सरायकेला-खरसावां, झारखंड
झारखंड के एक छोटे से अस्पताल से ऐसी खबर आई है, जो दिल हिला देती है। राजनगर CHC में एक गर्भवती महिला की डिलीवरी के दौरान बिजली चली गई… और सबसे दुख की बात … अस्पताल में कोई बैकअप तक नहीं था।
बताया जा रहा है कि डॉक्टर और स्टाफ ने मोबाइल की रोशनी में ही डिलीवरी कराने की कोशिश की। सोचिए… एक माँ और उसका बच्चा, जिनकी ज़िंदगी सबसे ज्यादा सुरक्षित होनी चाहिए थी, वो ऐसी हालत में थे जहां बेसिक सुविधा तक नहीं थी।
महिला का नाम बिनीता बानरा था, जो खुद एक स्वास्थ्य सहिया थीं … यानी दूसरों की मदद करने वाली। लेकिन जब उन्हें मदद की ज़रूरत पड़ी, सिस्टम ने उनका साथ नहीं दिया।
परिजनों का कहना है कि हालत बिगड़ती रही, लेकिन न सही इलाज मिला और न ही समय पर दूसरे अस्पताल भेजा गया। आखिर में माँ और नवजात … दोनों की जान चली गई।
इस घटना के बाद लोगों में गुस्सा है। सवाल उठ रहे हैं … क्या एक अस्पताल में बिजली का बैकअप भी नहीं होना चाहिए? क्या ऐसी लापरवाही माफ की जा सकती है?
सरकार की तरफ से कार्रवाई की बात कही गई है। प्रभारी डॉक्टर को सस्पेंड करने के आदेश दिए गए हैं और जांच भी शुरू हो गई है।लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है…
क्या इस कार्रवाई से वो दो ज़िंदगियां वापस आ सकती हैं? कभी-कभी खबर सिर्फ खबर नहीं होती… वो सिस्टम का आईना होती है।
