Rahul Gandhi Journalist Controversy: कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर एक गर्भवती महिला पत्रकार के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की करने का आरोप लगा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दावा किया है कि 12 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन की कवरेज के दौरान महिला पत्रकार को धक्का दिया गया, जिससे वह जमीन पर गिर गईं और उन्हें चोटें आईं। बीजेपी नेताओं के मुताबिक, महिला को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, संबंधित महिला पत्रकार ने भी राहुल गांधी पर उन्हें कंधे से पकड़कर खींचने और धक्का देने का आरोप लगाया है। हालांकि, घटना से जुड़े आरोपों और पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी जरूरी है।
राहुल गांधी पर महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी का आरोप
बीजेपी ने मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन की कवरेज कर रही एक गर्भवती महिला पत्रकार के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की की गई। बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान इस मामले को उठाया और दावा किया कि घटना के दौरान राहुल गांधी ने महिला पत्रकार को धक्का दिया, कोहनी का इस्तेमाल किया और उन्हें पकड़ने की कोशिश की।
प्रदीप भंडारी के मुताबिक, कथित घटना के बाद महिला पत्रकार जमीन पर गिर गईं और उन्हें गंभीर चोटें आईं। उन्होंने दावा किया कि महिला की हालत को देखते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। बीजेपी ने इस पूरे मामले को महिला पत्रकार की सुरक्षा, जनप्रतिनिधियों के व्यवहार और मीडिया की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं।
महिला पत्रकार ने बताई अपनी आपबीती, राहुल गांधी पर लगाए आरोप
इस मामले में महिला पत्रकार ने भी अपनी बात रखते हुए आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने उन्हें कंधे से पकड़ा और फिर जोर से खींचा, जिसके कारण वह जमीन पर गिर गईं। उनके मुताबिक, वह उस समय विरोध प्रदर्शन की कवरेज कर रही थीं और राहुल गांधी से कोई सवाल भी नहीं पूछ रही थीं।
महिला पत्रकार ने दावा किया कि उनके गिरने के बाद चार से पांच अन्य लोग भी उनके ऊपर गिर गए, जिससे उन्हें चोटें आईं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के समय वह केवल अपना पत्रकारिता संबंधी काम कर रही थीं, इसके बावजूद उनके साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की हुई।
महिला पत्रकार ने आगे आरोप लगाया कि घटना के बाद उनकी मदद के लिए कांग्रेस का कोई कार्यकर्ता आगे नहीं आया। उनके अनुसार, सहायता करने के बजाय उन पर ही आरोप लगाने की कोशिश की गई। हालांकि, इन आरोपों के संबंध में कांग्रेस पक्ष का विस्तृत जवाब और घटना का स्वतंत्र सत्यापन महत्वपूर्ण होगा।
प्रदीप भंडारी ने राहुल गांधी के व्यवहार पर उठाए सवाल
बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने राहुल गांधी के कथित व्यवहार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी सार्वजनिक मंचों पर पितृसत्ता को समाप्त करने और महिलाओं के अधिकारों की बात करते हैं, लेकिन इस घटना में उनका व्यवहार कथित तौर पर इसके विपरीत दिखाई दिया।
भंडारी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने महिला पत्रकार के साथ अनुचित व्यवहार किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने अपने ही मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को पीछे की ओर धकेला और अपने कार्यकर्ताओं के साथ भी धक्का-मुक्की की।
बीजेपी प्रवक्ता ने इन घटनाओं का हवाला देते हुए राहुल गांधी के आचरण पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा की जाती है कि वे पत्रकारों के सवालों का जवाब दें और महिलाओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार करें। हालांकि, बीजेपी की ओर से लगाए गए इन आरोपों को पार्टी के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
पत्रकार की बहन ने बीजेपी नेताओं से मांगी मदद
घटना के बाद पत्रकार की बहन ने भी मामले को लेकर जानकारी दी। बीजेपी के दिल्ली प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश भाटिया ने बताया कि उन्हें पत्रकार की बहन से कथित घटना की जानकारी मिली थी, जिसके बाद वह तुरंत अस्पताल पहुंचे।
