नेपाल-तिब्बत सीमा के पास अचानक आई बाढ़ और लैंडस्लाइड ने मचाई भारी तबाही, रसुवा से लेकर कई जिलों तक असर; भारतीय पर्यटकों और कैलाश मानसरोवर यात्रियों की तलाश तेज
काठमांडू: नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बुधवार सुबह आई बाढ़ और भूस्खलन के बाद कई इलाकों में घर, सड़क और पुल पानी के तेज बहाव में बह गए। आपदा के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, अलग-अलग सरकारी और स्थानीय रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 160 से अधिक बताई गई है, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं। इनमें बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक और पर्यटक भी शामिल बताए जा रहे हैं।
नेपाल के पुलिस बुलेटिन के मुताबिक, गुरुवार सुबह तक आठ जिलों से 162 शव बरामद किए जा चुके थे। वहीं कुछ रिपोर्टों में 750 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। प्रशासन को आशंका है कि बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ मृतकों और लापता लोगों की संख्या में बदलाव हो सकता है।
नेपाल-तिब्बत सीमा से शुरू हुई तबाही, कई जिलों तक पहुंचा बाढ़ का पानी
सबसे ज्यादा असर नेपाल के रसुवा इलाके में देखने को मिला है, जहां भोटेकोशी नदी के आसपास बाढ़ के तेज बहाव ने भारी नुकसान पहुंचाया। हवाई तस्वीरों में कई जगहों पर सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त दिखाई दिए हैं। कई गांवों में पानी और मलबा घुसने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
बताया जा रहा है कि नेपाल-तिब्बत सीमा के पास लेंडे नदी में अचानक पानी बढ़ने और चट्टानों के खिसकने के बाद भोटेकोशी नदी में तेज बाढ़ आई। इसके बाद पानी त्रिशूली नदी के रास्ते आगे बढ़ता गया और नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी पूर्व समेत कई जिलों तक इसका असर पहुंचा।
24 घंटे बाद भी जारी है रेस्क्यू ऑपरेशन
आपदा के 24 घंटे बाद भी नेपाल में खोज और बचाव अभियान जारी है। सुरक्षा बलों, स्थानीय प्रशासन और राहत टीमों की मदद से प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन इलाकों तक पहुंचना है जहां बाढ़ और भूस्खलन के कारण सड़क संपर्क टूट गया है। कई स्थानों पर संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई है, जिससे लापता लोगों की सही संख्या और उनकी स्थिति का पता लगाने में मुश्किल आ रही है।
बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी लापता
बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र तीर्थयात्रियों और ट्रेकिंग के लिए आने वाले पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है। ऐसे में नेपाल के अलावा भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और यूक्रेन समेत कई देशों के नागरिकों के प्रभावित होने की खबर सामने आई है।
नेपाल पर्यटन बोर्ड की जानकारी के अनुसार, लापता पर्यटकों में भारत के 100 से अधिक नागरिक, अमेरिका के 54, ऑस्ट्रेलिया के 34 और इंग्लैंड के 33 लोग शामिल बताए गए हैं। नेपाल के भी 100 से अधिक लोगों के लापता होने की बात सामने आई है।
इसी बीच चीन के सरकारी मीडिया ने तिब्बत क्षेत्र में तीन लोगों की मौत और 265 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है। तिब्बत की ओर से सामने आए कुछ CCTV फुटेज में पानी और मलबे की तेज लहर को सीमा क्षेत्र की इमारतों से टकराते हुए देखा गया।
133 भारतीय नागरिकों समेत कई NRI की तलाश
नेपाल में फंसे लोगों में भारतीय नागरिकों की संख्या भी काफी ज्यादा बताई जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कम से कम 133 भारतीय नागरिक और 37 अप्रवासी भारतीय यानी NRI लापता बताए गए हैं।
इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कई तीर्थयात्री भी शामिल हैं। एक ट्रैवल एजेंसी के मुताबिक, प्रभावित भारतीयों में कम से कम 59 लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे। संचार व्यवस्था बाधित होने के कारण उनके परिवारों को भी पूरी जानकारी नहीं मिल पा रही है।
तमिलनाडु के 57 पर्यटकों में 37 का पता नहीं
तमिलनाडु से नेपाल गए पर्यटकों को लेकर भी चिंता बढ़ी हुई है। जानकारी के मुताबिक, राज्य के 57 पर्यटकों में से 37 का अभी तक पता नहीं चल पाया है, जबकि 20 लोगों के बारे में जानकारी मिलने की बात कही गई है।
बताया गया कि ये पर्यटक हिमालय क्षेत्र में स्थित एक मंदिर की यात्रा पर जा रहे थे। पश्चिम बंगाल के लोगों को लेकर भी ऐसी ही चिंता सामने आई है। कोलकाता से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया 32 सदस्यों का एक समूह भी प्रभावित लोगों में शामिल बताया जा रहा है।
ईशा फाउंडेशन के 77 सदस्य भी लापता
गैर-लाभकारी संस्था ईशा फाउंडेशन की ओर से भी जानकारी दी गई है कि उसके 77 सदस्य लापता बताए जा रहे हैं। ये लोग एक आव्रजन केंद्र पर मौजूद थे। बाढ़ के कारण इलाके में संपर्क टूटने के बाद उनके बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है।
नेपाल में प्रभावित भारतीय नागरिकों और उनके परिजनों की सहायता के लिए भारतीय दूतावास के अलावा तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, राजस्थान और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों ने भी हेल्पलाइन शुरू की हैं।
भारत ने नेपाल को भेजी राहत सामग्री, दूतावास ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
