Delhi Police News: हिरासत से छूटने के बाद नेहा बोरा ने उठाए सवाल, अभिजीत दिपके की गिरफ्तारी पर CJP ने मांगा जवाब
दिल्ली में तिरंगा मार्च को लेकर हुए घटनाक्रम के बीच ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा को पुलिस ने रिहा कर दिया है, जबकि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों को शुक्रवार को तिरंगा मार्च से जुड़े घटनाक्रम के दौरान हिरासत में लिया गया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अभिजीत दिपके को शनिवार को अदालत में पेश किया जाना था। उनकी गिरफ्तारी के बाद CJP ने पुलिस की कार्रवाई और उनके ठिकाने को लेकर सवाल उठाए थे। वहीं, रिहाई के बाद नेहा बोरा ने हिरासत में रखे जाने के तरीके और कानूनी सहायता मिलने में हुई कथित देरी पर आपत्ति जताई।
इस पूरे घटनाक्रम ने दिल्ली में तिरंगा मार्च, पुलिस की कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों के अधिकारों और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ उठाई जा रही मांगों को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज कर दी है।
रिहाई के बाद नेहा बोरा ने हिरासत की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
रिहा होने के बाद नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि आम नागरिकों के साथ इस तरह व्यवहार किया जाता है, जैसे वे किसी गंभीर अपराध में शामिल हों। उनके मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान लोगों को हिरासत में लेकर कई घंटों तक थाने में रखा जाता है और फिर अगले दिन छोड़ा जाता है।
नेहा ने सवाल उठाया कि लोगों को पूरी रात हिरासत में रखने को किस कानून या आदेश के तहत उचित ठहराया जा सकता है। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं को हिरासत में रखने और रिहा करने की प्रक्रिया पर सवाल किए।
नेहा बोरा ने यह भी कहा कि मौजूदा आंदोलन ने हिरासत की प्रक्रिया से जुड़े कई सवाल सामने रखे हैं। उनके अनुसार, दिल्ली में अव्यवस्था के लिए प्रदर्शनकारियों को जिम्मेदार ठहराने से पहले यह भी देखा जाना चाहिए कि आम लोगों को किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने अपने बयान में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग चलाने और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को रोकने की मांग भी दोहराई। उनका कहना था कि आम नागरिकों के मतदान के अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए।
नेहा बोरा का आरोप: वकील से संपर्क करने में हुई देरी
नेहा बोरा ने दावा किया कि हिरासत के दौरान पुलिसकर्मियों ने उनसे नाम, पता और दूसरी जानकारियां मांगीं। उन्होंने आरोप लगाया कि शुरुआत में उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया और कानूनी सलाहकार से बातचीत करने में भी परेशानी हुई।
नेहा के मुताबिक, उनके वकीलों ने उनसे संपर्क करने के लिए पांच से छह घंटे तक प्रयास किया। उन्होंने दावा किया कि किसी तरह फोन पर संपर्क होने के बाद ही वकीलों को उनसे मिलने की अनुमति मिली।
नेहा ने इस घटनाक्रम को लेकर पुलिस की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। हालांकि, हिरासत की परिस्थितियों और कानूनी सहायता से जुड़े उनके आरोपों पर पुलिस का विस्तृत पक्ष उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।
AISA ने सोशल मीडिया पर पूछा था- नेहा बोरा को कब रिहा किया जाएगा?
नेहा बोरा की हिरासत के दौरान AISA ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करके उनकी स्थिति के बारे में जानकारी मांगी थी। संगठन ने सवाल उठाया था कि उसकी अध्यक्ष को आधी रात तक पुलिस थाने में क्यों रखा गया है और उन्हें कब रिहा किया जाएगा।
AISA ने एक महिला छात्र नेता को रात में हिरासत में रखे जाने पर भी आपत्ति जताई थी। संगठन की ओर से पहले दावा किया गया था कि नेहा को दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली में मादक पदार्थ रोधी कार्यबल से जुड़े एक प्रकोष्ठ में रखा गया है। बाद में संगठन ने बताया कि नेहा का पता आरके पुरम पुलिस थाने में चला।
AISA के पूर्व अध्यक्ष एन साई बालाजी ने भी इस मामले में सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि सादे कपड़ों में आए लोगों ने नेहा को बस से अकेले हिरासत में क्यों लिया और उनके ठिकाने को लेकर अलग-अलग जानकारियां क्यों सामने आईं।
अभिजीत दिपके की गिरफ्तारी पर CJP ने क्या कहा?
