मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में जारी उठापटक के बीच शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पार्टी में संभावित टूट और नेताओं के पाला बदलने की अटकलों के बीच अपने सभी विधायकों की आपात बैठक बुलाई। विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ आयोजित इस बैठक को पार्टी की एकजुटता दिखाने और आगामी राजनीतिक रणनीति तय करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बैठक ऐसे समय में हुई जब ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। विपक्षी खेमे का आरोप है कि यह अभियान शिवसेना (यूबीटी) के जनप्रतिनिधियों को अपने पाले में लाने की कोशिश का हिस्सा है।
बैठक के दौरान दिखी शक्ति प्रदर्शन की रणनीति
उद्धव ठाकरे की अगुवाई में हुई इस बैठक में पार्टी के अधिकांश विधायक शामिल हुए। कुल 26 विधायकों में से 22 नेताओं की मौजूदगी ने पार्टी नेतृत्व की ताकत का संदेश देने की कोशिश की। बैठक के अंत में सभी मौजूद विधायकों ने उद्धव ठाकरे के साथ सामूहिक तस्वीर खिंचवाकर एकजुटता का प्रदर्शन किया।
हालांकि चार विधायक बैठक में शामिल नहीं हो सके। पार्टी सूत्रों के अनुसार, अनुपस्थित नेताओं ने पहले ही नेतृत्व को अपनी व्यस्तताओं और स्थानीय कार्यक्रमों की जानकारी दे दी थी, इसलिए इसे किसी राजनीतिक असहमति से जोड़कर नहीं देखा जा रहा है।
दूसरी ओर शिंदे गुट में शामिल हुए बागी सांसद
जिस समय उद्धव ठाकरे अपने विधायकों के साथ बैठक कर रहे थे, उसी दौरान एक अन्य कार्यक्रम में शिवसेना (यूबीटी) से जुड़े छह बागी सांसदों ने आधिकारिक तौर पर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के दिनों में पार्टी के भीतर बढ़ती गतिविधियों और सांसदों के रुख को लेकर कई तरह की चर्चाएं तेज हुई हैं, जिसके चलते नेतृत्व लगातार संगठन को मजबूत करने में जुटा हुआ है।
उद्धव ठाकरे ने विधायकों को दिया आक्रामक भूमिका निभाने का निर्देश
बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे ने अपने विधायकों और विधान परिषद सदस्यों को विधानसभा के मानसून सत्र में मजबूती और आक्रामकता के साथ जनता से जुड़े मुद्दे उठाने के निर्देश दिए। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि किसानों, जल संकट, रोजगार और मुंबई से जुड़े बुनियादी मुद्दों पर सरकार को घेरने का यह उचित समय है।
पार्टी नेताओं के अनुसार, विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाड़ी सदन के भीतर अपनी भूमिका को और प्रभावी बनाने की तैयारी में है। इसी रणनीति के तहत विधायकों को बेहतर समन्वय और संगठित तरीके से सरकार के खिलाफ मुद्दे उठाने को कहा गया है।
किसानों और जल संकट के मुद्दों पर रहेगा फोकस
बैठक के बाद पार्टी नेताओं ने संकेत दिए कि किसानों की समस्याएं, विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्रों में पानी की कमी, तथा मुंबई से जुड़े नागरिक मुद्दे आगामी सत्र में प्रमुखता से उठाए जाएंगे। पार्टी का दावा है कि वह जनहित से जुड़े विषयों को सदन में मजबूती से रखने की तैयारी कर चुकी है।
बागी सांसदों के क्षेत्रों में सक्रिय होंगे पार्टी नेता
सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे ने अपने विधायकों और एमएलसी को उन संसदीय क्षेत्रों में सक्रिय होने का निर्देश भी दिया है, जहां से जुड़े सांसदों के शिंदे गुट में जाने की चर्चा है। पार्टी संगठन स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने और कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने के लिए विशेष रणनीति तैयार की जा रही है।
इसी क्रम में उद्धव ठाकरे ने 27 जून से 29 जून तक विभिन्न क्षेत्रों के दौरे की घोषणा भी की है। इस दौरान वे उन इलाकों में जाएंगे जहां हाल के दिनों में राजनीतिक घटनाक्रम सबसे अधिक चर्चा में रहे हैं।
आदित्य ठाकरे ने महायुति सरकार पर साधा निशाना
बैठक के बाद पार्टी नेता और पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे ने सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनहित के मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय राजनीतिक जोड़-तोड़ में अधिक व्यस्त है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी दलों को कमजोर करने की कोशिशें लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं हैं।
वहीं, वरिष्ठ नेता संजय राउत ने भी पार्टी छोड़ने की अटकलों को खारिज करते हुए दावा किया कि शिवसेना (यूबीटी) के सांसद और विधायक नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े हैं।
महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ी हलचल
विधानसभा सत्र के बीच जारी इन राजनीतिक घटनाक्रमों ने महाराष्ट्र की राजनीति को और अधिक गर्मा दिया है। एक ओर शिवसेना (यूबीटी) संगठन को मजबूत करने में जुटी है, तो दूसरी ओर शिंदे गुट अपने विस्तार की रणनीति पर काम कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इन घटनाओं का राज्य की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।
