ताड़मेटला हमले मामले में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

2010 के ताड़मेटला माओवादी हमले मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए 10 आरोपियों को बरी रखने का फैसला बरकरार रखा। इस हमले में 76 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे।

ताड़मेटला गांव, सुकमा जिला, छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 2010 के ताड़मेटला माओवादी हमले मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें 10 आरोपियों को दोबारा दोषी ठहराने की मांग की गई थी। अब सभी आरोपी बरी ही रहेंगे।

यह मामला 6 अप्रैल 2010 का है, जब सुकमा इलाके के ताड़मेटला जंगल में CRPF और पुलिस की टीम पर माओवादियों ने हमला किया था। उस समय जवान एरिया डोमिनेशन पेट्रोलिंग पर निकले थे। अचानक घात लगाकर हमला किया गया, जिसमें CRPF के 75 जवान और एक पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। यह हमला देश के सबसे बड़े नक्सली हमलों में से एक माना जाता है।

इस मामले में 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। उन पर हत्या, साजिश, दंगा और हथियारों से जुड़े कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। बाद में मामला दंतेवाड़ा की अदालत में चला। साल 2013 में ट्रायल कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। अदालत का कहना था कि आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले।

इसके बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने हाई कोर्ट में अपील की थी। अब हाई कोर्ट ने भी ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही माना है। कोर्ट ने कहा कि मामले में सीधे सबूतों की कमी थी और जांच में कई प्रक्रियागत गलतियां हुई थीं। इसी वजह से आरोपियों का दोष “संदेह से परे” साबित नहीं हो पाया।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट का कहना था कि अपराध बहुत गंभीर था, लेकिन सिर्फ शक के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

बताया जा रहा है कि जिन 10 लोगों को बरी किया गया था, उनमें से दो की अब मौत हो चुकी है। हाई कोर्ट का यह फैसला अब काफी चर्चा में है और इसे न्याय व्यवस्था के एक बड़े फैसले के रूप में देखा जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *