Nepal Flood: विनाशकारी बाढ़ के बाद नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है। भारत ने शुरुआती दौर से ही नेपाल की मदद के लिए राहत सामग्री और विशेष बचाव दल भेजे हैं। नेपाली प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में भारत और चीन की मदद के लिए आभार जताया है।
काठमांडू: नेपाल में आई भीषण बाढ़ और तबाही के बीच भारत ने एक बार फिर पड़ोसी धर्म निभाते हुए राहत और बचाव अभियान में मदद का हाथ बढ़ाया है। भारत की ओर से नेपाल के लिए अब तक 68 टन से अधिक राहत सामग्री और विशेष बचाव दल भेजे जा चुके हैं। इस मदद के लिए नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भारत के साथ चीन का भी आभार जताया है।
नेपाल में पिछले महीने के आखिर में आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर जान-माल को नुकसान पहुंचाया है। कई इलाकों में बाढ़ और मलबे के कारण संपर्क व्यवस्था प्रभावित हुई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इस मुश्किल वक्त में भारत और चीन ने नेपाल को राहत पहुंचाने के लिए तेजी से कदम उठाए हैं।
संसद में PM बालेन शाह ने भारत-चीन की मदद को सराहा
बुधवार को नेपाल की संसद में प्रधानमंत्री बालेन शाह ने आपदा के दौरान मिली अंतरराष्ट्रीय सहायता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी प्राकृतिक आपदा के समय बाहरी मदद लेने से इनकार करने का कोई सवाल नहीं था। उनके मुताबिक, नेपाल ने समय पर सहायता हासिल करने के लिए विभिन्न देशों और निजी क्षेत्र के साथ समन्वय किया।
बालेन शाह ने कहा कि भारत और चीन की ओर से समय रहते सहायता पहुंचाई गई, जिससे राहत एवं बचाव से जुड़े कई जरूरी काम जल्द शुरू किए जा सके। उन्होंने दोनों देशों के तकनीकी विशेषज्ञों और बचाव दलों की भूमिका की भी सराहना की।
पहले दिन से ही नेपाल के साथ खड़ा रहा भारत
नेपाली प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत और चीन से पहुंचे तकनीकी विशेषज्ञों ने शुरुआती चरण में प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने और वहां राहत अभियान चलाने की संभावनाओं का आकलन करने में मदद की। इसके लिए हवाई सर्वे सहित अलग-अलग स्तर पर स्थिति का अध्ययन किया गया।
शाह के मुताबिक, भारतीय तकनीकी दल अपेक्षाकृत कम समय में दूर-दराज के प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में सफल रहे। उन्होंने बताया कि कई इलाकों में कीचड़ और गाद की मोटी परत इतनी ज्यादा थी कि वहां भारी मशीनों के साथ-साथ सुरक्षाबलों के जवानों के लिए भी खड़ा होना मुश्किल हो रहा था।
भारत ने भेजी 68 टन से ज्यादा राहत सामग्री
भारत की ओर से नेपाल के लिए राहत अभियान लगातार जारी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को जानकारी दी कि नेपाल के लिए भारत का पांचवां राहत विमान भी रवाना किया गया है। इस विमान में 11 सदस्यीय बचाव दल, विशेष बचाव उपकरण और करीब 5.5 टन जरूरी दवाइयां भेजी गई हैं।
अब तक भेजी गई 68 टन से अधिक राहत सामग्री में कंबल, स्लीपिंग बैग, मजबूत तिरपाल, प्लास्टिक शीट और हाइजीन किट जैसी आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं। इसके अलावा दवाइयां, खाद्य पैकेट, सोलर लैंप, पानी शुद्ध करने वाली गोलियां और पोर्टेबल जनरेटर भी नेपाल भेजे गए हैं।
नेपाल में मौतों का आंकड़ा 1100 के पार
नेपाल में बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। बाढ़ के कई दिन बाद भी अलग-अलग इलाकों से शव बरामद किए जा रहे हैं। नेपाल पुलिस के मुताबिक मंगलवार शाम तक 1,127 शव बरामद किए जा चुके थे, जबकि पुलिस की वेबसाइट पर 4,858 लोगों के लापता होने की जानकारी दर्ज थी।
लापता लोगों की बड़ी संख्या को देखते हुए अधिकारियों को आशंका है कि मृतकों का आंकड़ा आगे और बढ़ सकता है। राहत एजेंसियां और सुरक्षाबल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में तलाशी अभियान चला रहे हैं।
हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश
नेपाली अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक उन लोगों को तलाशना है, जिनके जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे होने की आशंका है। कई प्रभावित इलाकों में मलबा और खराब मौसम राहत एवं बचाव अभियान को मुश्किल बना रहे हैं।
वहीं, बरामद किए जा रहे अज्ञात शवों की पहचान भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। अधिकारियों ने अज्ञात शवों की पहचान के लिए डीएनए जांच की प्रक्रिया अपनाने की बात कही है।
भारत-नेपाल रिश्तों में दिखी दोस्ती की तस्वीर
नेपाल की इस भीषण प्राकृतिक आपदा के बीच भारत की ओर से लगातार भेजी जा रही राहत सामग्री और बचाव दल दोनों देशों के बीच सहयोग को दर्शाते हैं। नेपाल सरकार जहां प्रभावित लोगों की तलाश, राहत, बचाव और पुनर्वास पर ध्यान केंद्रित कर रही है, वहीं भारत की ओर से भी अभियान में जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री बालेन शाह का संसद में भारत और चीन को धन्यवाद देना इसी सहयोग की अहम तस्वीर के तौर पर देखा जा रहा है। फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है और प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों तक मदद पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
