CJP नेताओं की हिरासत पर ध्रुव राठी का बयान, बोले- ‘एकता ही हमारी ताकत’; राहुल गांधी ने भी उठाए सवाल

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के मामले ने राजनीतिक बहस तेज कर दी है। इस कार्रवाई पर यूट्यूबर ध्रुव राठी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रतिक्रिया दी है। ध्रुव राठी ने लोकतंत्र और देश को बचाने के लिए भारतीयों से एकजुट होने की अपील की, जबकि राहुल गांधी ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान तिरंगा फहराने और प्रदर्शनकारियों के संवैधानिक अधिकारों का मुद्दा उठाया। वहीं, CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी अदालत के फैसले पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की है।

ध्रुव राठी बोले- एकता ही हमारी ताकत

CJP के विरोध प्रदर्शन से जुड़े इस मामले में यूट्यूबर ध्रुव राठी ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने राहुल गांधी की पोस्ट को रीशेयर करते हुए प्रदर्शनकारियों के समर्थन में एकजुटता का संदेश दिया।

ध्रुव राठी ने अपने पोस्ट में कहा, “एकता ही हमारी ताकत है। सभी भारतीयों को भारत और लोकतंत्र को बचाने के लिए एकजुट होना चाहिए।”

उनके इस बयान को CJP नेताओं की न्यायिक हिरासत और जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन को लेकर जारी बहस के संदर्भ में देखा जा रहा है। इस मामले में राजनीतिक नेताओं और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

राहुल गांधी ने न्यायिक हिरासत पर जताई आपत्ति

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी CJP के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान तिरंगा फहराने और युवाओं के अधिकारों का मुद्दा उठाया।

राहुल गांधी ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय ध्वज फहराना कोई अपराध नहीं है। उन्होंने युवाओं को जेल में भेजे जाने की कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे कायरता से भरा कदम बताया।

अपने पोस्ट में उन्होंने आगे कहा कि छात्र, युवा, पत्रकार और इंडिया ब्लॉक जैसे अलग-अलग नाम और बैनर हो सकते हैं, लेकिन सभी प्रदर्शनकारियों का मुद्दा एक है। उनके मुताबिक, प्रदर्शनकारी अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं।

राहुल गांधी ने यह भी कहा कि जंतर-मंतर भारत के लोगों का है और उन्होंने इसे वापस लेने की बात कही। उनके बयान में विरोध प्रदर्शन के अधिकार और लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर जोर दिया गया।

अभिजीत दीपके ने पूछा- सौरव दास और आशुतोष रांका को जेल क्यों भेजा गया?

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी दोनों नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल किया कि सौरव दास और आशुतोष रांका ने ऐसा कौन-सा अपराध किया था, जिसके कारण उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया।

अभिजीत दीपके ने तिरंगा फहराने के मुद्दे को उठाते हुए पूछा कि क्या देश में राष्ट्रीय ध्वज फहराना अपराध है। उन्होंने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा।

दीपके ने प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए उन्हें “डरपोक तानाशाह” कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराने के कारण दोनों नेताओं को पांच दिनों के लिए जेल भेजा गया। उन्होंने इस कार्रवाई को तानाशाही का संकेत बताते हुए इसकी तुलना अंग्रेजों के शासनकाल से की।

उनका कहना था कि इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर सवाल खड़े करती है। हालांकि, ये आरोप और राजनीतिक टिप्पणियां अभिजीत दीपके की ओर से की गई हैं।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और संवैधानिक अधिकारों को लेकर बहस

CJP नेताओं की न्यायिक हिरासत के बाद जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन, राष्ट्रीय ध्वज फहराने और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। राहुल गांधी ने जहां प्रदर्शनकारियों की एकजुटता और संवैधानिक अधिकारों पर जोर दिया, वहीं ध्रुव राठी ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए सभी भारतीयों से एक साथ आने की अपील की।

दूसरी ओर, अभिजीत दीपके ने हिरासत के फैसले पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार की आलोचना की। इन बयानों के बीच मामले से जुड़े न्यायिक आदेश और हिरासत के कानूनी आधार को समझना भी महत्वपूर्ण है।

सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के फैसले पर इन नेताओं ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। फिलहाल, इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और लोकतांत्रिक अधिकारों पर बहस चर्चा में बनी हुई है।

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