Khandwa Train News: दिल्ली से केरल लौट रहे स्कूली बच्चों से भरी मंगला लक्षद्वीप एक्सप्रेस में शुक्रवार रात अचानक अफरा-तफरी मच गई। ट्रेन में सफर कर रहे करीब 15 से 20 बच्चों की खाना खाने के कुछ देर बाद तबीयत बिगड़ने लगी। बच्चों ने उल्टी, जी मिचलाने और बेचैनी जैसी शिकायतें कीं। स्थिति की जानकारी रेलवे अधिकारियों तक पहुंचते ही ट्रेन को खंडवा रेलवे स्टेशन पर रोककर तत्काल मेडिकल टीम को बुलाया गया। डॉक्टरों ने मौके पर ही बच्चों की जांच कर प्राथमिक उपचार और जरूरी दवाइयां दीं। चिकित्सकों ने शुरुआती तौर पर फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई है।
पेंट्री कार से खाना खाने के बाद बिगड़ी तबीयत
जानकारी के मुताबिक, केरल के रहने वाले स्कूली बच्चे अपने स्कूल स्टाफ के साथ शैक्षणिक भ्रमण के लिए दिल्ली गए थे। टूर समाप्त होने के बाद सभी बच्चे ट्रेन से वापस केरल लौट रहे थे। बताया जा रहा है कि इटारसी स्टेशन पार करने के बाद बच्चों ने मंगला लक्षद्वीप एक्सप्रेस की पेंट्री कार से खाना लिया था।
खाना खाने के कुछ समय बाद बच्चों में एक के बाद एक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी शुरू हो गई। कई बच्चों को उल्टी हुई, जबकि कुछ ने जी मिचलाने और बेचैनी की शिकायत की। बच्चों की संख्या को देखते हुए ट्रेन में मौजूद स्टाफ ने तत्काल रेलवे अधिकारियों को इसकी जानकारी दी।
खंडवा स्टेशन पर पहले से तैयार थी मेडिकल टीम
बच्चों की तबीयत खराब होने की सूचना रेलवे को पहले ही मिल चुकी थी। इसलिए खंडवा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन पहुंचने से पहले ही मेडिकल टीम को अलर्ट कर दिया गया था। स्टेशन मास्टर जीएल मीणा के मुताबिक, मंगला लक्षद्वीप एक्सप्रेस रात करीब 9 बजकर 5 मिनट पर खंडवा स्टेशन पहुंची।
ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर रुकते ही डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने प्रभावित बच्चों की जांच शुरू कर दी। उन्हें ट्रेन के भीतर ही प्राथमिक उपचार दिया गया और आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई गईं।
करीब 40 मिनट तक खंडवा में रुकी ट्रेन
मेडिकल जांच और प्राथमिक उपचार के लिए ट्रेन करीब 40 मिनट तक खंडवा रेलवे स्टेशन पर खड़ी रही। इस दौरान जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. अनिरुद्ध कौशल, सीएसपी अभिनव बारंगे, सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर समेत रेलवे और जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।
चिकित्सकीय टीम ने बच्चों की स्थिति का जायजा लिया और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया। उपचार के बाद जब बच्चों की हालत नियंत्रण में बताई गई तो ट्रेन को आगे रवाना करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
रात 9:45 बजे भुसावल के लिए रवाना हुई ट्रेन
प्राथमिक उपचार के बाद मंगला लक्षद्वीप एक्सप्रेस को रात करीब 9 बजकर 45 मिनट पर भुसावल की ओर रवाना कर दिया गया। बच्चों के साथ रेलवे के डॉक्टरों और कर्मचारियों की एक टीम को भी ट्रेन में भेजा गया, ताकि आगे के सफर के दौरान किसी बच्चे की तबीयत दोबारा बिगड़ने पर तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल सभी प्रभावित बच्चों की स्थिति प्राथमिक उपचार के बाद नियंत्रण में बताई गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम भी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।
15 से 18 साल के हैं सभी बच्चे
बताया गया है कि बीमार पड़े सभी बच्चे केरल के रहने वाले हैं और एक क्रिश्चियन स्कूल से जुड़े हुए हैं। बच्चों की उम्र करीब 15 से 18 वर्ष के बीच बताई जा रही है। वे स्कूल के शिक्षकों और स्टाफ के साथ शैक्षणिक टूर पर दिल्ली पहुंचे थे।
टूर समाप्त होने के बाद बच्चों का समूह ट्रेन से केरल वापस जा रहा था। इसी दौरान पेंट्री कार से खाना खाने के बाद उनकी तबीयत खराब होने लगी।
खाने की गुणवत्ता को लेकर उठे सवाल
घटना के बाद ट्रेन की पेंट्री कार से दिए गए भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, बच्चों की तबीयत खराब होने की वास्तविक वजह क्या थी, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। डॉक्टरों ने शुरुआती स्तर पर फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई है।
स्वास्थ्य विभाग और रेलवे की टीमें मामले पर नजर रख रही हैं। बच्चों की हालत फिलहाल स्थिर बताई गई है और उन्हें जरूरी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
रेलवे और प्रशासन ने संभाला मोर्चा
बच्चों की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलते ही रेलवे और जिला प्रशासन ने जिस तेजी से मेडिकल व्यवस्था की, उससे प्रभावित बच्चों को खंडवा स्टेशन पर तत्काल उपचार मिल सका। ट्रेन के पहुंचने से पहले मेडिकल टीम को तैयार रखना और उपचार के बाद डॉक्टरों की टीम को बच्चों के साथ आगे भेजना एहतियाती कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
अब पूरे मामले में यह पता लगाने की जरूरत होगी कि बच्चों ने पेंट्री कार से कौन-सा भोजन लिया था और भोजन के बाद ही इतने बच्चों की तबीयत एक साथ क्यों बिगड़ी। जांच के बाद ही घटना की वास्तविक वजह और भोजन की गुणवत्ता से जुड़ी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
