यमुना एक्सप्रेसवे बस अग्निकांड: 22 KM तक स्कूटर से बस के पीछे चलता रहा मोहित, मंगेतर श्रुति से आखिरी कॉल के बाद बदल गई पूरी जिंदगी

नोएडा: यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार रात हुए दर्दनाक बस अग्निकांड ने कई परिवारों को हमेशा के लिए गहरे सदमे में छोड़ दिया। दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा जा रही एक स्लीपर बस में ग्रेटर नोएडा के दयानतपुर गांव के पास अचानक आग लग गई। हादसे में 9 यात्रियों की जलकर मौत हो गई। मृतकों में आईटी कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजर के पद पर कार्यरत श्रुति भी शामिल थीं।

श्रुति अपनी बहन का जन्मदिन मनाने के लिए जालौन के उरई जा रही थीं। उन्हें क्या पता था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा। श्रुति के मंगेतर मोहित शर्मा IIT दिल्ली में सुपरकंप्यूटर इंजीनियर हैं। दोनों ने इसी साल नवंबर में शादी करने का फैसला किया था, लेकिन यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए इस हादसे ने उनकी जिंदगी की पूरी तस्वीर बदल दी।

मंगेतर को बस में बैठाने के बाद 22 KM तक पीछे चलता रहा मोहित

मोहित शर्मा ने बताया कि उन्होंने बुधवार रात करीब 8:40 बजे श्रुति को दिल्ली के कश्मीरी गेट बस अड्डे से बस में बैठाया था। श्रुति को विदा करने के बाद भी उनका मन उसे अकेले जाने देने का नहीं हुआ। बस के रवाना होने के बाद मोहित ने फोन पर श्रुति से बात की और अपने स्कूटर से बस के पीछे चल पड़े।

मोहित के मुताबिक, वह करीब 22 किलोमीटर तक बस का पीछा करते रहे। इस दौरान दोनों फोन पर लगातार बात करते रहे। करीब 50 मिनट तक यह सफर उनके लिए सामान्य विदाई से कहीं ज्यादा लंबा हो गया। उन्हें शायद अंदाजा भी नहीं था कि यही बातचीत उनकी मंगेतर से होने वाली आखिरी बातचीत में बदल जाएगी।

श्रुति ने मोहित से वापस लौटने को कहा

मोहित ने भावुक होकर बताया कि जब किसी अपने को विदा करना होता है तो उससे दूर होना आसान नहीं होता। वह श्रुति के साथ आगे तक जाना चाहते थे, लेकिन श्रुति ने उन्हें वापस लौट जाने के लिए कहा।

इसके बाद मोहित ने अपना स्कूटर वापस मोड़ लिया और IIT दिल्ली के पास अपने घर की ओर निकल गए। रात करीब 10:19 बजे उन्होंने श्रुति को दोबारा फोन किया। दोनों के बीच सोने से पहले बात हुई। श्रुति ने कहा था कि वह उरई पहुंचने के बाद अगले दिन फोन करेंगी।

लेकिन वह फोन कभी नहीं आया।

सात महीने पहले हुई थी मुलाकात, नवंबर में होनी थी शादी

मोहित और श्रुति करीब सात महीने से एक-दूसरे के साथ थे। दोनों की मुलाकात एक दूर के रिश्तेदार के माध्यम से हुई थी। समय के साथ दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और उन्होंने इसी साल नवंबर में शादी करने का फैसला किया था।

दोनों अपने भविष्य को लेकर योजनाएं बना रहे थे। श्रुति अपनी बहन का जन्मदिन मनाने के लिए उरई जा रही थीं, जबकि मोहित अपने काम में व्यस्त थे। हादसे से कुछ घंटे पहले तक दोनों के बीच सामान्य बातचीत हो रही थी।

सुबह उरई बस स्टैंड पहुंची श्रुति की बहन

गुरुवार सुबह करीब 6:30 बजे श्रुति की बहन उरई बस स्टैंड पहुंचीं। वहां पहुंचने के बाद उन्हें बस ऑपरेटर से पता चला कि जिस बस से श्रुति सफर कर रही थीं, उसमें आग लग गई है।

यह जानकारी मिलते ही परिवार में हड़कंप मच गया। परिजनों ने श्रुति के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की। इसी दौरान मोहित को भी लगातार परिवार की ओर से फोन आने लगे।

श्रुति को खोजने के लिए अस्पतालों के चक्कर लगाता रहा मोहित

परिवार के फोन आने के बाद मोहित ने घटना की जानकारी जुटानी शुरू की। वह सबसे पहले जेवर के कैलाश हॉस्पिटल पहुंचे। वहां उन्हें उत्कर्ष नाम के एक गवाह का फोन नंबर मिला।

इसके बाद मोहित ने घटना से जुड़ी जानकारी जोड़ने की कोशिश की। वह लगातार अलग-अलग जगहों पर श्रुति की तलाश करते रहे। उन्हें उम्मीद थी कि शायद वह किसी अस्पताल में भर्ती हों और जिंदा हों।

हर गुजरते पल के साथ परिवार की बेचैनी बढ़ती जा रही थी। आखिरकार सेक्टर 94 स्थित पोस्टमॉर्टम हाउस तक पहुंचने के बाद स्थिति और भी भयावह हो गई।

पोस्टमॉर्टम हाउस में आखिरी उम्मीद भी टूट गई

गुरुवार सुबह सेक्टर 94 के पोस्टमॉर्टम हाउस में परिजन अपने-अपने लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान मोहित के सामने पिछली रात की पूरी कहानी बार-बार घूम रही थी।

कुछ घंटे पहले तक श्रुति से फोन पर बात कर रहे मोहित को अब उसी की पहचान करने के लिए पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचना पड़ा। जिस विदाई को दोनों ने कुछ समय बाद होने वाली अगली फोन कॉल तक का अलविदा समझा था, वह उनके साथ बिताए जीवन का आखिरी पल बन गई।

‘शायद मैं उसे बचा सकता था’, मोहित के मन में रह गया यह सवाल

मोहित ने बताया कि हादसे के बाद उनके मन में लगातार यही विचार आ रहा है कि काश वह श्रुति के साथ बस में चले गए होते। उन्होंने कहा कि वह भी श्रुति के साथ जाने का प्लान बना रहे थे, लेकिन श्रुति ने उन्हें अपने प्रोजेक्ट पर ध्यान देने के लिए कहा था।

मोहित IIT दिल्ली के ‘परम प्रज्ञा’ प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। यह प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया था। काम की वजह से वह श्रुति के साथ यात्रा पर नहीं जा सके।

मोहित के लिए सबसे मुश्किल बात यह है कि हादसे से कुछ समय पहले तक वह अपनी मंगेतर के साथ फोन पर बात कर रहे थे और स्कूटर से उसकी बस के पीछे चल रहे थे। उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर बाद वही सफर एक ऐसी त्रासदी में बदल जाएगा, जिसकी यादें जिंदगीभर उनके साथ रहेंगी।

उन्होंने कहा कि साथ बिताए समय और पुरानी यादें बार-बार उनके जेहन में आ रही हैं। उन्हें इस बात का गहरा दुख है कि शायद अगर वह भी उस बस में होते तो कुछ अलग कर पाते।

यमुना एक्सप्रेसवे बस अग्निकांड ने श्रुति के परिवार के साथ-साथ मोहित की जिंदगी में भी ऐसा खालीपन छोड़ दिया है, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा। नवंबर में होने वाली शादी की तैयारियों और भविष्य के सपनों की जगह अब परिवार के सामने एक दर्दनाक हादसे की यादें हैं।

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