बिहार के कृषि छात्रों के लिए बड़ा मौका! अब पढ़ाई के साथ मिलेगी इंडस्ट्री ट्रेनिंग, स्टार्टअप शुरू करने का भी अवसर

Bihar Agriculture News: बिहार में कृषि शिक्षा को रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार ने अहम पहल की है। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के सभी 9 अंगीभूत महाविद्यालयों में ASSIST मॉडल लागू करने की घोषणा की है। इस योजना के तहत कृषि विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण, कृषि उद्योगों का अनुभव और स्टार्टअप से जुड़ने के अवसर मिलेंगे। योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2029-30 तक कुल 4.80 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।

बिहार में कृषि शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, रोजगारपरक और उद्यमिता-केंद्रित बनाने के लिए कृषि विभाग ने नई पहल की है। राज्य के कृषि विद्यार्थियों को केवल डिग्री हासिल करने और नौकरी तलाशने तक सीमित रखने के बजाय उन्हें आत्मनिर्भर उद्यमी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसी उद्देश्य से बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर के अधीन संचालित सभी 9 अंगीभूत महाविद्यालयों में ASSIST (Agriculture Students Securing Industrial and Start-up Training) मॉडल लागू किया जाएगा।

इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान ही कृषि उद्योगों, सफल स्टार्टअप, उद्यमियों और ग्रामीण स्तर पर संचालित कृषि गतिविधियों से जुड़ने का मौका मिलेगा। इससे वे कृषि क्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों को समझ सकेंगे और भविष्य में अपना व्यवसाय शुरू करने की दिशा में तैयारी कर पाएंगे।

ASSIST योजना के लिए 4.80 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति

बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा के अनुसार, ASSIST मॉडल के संचालन के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2029-30 तक कुल 4.80 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके अलावा, वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना को लागू करने के लिए 90 लाख रुपये के सहायक अनुदान की निकासी और व्यय को भी मंजूरी दी गई है।

इस वित्तीय प्रावधान का उद्देश्य कृषि महाविद्यालयों में कौशल आधारित प्रशिक्षण और औद्योगिक अनुभव से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देना है। योजना के जरिए विद्यार्थियों को कृषि क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार, स्वरोजगार और व्यवसाय की संभावनाओं से परिचित कराने की तैयारी है।

नौकरी तलाशने वाले नहीं, रोजगार देने वाले उद्यमी बनेंगे कृषि विद्यार्थी

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि बिहार सरकार का लक्ष्य कृषि विद्यार्थियों को केवल नौकरी तलाशने वाले युवाओं के रूप में विकसित करना नहीं है, बल्कि उन्हें रोजगार सृजित करने वाले उद्यमियों के रूप में तैयार करना है। उनके मुताबिक, कृषि क्षेत्र में संभावनाओं की कमी नहीं है। जरूरत विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव, उद्योगों से जुड़ाव और अपना उद्यम स्थापित करने के अवसर उपलब्ध कराने की है।

उन्होंने कहा कि ASSIST मॉडल इसी लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से विद्यार्थी अपने तकनीकी ज्ञान, प्रतिभा और नवाचार का इस्तेमाल करके कृषि क्षेत्र में नए व्यवसाय विकसित कर सकेंगे। ऐसे उद्यम न केवल विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर सकते हैं, बल्कि दूसरे युवाओं के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप विकसित होगी कृषि शिक्षा

कृषि मंत्री ने कृषि शिक्षा को वर्तमान समय की जरूरतों और बाजार में उपलब्ध अवसरों के अनुरूप विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की छठी डीन समिति की अनुशंसाओं और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप स्नातक कृषि पाठ्यक्रमों में शामिल कौशल संवर्धन पाठ्यक्रमों यानी Skill Enhancement Courses (SEC) को ASSIST मॉडल के जरिए व्यावहारिक रूप दिया जाएगा।

इस व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को केवल कक्षा में पढ़ाए जाने वाले विषयों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। उन्हें कृषि आधारित उद्योगों, सफल स्टार्टअप, अनुभवी उद्यमियों, ग्राम स्तरीय गतिविधियों और संबंधित प्रशासनिक संस्थानों से जोड़ा जाएगा। इससे विद्यार्थियों को यह समझने में मदद मिलेगी कि कृषि क्षेत्र में किन-किन प्रकार के रोजगार और व्यवसाय की संभावनाएं मौजूद हैं और उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में कैसे अपनाया जा सकता है।