कॉकरोच जनता पार्टी ने आरोप लगाया था कि दिल्ली पुलिस उसके संस्थापक अभिजीत दिपके को किसी अज्ञात स्थान पर ले गई और संगठन का उनसे संपर्क टूट गया। पार्टी ने यह भी दावा किया कि उन्हें वकीलों से बातचीत करने की अनुमति नहीं दी जा रही थी।
CJP ने एक्स पर पोस्ट कर पुलिस से सवाल किया कि अभिजीत दिपके को कहां ले जाया गया है। संगठन ने कहा कि वह तिरंगा लेकर मार्च में शामिल होने के लिए घर से निकले थे और शांतिपूर्ण तरीके से तिरंगा लेकर चलने को अपराध नहीं माना जाना चाहिए।
CJP ने अपने बयान में युवाओं के साथ कथित तौर पर कठोर व्यवहार किए जाने पर आपत्ति जताई। संगठन का कहना था कि भारतीय नागरिकों को संविधान के तहत मिले अधिकारों और कानूनी संरक्षण का सम्मान किया जाना चाहिए।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अभिजीत दिपके को हिरासत में लिए जाने के बाद गिरफ्तार किया गया। शनिवार को उन्हें अदालत में पेश किए जाने की बात कही गई थी। गिरफ्तारी के कारणों और मामले की आगे की कानूनी स्थिति को लेकर अदालत की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।
‘एक अभिजीत को हिरासत में लेंगे तो हजारों खड़े होंगे’: CJP
अभिजीत दिपके की हिरासत के विरोध में CJP ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में आंदोलन जारी रखने की बात कही। संगठन ने कहा कि एक व्यक्ति को हिरासत में लेने से उसकी मांगें समाप्त नहीं होंगी और बड़ी संख्या में लोग विरोध के लिए आगे आ सकते हैं।
पार्टी ने अपने बयान में सौरव दास और आशुतोष रांका का भी उल्लेख किया। संगठन ने कहा कि उसके नेताओं को जेल में डालने या हिरासत में लेने से आंदोलन को रोका नहीं जा सकेगा।
CJP ने तिरंगे को अपनी पहचान और सम्मान बताते हुए कहा कि वह अपने विरोध प्रदर्शन को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है। ये बयान संगठन की ओर से दिए गए थे और इन्हें उसके विरोध के रुख के रूप में देखा जाना चाहिए।
मंडी हाउस और झंडेवालान से हिरासत में लिए जाने की जानकारी
घटनाक्रम के संबंध में सामने आई जानकारी के अनुसार, नेहा बोरा को मंडी हाउस से और अभिजीत दिपके को झंडेवालान क्षेत्र से हिरासत में लिया गया था। AISA के पूर्व अध्यक्ष एन साई बालाजी ने दावा किया कि नेहा को सादे कपड़ों में आए लोग अपने साथ ले गए थे।
माकपा के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि AISA के एक प्रतिनिधि ने उन्हें बताया था कि नेहा बोरा को तिरंगा मार्च में शामिल होने जाते समय मंडी हाउस से हिरासत में लिया गया। ब्रिटास के मुताबिक, नेहा को अकेले ले जाया गया था और उस समय उनका फोन भी उनके पास नहीं था।
CJP की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने भी अभिजीत दिपके और नेहा बोरा के बारे में जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की थी।
इन घटनाओं के दौरान अलग-अलग संगठनों और नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। हालांकि, हिरासत के स्थान, प्रक्रिया और कानूनी औचित्य से जुड़े सभी पहलुओं की पुष्टि के लिए पुलिस का आधिकारिक पक्ष और संबंधित दस्तावेज महत्वपूर्ण हैं।
तिरंगा मार्च, SIR और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को लेकर क्यों हो रहा है विरोध?
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया, जब CJP और उससे जुड़े प्रदर्शनकारी तिरंगा मार्च के जरिए अपनी मांगें उठा रहे थे। आंदोलन से जुड़ी मांगों में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग चलाने और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को रोकने की मांग शामिल है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों में नागरिकों के मतदान के अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए। दूसरी ओर, तिरंगा मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई, हिरासत में लिए गए लोगों की स्थिति और कानूनी सहायता मिलने के आरोप भी चर्चा का विषय बने।
नेहा बोरा की रिहाई और अभिजीत दिपके की गिरफ्तारी के बाद अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी। अदालत में पेशी और पुलिस की ओर से सामने आने वाली जानकारी से गिरफ्तारी के आधार तथा आगे की कार्रवाई के बारे में स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
