UPI पर 0.4% MDR का क्या होगा असर? ग्राहकों से नहीं वसूला जाएगा चार्ज, सरकार ने साफ किया पूरा नियम

नई दिल्ली: UPI से भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों के लिए सरकार ने शुल्क व्यवस्था को लेकर स्थिति काफी हद तक स्पष्ट कर दी है। नए UPI फ्रेमवर्क के तहत ₹2,000 से अधिक के कुछ व्यापारी लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत Merchant Discount Rate यानी MDR लागू होगा, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ग्राहक को UPI से भुगतान करने पर अलग से चार्ज देना पड़ेगा। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि MDR भुगतान व्यवस्था में शामिल पक्षों के बीच लिया जाने वाला शुल्क है और इसे ग्राहकों पर नहीं डाला जाना चाहिए।

₹2,000 तक के UPI भुगतान पर कोई MDR नहीं

नए नियमों के तहत ₹2,000 तक के Person-to-Merchant यानी P2M UPI भुगतान पर MDR लागू नहीं होगा। इसके अलावा Person-to-Person यानी P2P भुगतान भी राशि की सीमा के बिना मुफ्त रहेगा। सरकार के मुताबिक, कुल P2M लेन-देन में करीब 96 प्रतिशत लेन-देन नए MDR से प्रभावित नहीं होंगे।

इसका सीधा मतलब यह है कि किसी दुकान पर ₹500, ₹1,000 या ₹2,000 का UPI भुगतान करने वाले ग्राहक से MDR के नाम पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए। इसी तरह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को भेजे जाने वाले UPI पैसे पर भी राशि चाहे जितनी हो, कोई लेन-देन शुल्क नहीं लगाया जाएगा।

₹2,000 से ऊपर के भुगतान पर 0.4% MDR

सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के निर्धारित व्यापारी भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। यह रकम सरकार या NPCI द्वारा टैक्स के तौर पर नहीं वसूली जाती, बल्कि भुगतान इकोसिस्टम में शामिल बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और UPI ऐप प्रदाताओं के बीच साझा की जाती है।

बड़े लेन-देन के लिए भी अधिकतम सीमा तय की गई है। ₹75,000 या उससे अधिक के लेन-देन पर MDR प्रति ट्रांजेक्शन अधिकतम ₹300 तक सीमित रहेगा। यानी प्रतिशत के हिसाब से शुल्क बढ़ते रहने के बजाय इस स्तर पर एक कैप लागू होगा।

दुकानदार ग्राहक से MDR वसूल सकते हैं या नहीं?

इस पूरे बदलाव का सबसे अहम सवाल यही है कि अगर व्यापारी पर MDR लागू होगा तो क्या दुकानदार वह रकम ग्राहक से मांग सकता है? सरकार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, MDR ग्राहकों से वसूला जाने वाला शुल्क नहीं है। बैंकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि व्यापारी MDR का बोझ ग्राहकों पर न डालें। UPI ऐप प्रदाताओं को भी प्लेटफॉर्म फीस या छिपे हुए चार्ज लगाने से रोका गया है।

इसलिए किसी ग्राहक से केवल इसलिए अतिरिक्त रकम लेना कि उसने ₹2,000 से अधिक का भुगतान UPI के जरिए किया है, नए सरकारी फ्रेमवर्क के उद्देश्य के अनुरूप नहीं होगा।

छोटे दुकानदारों को भी राहत

सरकार ने छोटे कारोबारियों और स्ट्रीट वेंडर्स के लिए भी अलग प्रावधान रखा है। P2PM श्रेणी के तहत UPI QR कोड से प्रति माह ₹1 लाख तक भुगतान प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों को शून्य MDR का लाभ मिलता रहेगा। इससे छोटे दुकानदारों, स्थानीय कारोबारियों और स्ट्रीट वेंडर्स पर अतिरिक्त डिजिटल भुगतान लागत का असर कम रखने की व्यवस्था की गई है।

कुछ जरूरी क्षेत्रों में अलग MDR व्यवस्था

रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे आवश्यक तथा कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था की गई है। इन क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत के बजाय प्रति लेन-देन ₹5 का फ्लैट MDR लागू होगा। सरकार का कहना है कि इससे कम मार्जिन वाले कारोबार और जरूरी सेवाओं के लिए भुगतान लागत अधिक स्पष्ट रहेगी।

₹75,000 से ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर ₹300 की सीमा

नए नियमों में बड़े व्यापारी भुगतान को लेकर भी अधिकतम MDR सीमा तय की गई है। ₹75,000 या उससे अधिक के निर्धारित P2M लेन-देन पर MDR अधिकतम ₹300 प्रति ट्रांजेक्शन रहेगा। इसका उद्देश्य बहुत बड़े भुगतान पर प्रतिशत के आधार पर शुल्क को लगातार बढ़ने से रोकना है।

UPI पर पूरी तरह शुल्क लगने की बात सही नहीं

UPI को लेकर सोशल मीडिया और दूसरी जगहों पर ऐसी चर्चाएं भी हुई हैं कि अब सभी UPI भुगतान पर चार्ज लग सकता है। लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसा नहीं है। P2P भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेगा और ₹2,000 तक के P2M भुगतान भी MDR से बाहर रहेंगे। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, करीब 96 प्रतिशत व्यापारी लेन-देन प्रभावित नहीं होंगे।

UPI भुगतान करने वालों के लिए क्या बदलेगा?

आम ग्राहक के नजरिए से सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि UPI से भुगतान करते समय अलग से MDR देने की व्यवस्था नहीं है। नया शुल्क भुगतान इकोसिस्टम में व्यापारी लेन-देन के स्तर पर लागू होता है। इसलिए ग्राहक के लिए UPI का सामान्य इस्तेमाल पहले की तरह जारी रहेगा।

वहीं, व्यापारियों और पेमेंट इकोसिस्टम के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण है, क्योंकि ₹2,000 से अधिक के निर्धारित P2M भुगतान पर MDR की नई व्यवस्था लागू होगी। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य UPI सिस्टम की दीर्घकालिक स्थिरता बनाए रखना और भुगतान से जुड़े बुनियादी ढांचे तथा सुरक्षा में निवेश को समर्थन देना है।

सरकार ने UPI शुल्क को लेकर स्थिति की साफ

नए नियमों से साफ है कि UPI पर सभी भुगतान के लिए कोई सामान्य चार्ज नहीं लगाया गया है। ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान, छोटे व्यापारियों के लिए निर्धारित zero-MDR व्यवस्था और सभी P2P भुगतान मुफ्त रहेंगे। वहीं, ₹2,000 से अधिक के निर्धारित व्यापारी लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा, जिसकी अधिकतम सीमा कुछ बड़े लेन-देन में ₹300 है। सबसे अहम बात यह है कि यह MDR ग्राहक से वसूले जाने वाला शुल्क नहीं है।

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