त्रिशूली हाइड्रोपावर टनल में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, मलबे और पानी के बीच बचाव दल की बढ़ी मुश्किलें; भारत ने 11 टन राहत सामग्री के साथ टनल एक्सपर्ट और DNA टीम भेजी
Nepal Flood Rescue: नेपाल में चीन-नेपाल सीमा क्षेत्र से आई भीषण बाढ़ और भारी बारिश के बाद राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। आपदा प्रभावित इलाकों में कई जगह हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। इसी बीच त्रिशूली हाइड्रोपावर के टनल में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए बचाव दल लगातार अभियान चला रहा है। टनल के भीतर करीब 4 से 5 फीट तक गीला मलबा जमा होने के कारण रेस्क्यू टीम को काफी परेशानी हो रही है। पानी और कीचड़ से भरे टनल में हर कदम बेहद सावधानी से उठाया जा रहा है।
मौके पर मौजूद रेस्क्यू टीम के एक सदस्य ने टनल के अंदर की स्थिति भी दिखाई। वीडियो में टनल के भीतर जमा मलबे और पानी के कारण पैदा हुई मुश्किलों का अंदाजा लगाया जा सकता है। बचावकर्मी लगातार रास्ता साफ करने और टनल में फंसे मजदूरों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
टनल में 4 से 5 फीट तक जमा है गीला मलबा
त्रिशूली हाइड्रोपावर टनल में बचाव अभियान के सामने सबसे बड़ी चुनौती गीला मलबा है। टनल के अंदर कई फीट तक जमा कीचड़ और पानी के कारण रेस्क्यू टीम की आवाजाही मुश्किल हो गई है। ऐसे हालात में बचावकर्मियों को मलबा हटाने के साथ-साथ टनल की सुरक्षा का भी लगातार आकलन करना पड़ रहा है।
नेपाल में जारी व्यापक राहत अभियान के बीच टनल में फंसे मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालना प्राथमिकता बनी हुई है। रेस्क्यू टीम उपलब्ध संसाधनों के साथ अभियान को आगे बढ़ा रही है।
भारत ने नेपाल के लिए भेजी राहत की चौथी खेप
नेपाल में जारी संकट के बीच भारत ने भी राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के मुताबिक, शनिवार रात भारतीय वायुसेना का C-130 विमान करीब 11 टन राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंचा। यह नेपाल के लिए भारत की राहत सामग्री की चौथी खेप बताई गई है।
इस खेप की खास बात यह है कि इसमें खोज एवं बचाव उपकरणों से लैस टनल टेक्निकल टीम भी शामिल है। टीम का उद्देश्य नेपाल में चल रहे बचाव अभियान में तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना है, खासकर उन स्थानों पर जहां सामान्य रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना मुश्किल हो रहा है।
फोरेंसिक और DNA विशेषज्ञ भी नेपाल पहुंचे
भारत की ओर से भेजी गई सहायता सिर्फ राहत सामग्री तक सीमित नहीं है। चौथी खेप में फोरेंसिक उपकरणों के साथ DNA विश्लेषण विशेषज्ञों की टीम भी भेजी गई है। यह टीम आपदा में बरामद शवों की पहचान के काम में नेपाल प्रशासन को तकनीकी मदद दे सकती है।
राहत सामग्री में कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और हाइजीन किट जैसी जरूरी वस्तुएं भी शामिल हैं। आपदा प्रभावित लोगों तक इन सामग्रियों को पहुंचाने का काम राहत एजेंसियों के जरिए किया जा रहा है।
230 फीट लंबे स्टील ब्रिज के लिए 16 ट्रक भी पहुंचे
नेपाल में राहत अभियान के दौरान क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों को बहाल करना भी बड़ी चुनौती है। भारत की ओर से 230 फीट लंबे सिंगल-लेन मॉड्यूलर स्टील ब्रिज के निर्माण के लिए आवश्यक मशीनरी और उपकरण सड़क मार्ग से नेपाल भेजे गए हैं।
बताया गया है कि इन सामानों को लेकर 16 ट्रक नेपाल पहुंच चुके हैं। प्रभावित इलाकों में पुल के निर्माण से टूटे हुए संपर्क मार्गों को दोबारा जोड़ने में मदद मिल सकती है। इससे राहत सामग्री पहुंचाने और बचाव अभियानों को भी गति मिलने की उम्मीद है।
भारत अब तक भेज चुका है 68.5 टन राहत सामग्री
विदेश मंत्री एस. जयशंकर के अनुसार, नेपाल में आपदा प्रभावित लोगों की मदद के लिए भारत अब तक कुल 68.5 टन राहत सामग्री हवाई मार्ग से काठमांडू भेज चुका है। इसमें दवाइयां, पोर्टेबल जनरेटर सेट, खाद्य पैकेट, पानी शुद्ध करने वाली गोलियां और विभिन्न तकनीकी उपकरण शामिल हैं।
भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि नेपाल सरकार की जरूरत के मुताबिक वह हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। नेपाल की ओर से राहत सामग्री या तकनीकी विशेषज्ञों की आवश्यकता सामने आने पर भारत तत्काल सहायता भेज रहा है।
734 शव बरामद, सिर्फ 22 की हो सकी पहचान
नेपाल में आई भीषण बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के बाद अब तक 734 शव बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें से सिर्फ 22 शवों की पहचान हो सकी है। बड़ी संख्या में शवों की पहचान नहीं हो पाने के कारण प्रशासन के सामने एक गंभीर चुनौती बनी हुई है।
अस्पतालों में शव रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं होने की वजह से सरकार को शवों को एयरटाइट बैग में सुरक्षित रखकर जमीन के नीचे दफनाने की प्रक्रिया अपनानी पड़ रही है। ऐसे में भारत से पहुंची फोरेंसिक और DNA विशेषज्ञों की टीम पहचान की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
ग्लेशियर टूटने के बाद आई थी तबाही?
नेपाल में आई इस भीषण आपदा के पीछे ग्लेशियर टूटने की घटना को प्रमुख कारणों में बताया जा रहा है। नेपाल-चीन सीमा के पास चीन के शिजांग स्वायत्त क्षेत्र के गिरोंग काउंटी में ग्लेशियर के ढहने का एक वीडियो भी सामने आया है।
बताया गया कि एक पर्यटक पहाड़ी क्षेत्र में वीडियो रिकॉर्ड कर रहा था। इसी दौरान कैमरे में ऊंचाई पर मौजूद ग्लेशियर के टूटकर गिरने का दृश्य कैद हो गया। इसके बाद नेपाल-चीन सीमा पर स्थित गिरोंग पोर्ट के आसपास अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा आने से स्थिति बिगड़ गई।
टनल रेस्क्यू से लेकर शवों की पहचान तक कई मोर्चों पर चुनौती
नेपाल में राहत अभियान इस समय कई स्तरों पर चल रहा है। एक तरफ त्रिशूली हाइड्रोपावर टनल में फंसे मजदूरों को निकालने के लिए बचाव दल गीले मलबे से जूझ रहा है, तो दूसरी तरफ बड़ी संख्या में बरामद शवों की पहचान करना भी प्रशासन के सामने चुनौती है।
भारत की ओर से भेजी गई टनल तकनीकी टीम, फोरेंसिक विशेषज्ञ, DNA विशेषज्ञ और राहत सामग्री इस अभियान को अतिरिक्त तकनीकी एवं मानवीय सहायता दे सकती है। वहीं मॉड्यूलर स्टील ब्रिज के लिए पहुंची मशीनरी से प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क बहाल करने की कोशिशों को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है और टनल में फंसे मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।
