कांकेर में भालू का खूनी हमला: दो ग्रामीणों की दर्दनाक मौत, एक गंभीर घायल; पहले से चेतावनी के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई

छत्तीसगढ़ : छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से मानव-वन्यजीव संघर्ष की एक दर्दनाक घटना सामने आई है। नरहरपुर वन परिक्षेत्र के मरकाटोला-लरगांव क्षेत्र में मादा भालू के हमले में दो ग्रामीणों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार जारी है। घटना के बाद पूरे इलाके में भय का माहौल है और ग्रामीणों में वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी भी देखने को मिल रही है।

मरकाटोला-लरगांव के जंगल में हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार, यह घटना नरहरपुर वन परिक्षेत्र के मरकाटोला-लरगांव स्थित स्कूल के पास जंगल में हुई। बताया जा रहा है कि जंगल में मौजूद मादा भालू ने अचानक ग्रामीणों पर हमला कर दिया। हमला इतना तेज था कि दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची तथा घायल को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया।

ग्रामीणों का आरोप- पहले ही दी थी खतरे की जानकारी

घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने वन विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल में एक मृत भालू के पास मादा भालू की मौजूदगी पहले ही देखी गई थी। लोगों ने इसका वीडियो भी बनाया था और सोशल मीडिया के जरिए संभावित खतरे की जानकारी साझा की थी। आरोप है कि सूचना मिलने के बावजूद वन विभाग ने क्षेत्र की घेराबंदी नहीं की और न ही लोगों को उस इलाके में जाने से रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की गई। ग्रामीणों का मानना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाते, तो इस हादसे को टाला जा सकता था।

कांकेर में लगातार बढ़ रही मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं

कांकेर जिले के वन क्षेत्रों से लगे गांवों में भालू के हमलों की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। हर वर्ष कई ग्रामीण इन हमलों में घायल होते हैं और कुछ मामलों में जान भी गंवानी पड़ती है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप, प्राकृतिक आवासों का लगातार कम होना और भोजन की उपलब्धता में कमी के कारण वन्यजीव आबादी रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ रही है, जिससे ऐसे संघर्ष बढ़ते जा रहे हैं।

विशेषज्ञों ने बताए सतर्क रहने के जरूरी उपाय

वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए विशेषज्ञों ने सतर्कता बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि घने जंगलों या संवेदनशील क्षेत्रों में अकेले जाने से बचना चाहिए, खासकर सुबह और शाम के समय। यदि किसी क्षेत्र में वन्यजीव, मृत जानवर या मादा भालू और उसके शावकों की मौजूदगी की सूचना मिले तो उस स्थान से दूरी बनाए रखें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को दें और विभाग द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पूरी तरह पालन करें।

वन विभाग की कार्रवाई पर सभी की नजर

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों की मांग है कि वन विभाग प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करे और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए। फिलहाल घटना की जांच की जा रही है और प्रशासन पूरे मामले की परिस्थितियों का पता लगाने में जुटा हुआ है।

Share:
Copied!