प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हाल ही में शुरू हुआ छह देशों का दौरा भारत की ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक रिश्तों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। इस यात्रा की शुरुआत उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से की है, जहां वे राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, खासकर LPG और कच्चे तेल के रणनीतिक भंडारण जैसे मुद्दों पर बड़े समझौते होने की उम्मीद है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया में हालात लगातार बदल रहे हैं और ऊर्जा बाजार पर इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है।

इस यात्रा का सबसे बड़ा फोकस भारत की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित और स्थिर बनाना बताया जा रहा है। UAE द्वारा OPEC से बाहर निकलने के बाद तेल आपूर्ति और उत्पादन नीतियों में बड़े बदलाव की संभावना है, जिसका असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में प्रधानमंत्री की यह मुलाकात दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इसके बाद पीएम मोदी नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की यात्रा करेंगे, जहां तकनीक, रक्षा और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी।
