तमिलनाडु की राजनीति में बुधवार का दिन बेहद अहम रहा, जब मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay की सरकार ने विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर लिया। फ्लोर टेस्ट के दौरान TVK सरकार को 144 विधायकों का समर्थन मिला, जबकि 22 विधायकों ने विरोध में वोट डाला। इस तरह विजय सरकार ने आसानी से बहुमत साबित कर दिया और सरकार पर बना सियासी संकट खत्म हो गया।
विश्वास प्रस्ताव के दौरान कुल 171 विधायक मौजूद रहे, जबकि 5 सदस्य अनुपस्थित रहे। इस नतीजे के बाद साफ हो गया कि विजय की सरकार फिलहाल मजबूत स्थिति में है और सहयोगी दलों का पूरा समर्थन उनके साथ बना हुआ है।
फ्लोर टेस्ट से पहले बढ़ा राजनीतिक ड्रामा
फ्लोर टेस्ट से पहले मुख्यमंत्री विजय ने कांग्रेस और सहयोगी दलों के नेताओं के साथ बैठक की थी। सभी सहयोगियों ने सरकार को समर्थन देने का भरोसा दिया। वहीं दूसरी ओर AIADMK प्रमुख Edappadi K. Palaniswami ने साफ कहा था कि उनकी पार्टी विजय सरकार के खिलाफ वोट करेगी।
विधानसभा में बहस के दौरान विपक्ष के नेता Udhayanidhi Stalin ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष विधायकों की खरीद-फरोख्त करने की कोशिश कर रहा है और राज्य की राजनीति को मजाक बना दिया गया है। इसके बाद DMK विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

DMK के वॉकआउट के बाद सरकार के लिए बहुमत हासिल करना और आसान हो गया। विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 117 था, लेकिन विपक्ष के बाहर जाने के बाद यह संख्या घटकर 88 रह गई और विजय सरकार आराम से फ्लोर टेस्ट जीत गई।
सदन में हंगामा और आरोप-प्रत्यारोप
फ्लोर टेस्ट के दौरान विधानसभा में कई बार हंगामे की स्थिति भी बनी। AIADMK विधायकों ने बागी विधायक एसपी वेलुमणि को बोलने की अनुमति देने पर विरोध जताया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि TVK विपक्षी दलों में टूट कराने की कोशिश कर रही है।
वहीं PMK विधायक सौम्या अंबुमणि ने कहा कि फ्लोर टेस्ट की बहस शासन और जनता के मुद्दों से ज्यादा बीजेपी विरोधी चर्चा में बदल गई है। उन्होंने राज्य में अवैध शराब की बिक्री पर भी चिंता जताई।
हालांकि इन सभी विवादों और राजनीतिक हमलों के बीच मुख्यमंत्री विजय ने सदन में विश्वास प्रस्ताव पेश करते हुए सहयोगी दलों का आभार जताया और कहा कि उनकी सरकार जनता के लिए काम करती रहेगी।
फ्लोर टेस्ट जीतने के बाद अब तमिलनाडु में विजय सरकार की स्थिति पहले से ज्यादा मजबूत मानी जा रही है।