आपदा के बाद भारत ने नेपाल को हरसंभव मानवीय सहायता का भरोसा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बातचीत कर राहत और बचाव कार्यों में सहयोग का आश्वासन दिया। भारत की ओर से राहत सामग्री की पहली खेप भी भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। लोगों को +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500 पर संपर्क करने को कहा गया है।
नेपाल पर्यटन बोर्ड ने भी सहायता के लिए टोल-फ्री इमरजेंसी नंबर 1234, हॉटलाइन 1144 और पर्यटक पुलिस का नंबर 9851289445 जारी किया है। वहीं बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास की ओर से 0086 185 1428 4905 नंबर जारी किया गया है, जिस पर व्हाट्सऐप के माध्यम से भी संपर्क किया जा सकता है।
8 ट्रकों में पहुंचाई गई करीब 8 टन राहत सामग्री
नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, रसुवा क्षेत्र में प्रभावित लोगों के लिए करीब आठ टन राहत सामग्री भेजी गई है। नेपाल सेना के आठ ट्रकों के जरिए बुधवार शाम राहत सामग्री प्रभावित क्षेत्रों में भेजी गई।
इस सामग्री में मच्छरदानी, कंबल, सोलर लाइट, सोलर पैनल और स्लीपिंग बैग समेत जरूरी सामान शामिल हैं। प्रशासन का प्रयास है कि बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित लोगों तक जल्द से जल्द भोजन, दवाएं और अन्य जरूरी सामान पहुंचाया जाए।
पुलिस और सेना के जवान भी लापता
इस प्राकृतिक आपदा में आम लोगों के साथ-साथ सुरक्षा बलों के जवान भी प्रभावित हुए हैं। नेपाल के दर्जनों पुलिस अधिकारी और सेना के जवानों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। बिजली विभाग के कुछ कर्मचारियों के भी लापता होने की बात कही जा रही है।
इसके अलावा कम से कम एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। इससे बाढ़ प्रभावित इलाकों में बिजली और बुनियादी सेवाओं पर भी असर पड़ने की आशंका है।
भूकंप या लैंडस्लाइड? कैसे आई इतनी भयावह बाढ़
अचानक आई इस बाढ़ को लेकर शुरुआत में नेपाल के अधिकारियों को लगा कि शायद बाढ़ से पहले भूकंप आया था। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के अनुसार, स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया और करीब तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ की सूचना मिली।
हालांकि, अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी USGS की ओर से सामने आई जानकारी के मुताबिक, जिस तरह की ऊर्जा महसूस की गई, उसका संबंध भूस्खलन से हो सकता है। विशेषज्ञ अब यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि भूकंप, लैंडस्लाइड और अचानक आई बाढ़ के बीच वास्तविक संबंध क्या था।
200 किलोमीटर तक के इलाके पर असर
अधिकारियों के मुताबिक, बाढ़ का प्रभाव नेपाल-तिब्बत सीमा से लेकर करीब 70 से 200 किलोमीटर दूर तक के इलाकों में देखा गया। पानी और मलबे के तेज बहाव ने कई बस्तियों को प्रभावित किया।
रसुवा और धादिंग के बाद बाढ़ का असर नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी पूर्व जैसे इलाकों में भी पहुंचा। कई जगहों पर नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की कोशिश की गई।
नेपाल के पीएम बोले- पूरा देश सदमे में
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने आपदा पर दुख जताते हुए कहा कि पूरा देश सदमे और गहरे दुख में है। बाढ़ से बचे कुछ लोगों ने बताया कि उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों को पानी के तेज बहाव में बहते हुए देखा।
नेपाल सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों को खोजने और प्रभावित इलाकों में जरूरी राहत पहुंचाने की है। भारत, अमेरिका, चीन और यूरोपीय संघ समेत कई देशों ने नेपाल के साथ एकजुटता जताई है और राहत सहायता उपलब्ध कराने की बात कही है।
ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और यूक्रेन के नागरिक भी प्रभावित
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने पुष्टि की है कि नेपाल में लापता लोगों में 34 ऑस्ट्रेलियाई नागरिक भी शामिल हैं। न्यूजीलैंड के विदेश मामलों और व्यापार मंत्रालय ने भी प्रभावित क्षेत्र में मौजूद अपने नागरिकों को लेकर जानकारी जुटाने की बात कही है।
वहीं यूक्रेन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई बाढ़ के बाद उसके 53 नागरिकों के लापता होने की जानकारी मिली है। मंत्रालय ने कहा कि अभी तक ऐसी कोई पुष्टि नहीं हुई है कि इन नागरिकों की मौत हुई है या वे घायल हैं।
जलवायु परिवर्तन की भूमिका पर भी उठे सवाल
आपदा के बाद विशेषज्ञ इस घटना के पीछे की परिस्थितियों का अध्ययन कर रहे हैं। हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और जलवायु परिवर्तन को लेकर पहले से चिंता जताई जाती रही है। हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि मौजूदा बाढ़ में जलवायु परिवर्तन की सीधी भूमिका के बारे में अभी निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
फिलहाल नेपाल में प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, घायलों का इलाज, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और टूटे सड़क-पुल संपर्क को बहाल करना है। जैसे-जैसे रेस्क्यू अभियान आगे बढ़ेगा, नुकसान और प्रभावित लोगों की संख्या की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
