Bihar Cooperative Department News: बिहार में सहकारी समितियों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने, किसानों तक उर्वरक की उपलब्धता बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग व डिजिटल सेवाओं का विस्तार करने पर जोर दिया जा रहा है। 29 अक्टूबर 2026 को भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के निदेशक (नीति) मुकेश कुमार ने बिहार में सहकारिता विभाग की योजनाओं की समीक्षा की। बैठक में पैक्सों के माध्यम से खाद वितरण बढ़ाने, सहकारी समितियों को बहुउद्देशीय संस्थाओं के रूप में विकसित करने और उनके क्षमतावर्धन पर विशेष जोर दिया गया।
बिहार में सहकारिता व्यवस्था को मजबूत करने और किसानों को स्थानीय स्तर पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सहकारिता विभाग की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की गई। भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के निदेशक (नीति) मुकेश कुमार ने 29 अक्टूबर 2026 को बिहार सरकार के सहकारिता विभाग द्वारा संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रगति का जायजा लिया। इस दौरान सहकारी समितियों के विस्तार, केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सहकारिता की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में बिहार के निबंधक, सहयोग समितियां रजनीश कुमार सिंह भी उपस्थित रहे। समीक्षा के दौरान पैक्सों को मजबूत बनाने, किसानों को सुविधाएं उपलब्ध कराने और सहकारी संस्थाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई।
पैक्सों के माध्यम से खाद वितरण बढ़ाने पर जोर
समीक्षा बैठक में निदेशक मुकेश कुमार ने निर्देश दिया कि प्राथमिक कृषि साख समितियों यानी पैक्स (PACS) के माध्यम से उर्वरक वितरण का दायरा बढ़ाया जाए। इसका उद्देश्य किसानों को उनके आसपास ही खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मजबूत करना है, ताकि उन्हें उर्वरक प्राप्त करने के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
पैक्स ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और सहकारी व्यवस्था के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करते हैं। इनके माध्यम से खाद वितरण बढ़ने से स्थानीय स्तर पर कृषि संबंधी सेवाओं की पहुंच बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि पैक्सों को केवल पारंपरिक गतिविधियों तक सीमित रखने के बजाय उनकी व्यावसायिक क्षमताओं का विस्तार किया जाए।
बिहार की 28,951 सहकारी समितियों से जुड़े हैं 1.61 करोड़ से अधिक सदस्य
समीक्षा के दौरान बिहार में सहकारिता व्यवस्था के व्यापक नेटवर्क से संबंधित आंकड़े भी सामने आए। बैठक में बताया गया कि राज्य में कुल 28,951 सहकारी समितियां निबंधित हैं और इनके सदस्यों की संख्या 1.61 करोड़ से अधिक है। यह नेटवर्क कृषि, ग्रामीण बैंकिंग और विभिन्न सामुदायिक सेवाओं के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
राज्य में बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए 23 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों और बिहार राज्य सहकारी बैंक की कुल 291 शाखाएं कार्यरत हैं। बैठक में इन संस्थानों के माध्यम से दी जा रही सेवाओं और सहकारी क्षेत्र में चल रही विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।
सहकारी समितियों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। इसके लिए प्रशिक्षण, तकनीकी सुविधाओं और संस्थागत क्षमतावर्धन को महत्वपूर्ण बताया गया, ताकि समितियां अपने सदस्यों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध करा सकें।
4,477 पैक्सों का कम्प्यूटरीकरण, 5,828 में चल रहे कॉमन सर्विस सेंटर
बिहार में सहकारी समितियों को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। समीक्षा बैठक में पैक्स कम्प्यूटरीकरण, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के विस्तार और सहकारी बैंकों के माध्यम से डिजिटल बैंकिंग सेवाओं की प्रगति पर चर्चा हुई।
बैठक में दी गई जानकारी के अनुसार, पहले चरण में 4,477 पैक्सों का कम्प्यूटरीकरण पूरा किया जा चुका है। वहीं, राज्य के 5,828 पैक्सों में कॉमन सर्विस सेंटर क्रियाशील हैं। इनके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को विभिन्न डिजिटल और नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इन सेवाओं में पैन कार्ड के लिए आवेदन, किसान निबंधन और बिजली बिल का भुगतान जैसी सुविधाएं शामिल हैं। डिजिटल सेवाओं के विस्तार से ग्रामीण नागरिकों को स्थानीय स्तर पर जरूरी काम पूरे करने में सहूलियत मिल सकती है। साथ ही, सहकारी संस्थाओं की कार्यप्रणाली को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने में भी मदद मिल सकती है।
बिहार में 7,516 गोदामों का निर्माण पूरा
कृषि उत्पादों के भंडारण की क्षमता बढ़ाने के लिए गोदाम निर्माण की प्रगति की भी समीक्षा की गई। बैठक में विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना और राज्य सरकार की योजना के तहत गोदामों के निर्माण से संबंधित जानकारी साझा की गई।
बताया गया कि राज्य योजना के अंतर्गत अब तक 7,516 गोदामों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। कृषि क्षेत्र में भंडारण सुविधाओं का विस्तार किसानों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इससे उपज को सुरक्षित रखने और कृषि उत्पादों के प्रबंधन में मदद मिल सकती है।
बैठक में इस विषय पर भी चर्चा हुई कि सहकारी समितियों की भूमिका का विस्तार करके ग्रामीण क्षेत्रों में भंडारण और कृषि से जुड़ी अन्य सुविधाओं को बेहतर बनाया जाए।
