मध्य प्रदेश के बाजना क्षेत्र के नवागांव में घर के अंदर घुसा मगरमच्छ, ग्रामीणों ने खुद किया रेस्क्यू; सुबह वन विभाग की टीम पहुंची तो अपने साथ ले गई
रतलाम, मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने पूरे गांव में दहशत फैला दी। बाजना जनपद के ग्राम कुंदनपुर के समीप स्थित नवागांव में बुधवार रात करीब 10 बजे एक महिला अपने घर में सो रही थी। अचानक उसकी आंख खुली तो सामने एक मगरमच्छ दिखाई दिया। मगरमच्छ मुंह खोले उसकी ओर बढ़ रहा था। सामने मौत जैसा खतरा देखकर महिला घबरा गई और बिना समय गंवाए अपने सात वर्षीय बेटे को साथ लेकर घर की छोटी खिड़की से बाहर निकल गई।
महिला की सूझबूझ से मां और बेटे की जान बच गई। बताया जा रहा है कि उस समय मगरमच्छ घर के दरवाजे से करीब तीन फीट की दूरी पर था। घटना के बाद महिला ने शोर मचाकर पड़ोसियों को जगाया। आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और मगरमच्छ को काबू में करने की कोशिश शुरू की। काफी मशक्कत के बाद ग्रामीणों ने रस्सियों की मदद से मगरमच्छ को बांध लिया। हालांकि, रात में पुलिस और वन विभाग की टीम के मौके पर नहीं पहुंचने के कारण ग्रामीणों को काफी देर तक खुद ही स्थिति संभालनी पड़ी।
सोते समय खुली आंख तो सामने था मगरमच्छ, बेटे को लेकर खिड़की से निकली महिला
यह घटना नवागांव की है, जहां सीताबाई, पति स्वर्गीय केसु डोडियार, अपने सात वर्षीय छोटे बेटे के साथ घर में सो रही थीं। रात करीब 10 बजे अचानक उनकी आंख खुली तो सामने मगरमच्छ नजर आया। मगरमच्छ मुंह खोलते हुए उनकी दिशा में बढ़ रहा था। इस अप्रत्याशित घटना से सीताबाई घबरा गईं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
उन्होंने अपने छोटे बेटे को संभाला और घर के मुख्य दरवाजे से बाहर निकलने के बजाय छोटी खिड़की का सहारा लिया। दोनों खिड़की से बाहर निकलने में सफल रहे। इसके बाद सीताबाई ने आसपास के लोगों को आवाज देकर मदद मांगी। ग्रामीणों के पहुंचने तक मगरमच्छ घर के अंदर ही मौजूद था।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घर का दरवाजा खुला हुआ था। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि मगरमच्छ खुले दरवाजे से घर में दाखिल हुआ होगा। हालांकि, वह घर तक कैसे पहुंचा और किस रास्ते से आया, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मजदूरी कर परिवार चलाती हैं सीताबाई, पति की सात साल पहले हो चुकी है मौत
इस घटना से जुड़ी एक अहम बात यह भी है कि सीताबाई मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करती हैं। उनके पति केसु डोडियार की करीब सात वर्ष पहले मौत हो चुकी है। उनके दो बेटे हैं। छोटा बेटा सात वर्ष का है, जबकि बड़ा बेटा 12 वर्ष का है।
घटना के समय बड़ा बेटा दोस्तों के साथ नदी की ओर गया हुआ था। घर में सीताबाई अपने छोटे बेटे के साथ सो रही थीं। इसी दौरान मगरमच्छ के घर में घुस आने की घटना हुई। यदि महिला की नजर समय रहते मगरमच्छ पर नहीं पड़ती, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी।
मगरमच्छ को देखकर घबराने के बावजूद सीताबाई ने पहले अपने बेटे को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश की। इसके बाद उन्होंने पड़ोसियों को बुलाया। मां की इस सूझबूझ से दोनों सुरक्षित बाहर निकल आए।
ग्रामीणों ने रस्सियों से बांधा मगरमच्छ, पुलिस और वन विभाग के नहीं पहुंचने का आरोप
मगरमच्छ को घर में देखकर ग्रामीणों ने एकजुट होकर उसे पकड़ने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद उसे रस्सियों से बांधकर काबू में किया गया। ग्रामीणों के अनुसार, उन्होंने रात करीब 10 बजे पुलिस को थाने के नंबर पर सूचना दी थी, लेकिन पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। इसके अलावा, रात के दौरान वन विभाग का कोई कर्मचारी भी मौके पर नहीं पहुंचा।
ऐसे में ग्रामीणों ने खुद ही मगरमच्छ को संभालने की जिम्मेदारी उठाई। उन्होंने मगरमच्छ को पिकअप वाहन में रखा और उसे बाजना ले जाने लगे। लेकिन वहां पहुंचने पर कोई जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी नहीं मिला। इसके बाद ग्रामीण वापस लौट आए।
ग्रामीणों ने मगरमच्छ को नदी में छोड़ने का प्रयास किया। लेकिन नदी के पास पहुंचने पर मगरमच्छ अधिक ताकतवर नजर आया, जिससे उसे छोड़ने को लेकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई। इसके बाद वे मगरमच्छ को वापस लेकर आए और निर्माणाधीन महादेव मंदिर के पास रस्सियों से बांध दिया।
रातभर युवकों ने की निगरानी, सुबह वन विभाग की टीम ने संभाला मोर्चा
मगरमच्छ को पकड़ने के बाद ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसे सुरक्षित तरीके से संभालकर रखने की थी। उसे निर्माणाधीन महादेव मंदिर के पास बांध दिया गया। दो से तीन युवकों ने रातभर वहां रुककर मगरमच्छ की निगरानी की, ताकि वह भाग न सके और किसी अन्य व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने की स्थिति न बने।
