Khagaria News: बिहार के खगड़िया जिले में खुद को IAS अधिकारी बताकर लोगों पर रौब जमाने और कथित तौर पर ठगी करने वाले एक युवक की गिरफ्तारी के बाद कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। आरोपी की पहचान गोगरी थाना क्षेत्र के जमालपुर बाजार निवासी मनीष कुमार उर्फ मनीष कुमार गुप्ता के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, आरोपी सरकारी अधिकारी होने का झांसा देकर लोगों को प्रभावित करता था और अपनी निजी गाड़ियों पर ‘भारत सरकार’ तथा IAS से जुड़े बोर्ड लगाकर अपना दबदबा कायम करता था। उसके पास से Tesla कार, Tata Safari, Apple के पांच मोबाइल फोन, लैपटॉप, कई क्रेडिट-डेबिट कार्ड और अन्य दस्तावेज बरामद किए गए हैं। पुलिस अब उसकी संपत्ति, आय के स्रोत और कथित वित्तीय गतिविधियों की विस्तृत जांच कर रही है।
फर्जी IAS बनकर लोगों को देता था सरकारी अधिकारी होने का झांसा
खगड़िया पुलिस के मुताबिक, मनीष गुप्ता लंबे समय से खुद को IAS अधिकारी बताकर लोगों को भ्रमित कर रहा था। वह केवल गोगरी थाना क्षेत्र तक सीमित नहीं था, बल्कि बिहार के दूसरे जिलों में भी अपनी कथित पहचान और प्रभाव का इस्तेमाल करता था। पुलिस को सूचना मिली थी कि वह सरकारी अधिकारी होने का दावा करते हुए लोगों से कथित तौर पर ठगी और वसूली कर रहा है।
गुप्त सूचना के सत्यापन के बाद पुलिस ने टीम गठित की और आरोपी के घर पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान पुलिस को कई ऐसी चीजें मिलीं, जिनसे उसके सरकारी अधिकारी होने के दावे और उसकी कथित गतिविधियों को लेकर जांच का दायरा बढ़ गया।
पूछताछ में खुद को बताने लगा ‘गुप्त एजेंट’
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपी ने खुद को केंद्रीय सतर्कता आयोग से जुड़ा व्यक्ति बताने की कोशिश की। इतना ही नहीं, उसने खुद को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का गुप्त एजेंट होने का दावा भी किया।
हालांकि, पुलिस ने इन दावों को प्रथम दृष्टया फर्जी बताया है। छानबीन के दौरान आरोपी के पास से एक ऐसा पहचान पत्र भी बरामद हुआ, जिसमें उसे IAS अधिकारी के तौर पर दर्शाया गया था। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस पहचान पत्र और अन्य दस्तावेजों को किस तरह तैयार किया गया और इनका इस्तेमाल कहां-कहां किया गया।
घर से 31 लीटर विदेशी शराब भी बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस को आरोपी के घर से करीब 31 लीटर विदेशी शराब भी मिली। पुलिस के अनुसार, बरामद शराब अलग-अलग विदेशी ब्रांड की है। इस बरामदगी ने मामले में एक और कानूनी पहलू जोड़ दिया है।
पुलिस अब शराब की बरामदगी से जुड़े तथ्यों की भी जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आरोपी के पास यह शराब कहां से आई थी।
बारहसिंगा के दो सींग मिलने से बढ़ी जांच
मनीष गुप्ता के घर से पुलिस को बारहसिंगा के दो सींग भी बरामद हुए हैं। पुलिस के मुताबिक, वन्यजीव से जुड़ी इस तरह की बरामदगी गंभीर अपराध के दायरे में आ सकती है और इसके लिए वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
इस बरामदगी के बाद पुलिस की जांच केवल फर्जी पहचान और कथित ठगी तक सीमित नहीं रही है। अब वन्यजीव से जुड़े पहलू की भी जांच की जा रही है।
‘भारत सरकार’ के बोर्ड वाली Tesla ने खींचा ध्यान
छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से एक Tesla कार भी जब्त की है। इस कार पर कथित तौर पर ‘भारत सरकार’ का बोर्ड लगा हुआ था। इसी वजह से यह वाहन भी जांच के दौरान चर्चा का विषय बना है।
