Ranchi Jumbo Truck: रांची में इन दिनों एक विशालकाय ट्रेलर लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। पिस्का नगड़ी टोल नाके के पास पिछले तीन दिनों से खड़ा यह जंबो ट्रक अपनी लंबाई और पहियों की संख्या के कारण लोगों का ध्यान खींच रहा है। करीब 308 चक्कों वाला यह भारी-भरकम ट्रेलर ओडिशा के पारादीप बंदरगाह से उत्तर प्रदेश की एक चीनी मिल के लिए विशाल मशीन लेकर निकला है। लेकिन रास्ते में रेलवे से जरूरी क्लियरेंस नहीं मिलने के कारण इसका सफर फिलहाल रुक गया है। ट्रेलर को आगे बढ़ाने के लिए रेलवे के ओवरहेड बैरिकेड और बिजली की हाई-टेंशन तारों से जुड़ी तकनीकी बाधाओं को दूर करना जरूरी है।
308 पहियों वाला ट्रेलर बना लोगों के आकर्षण का केंद्र
पिस्का नगड़ी टोल नाके के पास खड़ा यह विशाल ट्रेलर स्थानीय लोगों और राहगीरों के लिए कौतूहल का विषय बन गया है। इसकी विशाल संरचना और मशीन का आकार देखकर लोग इसे देखने के लिए रुक रहे हैं। कई लोग जंबो ट्रेलर की तस्वीरें और वीडियो भी बना रहे हैं, जिसके चलते इसकी चर्चा सोशल मीडिया पर भी तेजी से हो रही है। दिनभर आसपास लोगों की आवाजाही बनी रहती है और लोग इस असाधारण वाहन के साथ तस्वीरें लेते नजर आ रहे हैं।
पारादीप से यूपी तक का सफर, दो महीने से सड़क पर है ट्रेलर
ट्रेलर के चालक दल के मुताबिक, यह भारी मशीन करीब दो महीने पहले ओडिशा के पारादीप बंदरगाह से उत्तर प्रदेश के लिए रवाना हुई थी। मशीन का वजन और ट्रेलर का विशाल आकार इतना अधिक है कि इसे सामान्य मालवाहक वाहनों की तरह तेज गति से नहीं चलाया जा सकता। रास्ते में सड़क की स्थिति, मोड़, पुल, बिजली के तार और रेलवे से जुड़े ढांचे को देखते हुए इसे बेहद सावधानी से आगे बढ़ाया जा रहा है। चालक दल का अनुमान है कि मंजिल तक पहुंचने में अभी करीब डेढ़ महीने का समय और लग सकता है।
पिस्का रेलवे फाटक पर क्यों अटका है 308 चक्कों वाला जंबो ट्रक?
इस समय ट्रेलर के सामने सबसे बड़ी चुनौती पिस्का रेलवे फाटक के पास सामने आ रही है। यहां सड़क के ऊपर रेलवे का लोहे का ओवरहेड बैरिकेड मौजूद है, जिसकी ऊंचाई इस विशाल वाहन के सुरक्षित निकलने में बाधा बन रही है। ट्रेलर को आगे ले जाने के लिए इस बैरिकेड को हटाना आवश्यक है। इसके अलावा रेलवे की हाई-टेंशन बिजली लाइनों को भी सुरक्षित तरीके से अस्थायी रूप से हटाने या व्यवस्थित करने की जरूरत पड़ सकती है। इन तकनीकी कार्यों के लिए रेलवे की अनुमति और क्लियरेंस जरूरी है। इसी कारण ट्रेलर फिलहाल नगड़ी टोल नाके के पास रुका हुआ है।
नई सड़क और डायवर्शन भी बड़ी चुनौती
ट्रेलर के रास्ते में केवल रेलवे का ढांचा ही चुनौती नहीं है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर चल रहे सड़क निर्माण, नए डायवर्शन और रास्ते की परिस्थितियां भी इस विशाल वाहन के लिए परीक्षा से कम नहीं हैं। करीब 100 फीट लंबाई वाले इस जंबो ट्रेलर को मोड़ने और संकरी जगहों से निकालने के लिए विशेष योजना और सावधानी की जरूरत पड़ती है। भारी मशीन के कारण वाहन की गति भी काफी कम रहती है।
क्लियरेंस के बाद सिमडेगा और बांसजोर बॉर्डर की ओर बढ़ेगा काफिला
रेलवे से आवश्यक अनुमति और तकनीकी बाधाएं दूर होने के बाद जंबो ट्रेलर अपने अगले सफर पर रवाना होगा। इसके रूट में बांसजोर बॉर्डर और सिमडेगा का इलाका भी शामिल है। चालक दल के अनुसार नगड़ी से आगे बढ़ने के बाद सिमडेगा पहुंचने में करीब पांच दिन लग सकते हैं। वहां भी सड़क, डायवर्शन और मोड़ों को पार करना ट्रेलर के लिए चुनौतीपूर्ण होगा।
इतनी धीमी क्यों है इस विशाल ट्रेलर की रफ्तार?
विशाल मशीन को सुरक्षित तरीके से पहुंचाने के लिए ट्रेलर को बेहद नियंत्रित गति से चलाया जा रहा है। रास्ते में आने वाले बिजली के तार, रेलवे क्रॉसिंग, पुल, मोड़ और सड़क की चौड़ाई का पहले आकलन किया जाता है। जरूरत पड़ने पर रास्ते में मौजूद अवरोधों को हटाने या अस्थायी व्यवस्था करने के बाद ही ट्रेलर को आगे बढ़ाया जाता है। यही वजह है कि पारादीप से उत्तर प्रदेश तक की यह यात्रा सामान्य सड़क यात्रा के मुकाबले कई गुना लंबी हो रही है।
फिलहाल 308 चक्कों वाला यह जंबो ट्रेलर रांची के नगड़ी इलाके में रुका हुआ है और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है। रेलवे क्लियरेंस मिलने के बाद ही इसके आगे बढ़ने का रास्ता साफ होगा। विशाल मशीन को सुरक्षित रूप से उत्तर प्रदेश तक पहुंचाना चालक दल के साथ-साथ संबंधित विभागों के लिए भी एक बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती है।