सुबह वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मगरमच्छ को अपने कब्जे में लिया। इसके बाद उसे वन परिक्षेत्र कार्यालय बाजना ले जाया गया। इस तरह ग्रामीणों की पूरी रात चली मशक्कत के बाद वन विभाग ने मगरमच्छ को अपने नियंत्रण में लिया।
घटना के बाद ग्रामीणों के बीच इस बात को लेकर भी चर्चा रही कि यदि रात में ही संबंधित विभागों की टीम मौके पर पहुंच जाती, तो मगरमच्छ को संभालने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से पूरी की जा सकती थी। हालांकि, रात में पुलिस और वन विभाग के नहीं पहुंचने के संबंध में संबंधित विभागों का विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया है।
माही डेम से करीब 20 किलोमीटर दूर है नवागांव, तेलनी नदी से भी जुड़ा क्षेत्र
नवागांव में मगरमच्छ मिलने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि वह गांव के भीतर स्थित घर तक कैसे पहुंचा। जानकारी के अनुसार, नवागांव से माही डेम की दूरी करीब 20 किलोमीटर है। माही डेम में मीठे पानी के मगरमच्छ पाए जाते हैं। इसके अलावा, क्षेत्र की तेलनी नदी भी माही नदी तंत्र से जुड़ी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि सूखे के कारण इलाके के जलस्रोतों में पानी कम होता जा रहा है। ऐसे में जंगली जीवों की आवाजाही आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ने की आशंका रहती है। हालांकि, इस घटना में मगरमच्छ के माही डेम या तेलनी नदी से होकर नवागांव पहुंचने की पुष्टि वन विभाग ने नहीं की है।
मगरमच्छ के घर में प्रवेश करने का वास्तविक कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं है। इसलिए उसके आने के रास्ते और संभावित स्रोत को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वन विभाग की जांच और आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी है।
क्षेत्र में तेंदुए की आवाजाही की भी चर्चा, पहले गांव की ओर आया था जंगली सूअर
ग्रामीणों ने क्षेत्र में तेंदुए की आवाजाही बढ़ने की बात भी कही है। उनके अनुसार, आसपास के इलाके में वन्यजीवों की मौजूदगी को लेकर पहले से चिंता बनी हुई है। कुछ समय पहले बाजना क्षेत्र में एक जंगली सूअर भी शाम के समय गांव की ओर आ गया था।
उस घटना के बाद वन विभाग ने क्षेत्र में सर्चिंग की थी, लेकिन कोई विशेष जानकारी नहीं मिल सकी थी। अब घर के अंदर मगरमच्छ मिलने की घटना ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है।
हालांकि, तेंदुए की गतिविधियों और मगरमच्छ के गांव तक पहुंचने के बीच कोई सीधा संबंध सामने नहीं आया है। ग्रामीणों की ओर से बताई गई घटनाओं की आधिकारिक पुष्टि और वन विभाग की प्रतिक्रिया मिलने के बाद ही क्षेत्र में वन्यजीवों की आवाजाही की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
करीब दो साल का है मगरमच्छ, लंबाई लगभग 170 सेंटीमीटर
सुबह वन विभाग के रेंजर अमित सोनी मगरमच्छ को वन परिक्षेत्र कार्यालय बाजना लेकर पहुंचे। वहां वेटरनरी डॉक्टर फिरोज खान ने मगरमच्छ का परीक्षण किया। परीक्षण के दौरान मगरमच्छ शांत बताया गया।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मगरमच्छ की उम्र करीब दो वर्ष और लंबाई लगभग 170 सेंटीमीटर यानी करीब 5 फीट 7 इंच बताई गई है। फिलहाल उसे वन परिक्षेत्र कार्यालय बाजना में पिंजरे के भीतर रखा गया है।
मगरमच्छ के रेस्क्यू और आगे की कार्रवाई के बारे में जानकारी लेने के लिए रेंजर अमित सोनी से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। डीएफओ से भी संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कॉल नहीं लग सका। वन विभाग की ओर से मामले में फिलहाल विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
अब मगरमच्छ को कहां छोड़ा जाएगा? वन विभाग की अगली कार्रवाई पर नजर
नवागांव में घर के भीतर मगरमच्छ मिलने की घटना के बाद अब सबसे बड़ा सवाल उसके सुरक्षित स्थानांतरण और आगे की कार्रवाई को लेकर है। फिलहाल मगरमच्छ को वन परिक्षेत्र कार्यालय बाजना में पिंजरे में रखा गया है। उसे कहां और किस प्रक्रिया के तहत छोड़ा जाएगा, इस संबंध में वन विभाग की ओर से विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में वन्यजीवों की आवाजाही, रात के समय सुरक्षा और आपात स्थिति में संबंधित विभागों की त्वरित प्रतिक्रिया जैसे मुद्दों को भी सामने ला दिया है। फिलहाल मां और बेटे के सुरक्षित बचने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है, लेकिन गांव में मगरमच्छ के पहुंचने की वजह और आगे की कार्रवाई को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।
नोट: मगरमच्छ या किसी अन्य जंगली जीव के सामने आने पर उसे खुद पकड़ने, रस्सी से बांधने या छेड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। लोगों को सुरक्षित दूरी बनाकर वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को सूचना देनी चाहिए।
