देवघर
झारखंड का देवघर अब सिर्फ बाबा नगरी ही नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी और मेडिकल रिसर्च का बड़ा सेंटर बनने की ओर बढ़ रहा है। केंद्र सरकार ने देवघर के लिए दो बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है, जिससे यहां के युवाओं और मरीजों दोनों को बड़ा फायदा मिलेगा।
पहला बड़ा प्रोजेक्ट जसीडीह के STPI सेंटर में नाइलेट (NIELIT) का एडवांस सेंटर खोलने का है। इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 20 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया है। यहां AI, साइबर सिक्योरिटी, सोलर टेक्नोलॉजी, मोबाइल रिपेयरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे आधुनिक कोर्स सिखाए जाएंगे। बताया जा रहा है कि अगले 5 साल में करीब 10 हजार युवाओं को यहां ट्रेनिंग मिलेगी। इससे देवघर और आसपास के युवाओं को नौकरी के लिए बड़े शहरों की तरफ नहीं जाना पड़ेगा।
सरकार ने इस सेंटर के शुरुआती काम और लैब तैयार करने के लिए पहले चरण में 6 करोड़ रुपये जारी करने की भी मंजूरी दे दी है। शुरुआत में हर साल 400 से 500 छात्रों को ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसे आगे बढ़ाकर 2000 छात्रों तक पहुंचाने की योजना है।
दूसरी बड़ी सौगात देवघर AIIMS को मिली है। यहां पूर्वी भारत की पहली BSL-3 वायरस रिसर्च लैब बनाई जाएगी। इस लैब में कोविड-19, बर्ड फ्लू और MDR-TB जैसी खतरनाक बीमारियों पर रिसर्च और जांच की जाएगी। अभी तक ऐसी गंभीर बीमारियों के सैंपल जांच के लिए दिल्ली या दूसरे बड़े शहरों में भेजने पड़ते थे, लेकिन अब यह सुविधा देवघर में ही मिलेगी।
यह लैब बिहार, झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए भी काफी फायदेमंद साबित होगी। सरकार का लक्ष्य है कि इस साल के अंदर ही लैब पूरी तरह शुरू हो जाए।
इन दोनों प्रोजेक्ट्स के बाद देवघर की पहचान और भी मजबूत होने वाली है। आने वाले समय में यह शहर शिक्षा, टेक्नोलॉजी और हेल्थ सेक्टर का बड़ा हब बन सकता है।
