नौबतपुर मठ जमीन घोटाले में बड़ा एक्शन! धार्मिक न्यास बोर्ड ने मुख्य सचिव और DGP को लिखा पत्र, EOU करेगी जांच की निगरानी

नटवरलाल-5: मठ की जमीन की जमाबंदी में कथित फर्जीवाड़े और कब्जे का मामला गरमाया, जांच के दायरे में अधिकारियों से लेकर जमीन पर दावा करने वालों तक की भूमिका

पटना, 9 अक्टूबर 2026। बिहार की राजधानी पटना के नौबतपुर स्थित मौजा पैनापुर की मठ की जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और जमीन हड़पने के मामले में अब प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। धार्मिक न्यास बोर्ड ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बिहार के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP) और पटना के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है। इस मामले में मठ की जमीन की जमाबंदी में कथित हेराफेरी, जाली दस्तावेजों के आधार पर जमीन पर दावा करने और उसे अपने कब्जे में लेने की कोशिशों जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं।

‘तरुणमित्र’ में प्रकाशित खबर में मठ की जमीन से संबंधित जमाबंदी में कथित साजिश के तहत फर्जीवाड़े और भू-माफियाओं द्वारा जाली कागजात तैयार कर जमीन पर दावा पेश करने के मुद्दे को उठाया गया था। धार्मिक न्यास बोर्ड के पत्र में भी प्रकाशित खबर में उठाए गए इन मामलों का उल्लेख किया गया है। अब इस पूरे प्रकरण में प्रशासनिक और जांच एजेंसियों की भूमिका अहम मानी जा रही है।

पुलिस मुख्यालय के पत्र के बाद सक्रिय हुई आर्थिक अपराध इकाई

नौबतपुर मठ की जमीन से जुड़े मामले में पुलिस मुख्यालय की ओर से पत्र जारी होने के बाद आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के सक्रिय होने की बात सामने आई है। पुलिस मुख्यालय के डीजी कुंदन कृष्णन की ओर से जारी पत्र के बाद मामले की जांच को लेकर गतिविधियां तेज होने की जानकारी दी गई है।

बताया गया है कि पटना के जिलाधिकारी द्वारा गठित जांच कमेटी के कामकाज की निगरानी आर्थिक अपराध इकाई करेगी। EOU की ओर से मठ की जमीन की जांच कर रही कमेटी को जल्द ही आवश्यक निर्देश भेजे जाने और कमेटी की रिपोर्ट की समीक्षा किए जाने की बात कही गई है।

यदि जांच में जमीन के रिकॉर्ड में गड़बड़ी, दस्तावेजों में जालसाजी या किसी प्रकार की अनियमितता की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों की भूमिका के आधार पर आगे की कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। फिलहाल, आरोपों की पुष्टि जांच और संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही हो सकेगी।

मठ की जमीन की जमाबंदी में कथित हेराफेरी, कई अधिकारियों की भूमिका पर सवाल

मठ की जमीन से जुड़े इस विवाद में राजस्व अभिलेखों में कथित बदलाव को लेकर तत्कालीन अंचल अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। उपलब्ध आरोपों के अनुसार, तत्कालीन सीओ विजेंद्र कुमार ने जमाबंदी संख्या 35/1 में दो डिसमिल जमीन को कथित तौर पर गलत तरीके से बढ़ाकर 3.03 डिसमिल कर दिया था।

इसके बाद तत्कालीन सीओ मृत्युंजय कुमार पर जाली डीड के आधार पर जमाबंदी संख्या 17 खोलने का आरोप लगाया गया है। खबर में इसे कथित फर्जीवाड़े के एक बड़े नेटवर्क से जोड़कर देखा गया है। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता का निर्धारण राजस्व रिकॉर्ड, संबंधित दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट के आधार पर किया जाना बाकी है।

मामले में मठ के नाम पर पहले से दर्ज जमीन के रकबे में कथित कमी किए जाने का आरोप भी सामने आया है। आरोप के मुताबिक, मठ के नाम से दर्ज जमाबंदी संख्या 85 में पहले 15 एकड़ 48 डिसमिल जमीन दर्ज थी, जिसे घटाकर कथित रूप से 5 एकड़ 43 डिसमिल कर दिया गया। यदि रिकॉर्ड में इस तरह के बदलाव की पुष्टि होती है, तो यह जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू हो सकता है।

जमीन पर दावा करने वाले लोगों और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की होगी जांच?