खगड़िया एसपी भानु प्रताप सिंह के मुताबिक, यह Tesla का बड़ा मॉडल है और इसमें आधुनिक ड्राइविंग असिस्टेंस से जुड़े फीचर मौजूद हैं। हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया कि इसे पूरी तरह ‘ड्राइवरलेस कार’ कहना तकनीकी रूप से सही नहीं होगा। वाहन में उन्नत ड्राइविंग सहायता प्रणाली से जुड़े फीचर होने की बात कही गई है।
इसके अलावा पुलिस ने एक Tata Safari भी बरामद की है, जिस पर भी कथित तौर पर ‘भारत सरकार’ का बोर्ड लगा हुआ था। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इन वाहनों का इस्तेमाल आरोपी ने अपनी फर्जी सरकारी पहचान को मजबूत करने के लिए किस तरह किया।
Apple के 5 मोबाइल, 20 क्रेडिट कार्ड और 8 डेबिट कार्ड मिले
पुलिस की तलाशी में आरोपी के पास से Apple कंपनी के पांच मोबाइल फोन और दो लैपटॉप भी मिले हैं। इसके अलावा अलग-अलग बैंकों के 20 क्रेडिट कार्ड, 8 डेबिट कार्ड और 4 चेकबुक बरामद की गई हैं।
इतने बड़े पैमाने पर बैंकिंग और इलेक्ट्रॉनिक सामान मिलने के बाद पुलिस अब आरोपी के वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि बरामद मोबाइल, लैपटॉप, कार्ड और दस्तावेजों की जांच के बाद कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।
100 करोड़ की संपत्ति के दावे की भी जांच
मामले में आरोपी की कथित संपत्ति को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। पुलिस उसकी संपत्ति और आय के स्रोतों का मूल्यांकन कर रही है। संपत्ति का आंकड़ा करीब 100 करोड़ रुपये तक होने से जुड़े दावों की भी जांच की जा रही है। फिलहाल पुलिस ने संपत्ति से जुड़े सभी दावों का सत्यापन शुरू कर दिया है।
पुलिस को आशंका है कि आरोपी ने लोगों को प्रभावित करने के लिए अपनी फर्जी सरकारी पहचान का इस्तेमाल किया और कथित ठगी या अन्य संदिग्ध गतिविधियों के जरिए संपत्ति अर्जित की हो सकती है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
बिहार से बाहर और विदेशों में भी संपत्ति होने की सूचना
खगड़िया पुलिस के अनुसार, आरोपी की संपत्ति बिहार के अलावा दूसरे राज्यों और विदेशों में होने की भी सूचना मिली है। हालांकि, इस दावे का अभी सत्यापन किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस संबंध में और तथ्य सामने आ सकते हैं।
पुलिस अधीक्षक भानु प्रताप सिंह ने बताया कि मामले में वित्तीय पहलुओं की भी गहराई से जांच की जाएगी। जरूरत पड़ने पर आर्थिक अपराध इकाई की मदद ली जाएगी, ताकि आरोपी की संपत्ति, बैंकिंग लेनदेन और आय के स्रोतों का पता लगाया जा सके।
फर्जी IAS से आगे बढ़कर वित्तीय नेटवर्क की तलाश
पुलिस की शुरुआती जांच से संकेत मिल रहे हैं कि मामला सिर्फ फर्जी IAS अधिकारी बनकर लोगों को गुमराह करने तक सीमित नहीं हो सकता। बरामद दस्तावेज, वाहन, बैंक कार्ड, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, विदेशी शराब और वन्यजीव से जुड़े सामान ने जांच के कई नए पहलू खोल दिए हैं।
अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मनीष गुप्ता ने कितने लोगों को अपनी कथित सरकारी पहचान का झांसा दिया, किन-किन जगहों पर उसका नेटवर्क था, उसकी संपत्ति किन स्रोतों से बनी और उसके बैंक खातों में किस तरह के वित्तीय लेनदेन हुए।
मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच आगे बढ़ने के साथ आरोपी की कथित फर्जी पहचान, संपत्ति और वित्तीय गतिविधियों से जुड़े और भी खुलासे होने की संभावना है।