हर सेमेस्टर में होगा ‘ASSIST Week’, मिलेगा जमीनी अनुभव

योजना की खास बात यह है कि विद्यार्थियों के लिए नियमित रूप से व्यावहारिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। स्नातक कृषि पाठ्यक्रम के प्रथम से चौथे सेमेस्टर तक प्रत्येक सेमेस्टर की मिड-टर्म परीक्षा के ठीक बाद वाले सप्ताह को ‘ASSIST Week’ के रूप में आयोजित किया जाएगा।

इस विशेष सप्ताह के दौरान विद्यार्थियों के लिए कई तरह की गतिविधियां प्रस्तावित हैं। इनमें व्यावहारिक प्रशिक्षण, कृषि उद्योगों का भ्रमण, सफल स्टार्टअप संचालकों के साथ संवाद, ग्राम स्तरीय गतिविधियों में भागीदारी और संबंधित संस्थानों का दौरा शामिल होगा।

इस व्यवस्था से विद्यार्थियों को कृषि क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों और कामकाज को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। वे उत्पादन, प्रसंस्करण, बाजार की मांग और कृषि व्यवसाय के संचालन से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी हासिल कर सकेंगे। इससे पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार के अवसरों का लाभ उठाने और स्वयं का उद्यम शुरू करने की दिशा में उनकी तैयारी मजबूत हो सकती है।

बायोफर्टिलाइजर से फूड प्रोसेसिंग तक, इन क्षेत्रों में मिलेगा प्रशिक्षण

ASSIST मॉडल के अंतर्गत कृषि से जुड़े कई बाजारोन्मुख क्षेत्रों में विशेष व्यावहारिक प्रशिक्षण देने की योजना है। इन क्षेत्रों में ऐसे व्यवसाय भी शामिल हैं, जिनमें अपेक्षाकृत छोटे स्तर से शुरुआत करके आगे बढ़ने और स्वरोजगार विकसित करने की संभावनाएं मौजूद हैं।

योजना के तहत जिन प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा, उनमें बायोफर्टिलाइजर, बायोपेस्टीसाइड, मशरूम उत्पादन, सजावटी मत्स्य पालन, टिशू कल्चर, वर्मीकम्पोस्ट, शहद उत्पादन और खाद्य प्रसंस्करण शामिल हैं।

इन क्षेत्रों में प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों को संबंधित तकनीकों, उत्पादन प्रक्रियाओं और व्यवसाय स्थापित करने की संभावनाओं से परिचित कराया जाएगा। इसका उद्देश्य उन्हें कृषि आधारित उत्पादों और सेवाओं के क्षेत्र में उद्यम शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप और स्वरोजगार को मिलेगा बढ़ावा

बिहार में कृषि विद्यार्थियों को उद्योगों और उद्यमियों से जोड़ने वाली यह पहल कृषि शिक्षा तथा बाजार के बीच की दूरी कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। व्यावहारिक प्रशिक्षण और जमीनी अनुभव के जरिए विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि कृषि से जुड़े विचारों को व्यावसायिक रूप कैसे दिया जा सकता है।

ASSIST मॉडल का मुख्य उद्देश्य कृषि शिक्षा को कौशल, नवाचार, स्वरोजगार और स्टार्टअप से जोड़ना है। यदि योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो इससे कृषि विद्यार्थियों को पारंपरिक रोजगार विकल्पों के साथ-साथ अपना व्यवसाय शुरू करने के नए रास्ते तलाशने में मदद मिल सकती है। साथ ही, कृषि आधारित उद्यमों के विकास से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।

कुल मिलाकर, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के सभी 9 अंगीभूत महाविद्यालयों में ASSIST मॉडल लागू करने की पहल का फोकस कृषि विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान ही उद्योग, बाजार और उद्यमिता से परिचित कराना है। अब इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रशिक्षण गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों को मिलने वाले वास्तविक अवसरों पर नजर रहेगी।

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