नौबतपुर मठ की जमीन पर दावा करने वाले कई व्यक्तियों और संस्थाओं के नाम इस मामले में सामने आए हैं। प्रकाशित खबर में टूनटून गोप, प्रवीण कुमार उर्फ बऊआ जी, कुंदन कुमार, आनंदी पासवान, रोहित कुमार, अमित कुमार, आशुतोष कुमार, जीआरडीए इंफ्रा लिमिटेड के मालिक गौतम कुमार, अश्विनी कुमार, नीरज कुमार, अतुल कुमार, रवीन्द्र महतो, राम किशोर शर्मा और अक्षवट शर्मा का उल्लेख किया गया है।

इसके अलावा, तत्कालीन राजस्व कर्मचारी, निबंधन कार्यालय के तत्कालीन रजिस्ट्रार और रिकॉर्ड रूम के कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच किए जाने की संभावना जताई गई है। जांच का उद्देश्य यह स्पष्ट करना होगा कि मठ की जमीन से संबंधित दस्तावेज कैसे तैयार हुए, जमाबंदी में कथित बदलाव किन परिस्थितियों में किए गए और जमीन पर दावे पेश करने की प्रक्रिया में किन लोगों की क्या भूमिका रही।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि खबर में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को जांच में साबित हुआ तथ्य नहीं माना जा सकता। किसी भी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय करने के लिए संबंधित दस्तावेजों, सरकारी रिकॉर्ड और जांच एजेंसी के निष्कर्षों का सामने आना आवश्यक है।

भू-माफियाओं से कथित उपहार लेने और संपत्ति अर्जित करने के आरोप

मठ की जमीन की जमाबंदी से जुड़े कथित फर्जीवाड़े में आर्थिक लेन-देन और उपहारों के आरोप भी लगाए गए हैं। प्रकाशित खबर के अनुसार, जमीन की जमाबंदी कराने के लिए कथित तौर पर भू-माफियाओं की ओर से कुछ लोगों को उपहार और अन्य लाभ दिए गए। अश्विनी कुमार पर बिचौलिये की भूमिका निभाने और जमाबंदी खुलवाने के लिए संबंधित अधिकारियों की शर्तें पूरी कराने का आरोप लगाया गया है।

खबर में दावा किया गया है कि कथित तौर पर मिले लाभ के जरिए एक अधिकारी ने पटना के सगुना मोड़ स्थित एक कार शोरूम के पीछे लगभग डेढ़ कट्ठा जमीन पर पांच मंजिला आलीशान मकान बनवाया। वहीं, दूसरे अधिकारी के बारे में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने आरपीएस के पास स्थित एक अपार्टमेंट में तीन फ्लैट खरीदे। इनमें से एक फ्लैट अपने नाम पर, दूसरा अपने भाई के नाम पर और तीसरा अपने पिता के नाम पर खरीदे जाने का दावा किया गया है।

इसके अलावा, खबर में एक व्यक्ति द्वारा क्रेटा और दूसरे द्वारा इनोवा कार खरीदे जाने का भी उल्लेख है। इन संपत्तियों और कथित लाभ के बीच संबंध होने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। इसलिए संपत्ति के स्वामित्व, खरीद के स्रोत और कथित लेन-देन की जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा।

EOU की निगरानी में जांच से खुल सकते हैं जमीन के रिकॉर्ड से जुड़े कई सवाल

नौबतपुर मठ की जमीन का मामला अब केवल जमाबंदी में कथित गड़बड़ी तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें राजस्व अभिलेखों में बदलाव, कथित जाली दस्तावेज, जमीन पर दावे, संबंधित अधिकारियों की भूमिका और संपत्ति अर्जित करने के आरोप जैसे कई पहलू शामिल हैं।

धार्मिक न्यास बोर्ड की ओर से मुख्य सचिव, DGP और पटना के जिलाधिकारी को पत्र भेजे जाने तथा आर्थिक अपराध इकाई की निगरानी में जांच आगे बढ़ने की जानकारी के बाद इस मामले पर नजरें टिक गई हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच कमेटी की रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आते हैं, जमीन के मूल रिकॉर्ड और बाद में तैयार किए गए दस्तावेजों में क्या अंतर मिलता है और संबंधित लोगों की भूमिका के बारे में जांच एजेंसियां क्या निष्कर्ष निकालती हैं।

फिलहाल, मठ की जमीन पर कथित फर्जीवाड़े और कब्जे के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। संबंधित अधिकारियों या अन्य व्यक्तियों के खिलाफ किसी भी कार्रवाई का आधार आधिकारिक जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्य होंगे।

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