1,008 समितियां बैंक मित्र के रूप में कर रहीं काम
ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए सहकारी समितियों को बैंक मित्र के रूप में इस्तेमाल करने की व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। समीक्षा के दौरान बताया गया कि बिहार में 1,008 समितियां डीएमए/बैंक मित्र के रूप में काम कर रही हैं।
इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण नागरिकों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने में मदद करना है। स्थानीय स्तर पर ऐसी सुविधाओं की उपलब्धता से लोगों को बैंकिंग से जुड़े कामों के लिए दूर जाने की जरूरत कम हो सकती है। बैठक में सहकारी बैंकों के माध्यम से डिजिटल बैंकिंग सेवाओं के विस्तार और समितियों की भूमिका को और मजबूत करने पर भी विचार किया गया।
सब्जी उत्पादकों को बेहतर बाजार और भंडारण सुविधाएं देने की तैयारी
बैठक में सब्जी उत्पादक किसानों की आय और बाजार तक उनकी पहुंच बेहतर बनाने से संबंधित योजनाओं की भी समीक्षा की गई। इस दौरान वेजफेड के माध्यम से किसानों को बेहतर बाजार और भंडारण सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों पर चर्चा हुई।
इसके साथ ही पंचायत स्तर पर 350 सब्जी संग्रहण केंद्र स्थापित करने की योजना की समीक्षा की गई। ऐसे केंद्रों का उद्देश्य सब्जी उत्पादकों को अपनी उपज एकत्र करने और बाजार से जुड़ने के लिए बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराना है।
कृषि उत्पादों के संग्रहण और विपणन की सुविधाओं का विस्तार होने से किसानों को अपनी उपज के प्रबंधन में मदद मिल सकती है। हालांकि, इन सुविधाओं का वास्तविक लाभ उनके संचालन, बाजार से जुड़ाव और किसानों की पहुंच पर निर्भर करेगा।
पैक्सों को प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र और जन औषधि केंद्र बनाने पर चर्चा
सहकारी समितियों की गतिविधियों को व्यापक बनाने के लिए पैक्सों को प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र और प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र के रूप में विकसित करने से संबंधित योजनाओं की भी समीक्षा की गई।
इस पहल के तहत पैक्सों को बहुउद्देशीय संस्थाओं के रूप में विकसित करने पर जोर है, ताकि वे अपनी पारंपरिक गतिविधियों के साथ अन्य उपयोगी सेवाएं भी उपलब्ध करा सकें। बैठक में किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) की व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने से संबंधित विषयों पर भी चर्चा हुई।
सहकारी संस्थाओं के कारोबार और सेवाओं का विस्तार होने से उनकी आर्थिक क्षमता मजबूत करने में मदद मिल सकती है। इसके लिए संस्थाओं को उचित प्रशिक्षण, प्रबंधन संबंधी जानकारी और व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन की क्षमता विकसित करने की जरूरत पर बल दिया गया।
धान अधिप्राप्ति से लेकर सहकारी चीनी मिलों तक, कई मुद्दों पर हुई चर्चा
समीक्षा बैठक में कृषि और सहकारिता क्षेत्र से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण विषय भी शामिल रहे। इनमें धान अधिप्राप्ति की व्यवस्था, सहकारी समितियों के प्रशिक्षण, सहकारी चीनी मिलों की स्थापना और बिहार राज्य सहकारिता नीति, 2026 के क्रियान्वयन से संबंधित मुद्दे प्रमुख रहे।
धान अधिप्राप्ति किसानों से संबंधित महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। वहीं, सहकारी चीनी मिलों की स्थापना और सहकारिता नीति का प्रभावी क्रियान्वयन राज्य में सहकारी क्षेत्र की गतिविधियों को आगे बढ़ाने से जुड़े विषय हैं। बैठक में इन सभी पहलुओं पर चर्चा करते हुए योजनाओं की प्रगति और उनके क्रियान्वयन को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया गया।
सहकारी समितियों के प्रशिक्षण और क्षमतावर्धन पर विशेष ध्यान
निदेशक मुकेश कुमार ने सहकारी समितियों को प्रशिक्षण और क्षमतावर्धन के माध्यम से मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इसका उद्देश्य समितियों को अपने कार्यों का प्रभावी संचालन करने और सदस्यों को बेहतर सेवाएं देने में सक्षम बनाना है।
सहकारिता व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केवल योजनाओं का संचालन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समितियों के प्रबंधन, तकनीकी जानकारी और व्यावसायिक क्षमता को भी विकसित करना जरूरी है। बैठक में इसी दृष्टिकोण के तहत पैक्सों की उद्यमशीलता बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर जोर दिया गया।
बैठक में सहकारिता विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
इस समीक्षा बैठक में सहकारिता विभाग के अपर निबंधक विकास कुमार बरियार और रामनरेश पांडेय उपस्थित रहे। इसके अलावा संयुक्त निबंधक कामेश्वर ठाकुर, समरेश कुमार, निकेश कुमार तथा विभाग के अन्य पदाधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।
बैठक में विभागीय योजनाओं की प्रगति, सहकारी समितियों के विस्तार और केंद्र तथा राज्य सरकार की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने से संबंधित विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
कुल मिलाकर, बिहार में सहकारी समितियों को मजबूत बनाने के लिए खाद वितरण, डिजिटल सेवाओं, ग्रामीण बैंकिंग, गोदाम निर्माण, सब्जी संग्रहण, किसान उत्पादक संगठनों और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किसानों और ग्रामीण नागरिकों तक सुविधाओं की पहुंच बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
