झारखंड में एनीमिया यानी खून की कमी लंबे समय से एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। खासकर महिलाओं और बच्चों में यह समस्या तेजी से देखने को मिलती है। अब इस समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार डिजिटल तकनीक का सहारा ले रही है। इसी दिशा में AMB T-4 मोबाइल ऐप को पूरे राज्य में लागू करने की तैयारी तेज कर दी गई है। नामकुम स्थित एनएचएम कार्यालय में आयोजित ऑनलाइन बैठक में इस ऐप के सफल क्रियान्वयन और तकनीकी सुविधाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
इस ऐप की खास बात यह है कि यह ऑफलाइन मोड में भी काम करेगा और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग के जरिए गंभीर एनीमिया के मामलों को ट्रैक किया जा सकेगा। इसे VHSND और PMSMA जैसे स्वास्थ्य कार्यक्रमों से जोड़ने की योजना भी बनाई जा रही है ताकि स्वास्थ्य सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो सके। अधिकारियों के अनुसार अगले एक महीने के भीतर पूरे राज्य में इस ऐप को सक्रिय करने का लक्ष्य रखा गया है।
झारखंड के स्वास्थ्य मॉडल को हाल ही में राष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ी पहचान मिली है। चंडीगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन में AMB T-4 मोबाइल ऐप और ‘एकीकृत शिशु देखभाल मॉडल’ को देश की सर्वश्रेष्ठ कार्यप्रणालियों में शामिल कर सम्मानित किया गया। राज्य में सहिया और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा किए जा रहे संयुक्त गृह भ्रमण मॉडल की भी काफी सराहना हुई, जिसने कुपोषित बच्चों की पहचान और इलाज को तेज करने में अहम भूमिका निभाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि झारखंड का यह मॉडल दूसरे राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।
