नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण व्यवस्था और UGC के नए इक्विटी नियमों को लेकर बड़ा विरोध-प्रदर्शन हुआ। गैर-आरक्षित वर्गों से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने जाति आधारित आरक्षण में सुधार, UGC Equity Regulations और SC/ST एक्ट के कथित दुरुपयोग को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शन ‘रिजर्वेशन रिफॉर्म आंदोलन’ के बैनर तले आयोजित किया गया, जिसमें राजस्थान की जनरल सेना, चाणक्य सेना और करणी सेना समेत कुछ संगठनों की भागीदारी का दावा किया गया।
प्रदर्शनकारियों की ओर से दावा किया गया कि कार्यक्रम में हजारों लोग पहुंचे। हालांकि, भीड़ की स्वतंत्र संख्या की पुष्टि इस उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। प्रदर्शन को देखते हुए जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
आरक्षण में सुधार की मांग को लेकर जुटे प्रदर्शनकारी
प्रदर्शनकारियों ने मौजूदा आरक्षण व्यवस्था में बदलाव और सुधार की मांग उठाई। उनका कहना था कि सरकार को आरक्षण व्यवस्था को लेकर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए और इस मुद्दे पर एक श्वेत पत्र जारी करना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में ‘कोटा के अंदर कोटा’ का मुद्दा भी शामिल रहा। उनका सवाल था कि आरक्षण व्यवस्था के भीतर लाभ के समान वितरण को सुनिश्चित करने के लिए सरकार को स्पष्ट नीति क्यों नहीं बनानी चाहिए।
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने यह भी कहा कि आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर सरकार को सभी वर्गों की चिंताओं को ध्यान में रखकर पारदर्शी व्यवस्था तैयार करनी चाहिए।
UGC के इक्विटी नियमों का भी विरोध
जंतर-मंतर पर जुटे प्रदर्शनकारियों ने UGC के इक्विटी नियमों को लेकर भी विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नए नियमों को लेकर कई वर्गों के बीच असहमति और आशंकाएं हैं।
उनका कहना है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता और भेदभाव रोकने के उद्देश्य से बनाए जा रहे नियमों को लागू करते समय सभी पक्षों की चिंताओं को सुना जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और संबंधित संस्थाओं से नियमों पर व्यापक चर्चा की मांग की।
SC/ST एक्ट के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठा
प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने SC/ST एक्ट के कथित दुरुपयोग का मुद्दा भी उठाया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि किसी भी कानून का इस्तेमाल किसी व्यक्ति को गलत तरीके से निशाना बनाने के लिए नहीं होना चाहिए।
उन्होंने सरकार से ऐसे मामलों में दुरुपयोग की आशंका को रोकने के लिए उचित कदम उठाने की मांग की। हालांकि, SC/ST Act के बारे में प्रदर्शनकारियों के दावों को कानून की पूरी तस्वीर के रूप में नहीं देखा जा सकता; कानून के प्रावधान और न्यायिक व्याख्याएं अलग-अलग मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
जंतर-मंतर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम
प्रदर्शन के मद्देनजर जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इलाके में बैरिकेडिंग की गई और दिल्ली पुलिस के साथ रैपिड एक्शन फोर्स तथा ITBP के जवानों की तैनाती की गई।
प्रदर्शन की अनुमति और आयोजन को लेकर बनी स्थिति के बीच कार्यक्रम आयोजित किया गया। मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने भीड़ को नियंत्रित रखने और इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर ध्यान दिया।
प्रदर्शन में हनुमान चालीसा का पाठ
प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया और धार्मिक नारे भी लगाए। इससे प्रदर्शन का माहौल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों के साथ धार्मिक गतिविधियों से भी जुड़ा नजर आया।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल के समर्थन में नहीं बल्कि आरक्षण व्यवस्था में बदलाव और कथित असमानताओं के खिलाफ है।
‘भीड़ को पैसे देकर नहीं बुलाया गया’ का दावा
प्रदर्शन से जुड़े एक सोशल मीडिया हैंडल की ओर से दावा किया गया कि इस आयोजन को किसी राजनीतिक पार्टी या विदेशी एजेंसी से फंडिंग नहीं मिलती है। पोस्ट में यह भी कहा गया कि जंतर-मंतर पर पहुंचने वाले लोगों को पैसे देकर नहीं बुलाया गया।
आयोजकों के अनुसार, प्रदर्शन का उद्देश्य व्यवस्था में निष्पक्षता की मांग उठाना और देश के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है। हालांकि, फंडिंग और भीड़ से जुड़े इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं हो सकी है।
सरकार से श्वेत पत्र की मांग
प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण व्यवस्था को लेकर सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। उनका कहना है कि देश में आरक्षण का लाभ किन वर्गों तक और किस तरह पहुंच रहा है, इस पर सार्वजनिक रूप से स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए।
इसके अलावा ‘कोटा के अंदर कोटा’ और क्रीमी लेयर से जुड़े सवाल भी प्रदर्शन में उठाए गए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि आरक्षण व्यवस्था में लाभ के वितरण को लेकर स्पष्ट और पारदर्शी नीति बनाई जाए।
आरक्षण का मुद्दा फिर बना सियासी बहस का केंद्र
जंतर-मंतर का यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब देश में आरक्षण, सामाजिक न्याय और उच्च शिक्षा में समान अवसर को लेकर लगातार बहस चलती रही है। एक ओर आरक्षण समर्थक समूह ऐतिहासिक और सामाजिक असमानताओं को दूर करने के लिए आरक्षण को जरूरी बताते हैं, वहीं गैर-आरक्षित वर्गों से जुड़े कुछ संगठन मौजूदा व्यवस्था में सुधार और लाभ के बेहतर वितरण की मांग करते रहे हैं।
UGC के इक्विटी नियमों को लेकर भी अलग-अलग पक्षों की अपनी चिंताएं हैं। ऐसे में जंतर-मंतर पर हुआ प्रदर्शन आरक्षण और उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ले आया है।
