की योजना बताई जा रही है।
इस पहल को गंदगी के खिलाफ प्रतीकात्मक संदेश से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। कुछ यूजर्स इसे बुराई और गंदगी के खिलाफ एक अनोखा प्रयोग बता रहे हैं, जबकि दूसरे लोगों का कहना है कि रामलीला जैसे पारंपरिक धार्मिक आयोजन में इस तरह का नया प्रयोग विवाद पैदा कर सकता है।
रामलीला में 30 फुट के कॉकरोच की चर्चा क्यों?
पीतमपुरा की रामलीला में प्रस्तावित कॉकरोच के पुतले ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा है। आमतौर पर दशहरे पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं। ऐसे में 30 फुट ऊंचे तिलचट्टे को भी इस आयोजन में शामिल करने की बात लोगों के लिए हैरानी का विषय बन गई है।
इस विचार के पीछे गंदगी को खत्म करने का संदेश बताया जा रहा है। तिलचट्टे को अक्सर गंदगी और अस्वच्छता से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में आयोजकों की इस पहल को स्वच्छता के प्रतीकात्मक संदेश के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
हालांकि, इस तरह के प्रयोग को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या दशहरे के पारंपरिक आयोजन में किसी अतिरिक्त पुतले को शामिल करना उचित है। इसी मुद्दे पर सोशल मीडिया पर समर्थन और विरोध के स्वर सुनाई दे रहे हैं।
‘इस तिलचट्टे की इतनी औकात, हमारे बराबर खड़ा हो गया’, AI वीडियो वायरल
इस अनोखे पुतले को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कुछ यूजर्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से वीडियो साझा किए हैं। इन वीडियो में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के साथ कॉकरोच के पुतले को खड़ा दिखाया गया है।
एक AI वीडियो में रावण को कॉकरोच पर नाराज होते हुए दिखाया गया है। वीडियो में रावण के किरदार से कहलवाया गया है, “ये कीड़ा कहां से आ गया? इसकी इतनी औकात कि हमारे बराबर खड़ा हो गया।”
इस तरह के व्यंग्यात्मक वीडियो ने लोगों का ध्यान खींचा है। हालांकि, ये AI से तैयार किए गए वीडियो हैं, इसलिए इन्हें रामलीला में हुई वास्तविक बातचीत या घटना का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पर यूजर्स की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं
कॉकरोच के पुतले और उससे जुड़े वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ यूजर्स ने इस विचार को हास्य और व्यंग्य के नजरिए से देखा, जबकि कुछ ने राजनीतिक टिप्पणियां भी कीं।
एक यूजर ने राजनीतिक संदर्भ जोड़ते हुए लिखा कि तिलचट्टे भी भाजपा से नफरत करते हैं। पोस्ट में मुख्य न्यायाधीश और ज्ञानेश कुमार का उल्लेख करते हुए केरल भाजपा के एक कार्यक्रम में कथित व्यवधान का भी जिक्र किया गया। यह यूजर की राजनीतिक टिप्पणी थी, न कि रामलीला के आयोजन से जुड़ा कोई स्थापित तथ्य।
एक अन्य यूजर ने कॉकरोच के पुतले पर व्यंग्य करते हुए लिखा, “यह कॉकरोच नहीं, कॉकरोच के रिश्तेदार हैं।”
इन टिप्पणियों के जरिए कुछ यूजर्स ने इस आयोजन को राजनीतिक व्यंग्य से जोड़ने की कोशिश की है। इससे साफ है कि रामलीला के इस नए प्रयोग पर चर्चा केवल स्वच्छता तक सीमित नहीं रही, बल्कि सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग तरह की व्याख्याएं भी सामने आ रही हैं।
‘दशहरे के दिन कॉकरोच जलाना ठीक नहीं’, कुछ यूजर्स ने जताई आपत्ति
जहां कुछ लोग कॉकरोच के पुतले को गंदगी के खिलाफ प्रतीकात्मक पहल मान रहे हैं, वहीं कुछ यूजर्स ने इस विचार पर आपत्ति जताई है।
एक यूजर ने लिखा कि वह विजयादशमी के दिन रामलीला मैदान में विशाल कॉकरोच को जलाने के विचार के पक्ष में नहीं है। उसके अनुसार, इससे अनावश्यक विवाद पैदा हो सकता है और रामलीला इस तरह के प्रयोग के लिए सही जगह नहीं है।
यूजर ने सुझाव दिया कि यदि कॉकरोच का पुतला जलाना ही है, तो इसे किसी दूसरे दिन और अलग कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया जा सकता है।
इस प्रतिक्रिया से पता चलता है कि कुछ लोगों के लिए यह मुद्दा केवल पुतले के आकार या स्वच्छता के संदेश तक सीमित नहीं है। वे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन की परंपरा को ध्यान में रखते हुए ऐसे प्रयोगों पर विचार करने की बात कह रहे हैं।
‘रावण बुराई का प्रतीक है, तो कॉकरोच का पुतला जलाने में क्या बुराई?’
कॉकरोच के पुतले का समर्थन करने वाले यूजर्स ने इसे बुराई के प्रतीकात्मक अंत से जोड़कर देखा है। एक यूजर ने लिखा कि रावण बुराई का प्रतीक है और आज के दौर में कुछ लोग भी उसी तरह बुराई के प्रतीक हो सकते हैं। ऐसे में रामलीला में रावण के साथ कॉकरोच का पुतला जलाने में उसे कुछ गलत नहीं लगता।
इस तरह की प्रतिक्रियाओं में कॉकरोच के पुतले को गंदगी और नकारात्मकता के प्रतीक के रूप में देखने की बात सामने आई है। हालांकि, सोशल मीडिया पर इस विचार को लेकर कोई एक राय नहीं है। जहां कुछ लोग इसे रचनात्मक पहल मान रहे हैं, वहीं दूसरे इसे पारंपरिक आयोजन से अलग प्रयोग के तौर पर देख रहे हैं।
दिल्ली की रामलीला का अनोखा प्रयोग बना चर्चा का विषय
पीतमपुरा की रामलीला में 30 फुट ऊंचे कॉकरोच के पुतले को शामिल करने की योजना ने दशहरे से पहले ही सोशल मीडिया पर चर्चा बढ़ा दी है। एक ओर इसे स्वच्छता के संदेश से जोड़ा जा रहा है, तो दूसरी ओर इस पर धार्मिक परंपरा, सार्वजनिक आयोजन और प्रतीकात्मकता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
AI से तैयार किए गए व्यंग्यात्मक वीडियो ने इस चर्चा को और दिलचस्प बना दिया है। फिलहाल, कॉकरोच के पुतले को लेकर लोगों की राय बंटी हुई है। यह पहल किस तरह का संदेश देगी और आयोजन के दौरान इसे किस रूप में प्रस्तुत किया जाएगा, इस पर लोगों की नजर बनी हुई है।