राजेश भाटिया के मुताबिक, रात करीब 8 से 8:30 बजे के बीच राजेंद्र नगर स्थित कार्यालय के पास एक युवती उनके पास आई। युवती ने बताया कि उसकी बहन एक पत्रकार है और कथित तौर पर राहुल गांधी द्वारा धक्का दिए जाने के कारण उसे चोटें आई हैं। उसने यह भी बताया कि उसकी बहन गर्भवती है और उसे तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत है।
भाटिया ने कहा कि युवती की बात सुनने के बाद उन्होंने मामले को गंभीरता से लिया और मदद के लिए आगे आए। इसके बाद उन्होंने बीजेपी विधायक उमंग बजाज और स्थानीय नेता प्रतीक शर्मा से संपर्क किया, ताकि महिला पत्रकार को जरूरी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
अस्पताल में भर्ती महिला पत्रकार, अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे किए जाने का दावा
राजेश भाटिया ने बताया कि बीजेपी नेताओं के अस्पताल पहुंचने के समय महिला पत्रकार अपने पति के साथ वहां मौजूद थीं। उनके अनुसार, डॉक्टर से परामर्श लेने के बाद बताया गया कि महिला की गर्भावस्था से संबंधित कुछ दिक्कतें हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत है।
भाटिया के मुताबिक, इसके बाद महिला पत्रकार का अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे कराया गया। डॉक्टरों ने उन्हें आवश्यक इंजेक्शन और उपचार दिया। उन्होंने दावा किया कि महिला को बाद में अस्पताल के एक कमरे में शिफ्ट कर दिया गया, जहां उन्हें डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया।
उन्होंने आगे बताया कि सुबह वरिष्ठ डॉक्टरों द्वारा महिला की स्थिति की जांच किए जाने की बात कही गई थी, ताकि आगे के उपचार के संबंध में निर्णय लिया जा सके। महिला पत्रकार की मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति और गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं की गंभीरता के बारे में अस्पताल की ओर से स्वतंत्र रूप से पुष्टि किया जाना आवश्यक है।
बीजेपी विधायक उमंग बजाज ने भी की घटना की आलोचना
बीजेपी विधायक उमंग बजाज ने भी इस कथित घटना की निंदा की। उन्होंने कहा कि स्थानीय विधायक होने के नाते वह प्रदीप भंडारी, राजेश भाटिया और स्थानीय मंडल अध्यक्ष के साथ अस्पताल पहुंचे और महिला पत्रकार का हालचाल जाना।
बजाज के अनुसार, उन्होंने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि महिला को अस्पताल में भर्ती कराकर आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने राहुल गांधी के कथित व्यवहार की आलोचना करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों को पत्रकारों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए।
बीजेपी विधायक ने कहा कि पत्रकारों का काम सवाल पूछना और घटनाओं की रिपोर्टिंग करना है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों को उनके साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की करने या उन्हें जमीन पर गिराने के बजाय उनके सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने इस मामले को पत्रकारों के सम्मान और उनकी सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बताया।
महिला पत्रकार की सुरक्षा और राजनीतिक जवाबदेही पर चर्चा तेज
गर्भवती महिला पत्रकार के साथ कथित धक्का-मुक्की का यह मामला राजनीतिक विवाद का रूप लेता दिखाई दे रहा है। बीजेपी ने राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके व्यवहार पर सवाल उठाए हैं, जबकि महिला पत्रकार की ओर से भी घटना को लेकर आरोप लगाए गए हैं।
इस मामले में घटना का पूरा वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, संबंधित पक्षों का जवाब और चिकित्सा संबंधी आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी। फिलहाल, बीजेपी नेताओं और महिला पत्रकार की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में पत्रकारों की सुरक्षा, स्वतंत्र रूप से रिपोर्टिंग करने का अधिकार और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है, ताकि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पक्षों की बात सामने आ सके।
