पलामू
“कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती” — यह लाइन झारखंड बोर्ड 12वीं के रिजल्ट में सच साबित कर दिखाया है पलामू के शाहपुर निवासी फैजान आलम ने। JAC 12वीं परीक्षा 2026 में फैजान ने 500 में 483 अंक हासिल कर पूरे झारखंड में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद फैजान की यह सफलता आज हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा बन गई है।
फैजान के पिता एम.डी. शकील अहमद गुजरात में मजदूरी करते हैं, जबकि उनकी मां कौशर बानो लंबे समय से बीमार हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है। मां के इलाज के लिए हर तीन महीने में वेल्लोर जाना पड़ता है, जिससे घर का खर्च और बढ़ जाता है। इन सब मुश्किलों के बावजूद फैजान ने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी और आर.के. प्लस टू उच्च विद्यालय, पाटन से पढ़ाई करते हुए यह बड़ी उपलब्धि हासिल की।
फैजान ने बताया कि उन्हें पहले यकीन ही नहीं हुआ कि वे राज्य के सेकेंड टॉपर बन गए हैं। जब रिश्तेदारों और जानने वालों के फोन आने लगे, तब उन्हें अपनी सफलता का एहसास हुआ। उन्होंने अपनी पढ़ाई के लिए रोजाना एक तय शेड्यूल बनाया था। वे हर दिन 5 से 6 घंटे पढ़ाई करते थे और दिन में 2 से 3 बार अपना स्टडी प्लान बदलते थे ताकि पढ़ाई बेहतर तरीके से हो सके।
ट्यूशन के बाद घर के काम करना और अपनी मां की देखभाल करना भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। कई बार उन्हें रात 11 से 12 बजे तक पढ़ाई करनी पड़ती थी। फैजान ने कहा कि उनके छोटे भाई ने भी घर के कामों में मदद की, जिससे उन्हें पढ़ाई के लिए समय मिल सका। वे अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और मामा को देते हैं।
फैजान आलम का सपना सिविल सेवा में जाने का है। उनका कहना है कि वे समाज में हो रहे अन्याय और अत्याचार को बदलना चाहते हैं और प्रशासनिक सेवा में जाकर लोगों के लिए काम करना चाहते हैं। उन्होंने छात्रों को संदेश दिया कि पढ़ाई को शुरुआत से ही गंभीरता से लेना चाहिए ताकि परीक्षा के समय दबाव महसूस न हो।
पलामू
“कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती” — यह लाइन झारखंड बोर्ड 12वीं के रिजल्ट में सच साबित कर दिखाया है पलामू के शाहपुर निवासी फैजान आलम ने। JAC 12वीं परीक्षा 2026 में फैजान ने 500 में 483 अंक हासिल कर पूरे झारखंड में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद फैजान की यह सफलता आज हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा बन गई है।
फैजान के पिता एम.डी. शकील अहमद गुजरात में मजदूरी करते हैं, जबकि उनकी मां कौशर बानो लंबे समय से बीमार हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है। मां के इलाज के लिए हर तीन महीने में वेल्लोर जाना पड़ता है, जिससे घर का खर्च और बढ़ जाता है। इन सब मुश्किलों के बावजूद फैजान ने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी और आर.के. प्लस टू उच्च विद्यालय, पाटन से पढ़ाई करते हुए यह बड़ी उपलब्धि हासिल की।
फैजान ने बताया कि उन्हें पहले यकीन ही नहीं हुआ कि वे राज्य के सेकेंड टॉपर बन गए हैं। जब रिश्तेदारों और जानने वालों के फोन आने लगे, तब उन्हें अपनी सफलता का एहसास हुआ। उन्होंने अपनी पढ़ाई के लिए रोजाना एक तय शेड्यूल बनाया था। वे हर दिन 5 से 6 घंटे पढ़ाई करते थे और दिन में 2 से 3 बार अपना स्टडी प्लान बदलते थे ताकि पढ़ाई बेहतर तरीके से हो सके।
ट्यूशन के बाद घर के काम करना और अपनी मां की देखभाल करना भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। कई बार उन्हें रात 11 से 12 बजे तक पढ़ाई करनी पड़ती थी। फैजान ने कहा कि उनके छोटे भाई ने भी घर के कामों में मदद की, जिससे उन्हें पढ़ाई के लिए समय मिल सका। वे अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और मामा को देते हैं।
फैजान आलम का सपना सिविल सेवा में जाने का है। उनका कहना है कि वे समाज में हो रहे अन्याय और अत्याचार को बदलना चाहते हैं और प्रशासनिक सेवा में जाकर लोगों के लिए काम करना चाहते हैं। उन्होंने छात्रों को संदेश दिया कि पढ़ाई को शुरुआत से ही गंभीरता से लेना चाहिए ताकि परीक्षा के समय दबाव महसूस न हो।
