Kishanganj News: दुबई, सऊदी अरब और मलेशिया में नौकरी दिलाने के नाम पर वसूली का आरोप, डंकी रूट से विदेश भेजने और बंधुआ मजदूरी जैसी परिस्थितियों में रखने की शिकायत
किशनगंज। विदेश में नौकरी पाने का सपना देखने वाले सीमांचल के बेरोजगार युवाओं के साथ कथित धोखाधड़ी के मामले में किशनगंज पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने विशेष अभियान चलाकर बिहार एसटीएफ की मदद से दो प्राथमिकी अभियुक्तों हाजी नाहिद गनी और मो. तवरेज को 16 अक्टूबर 2026 को पटना से गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी पूर्णिया जिले के निवासी बताए गए हैं। पुलिस के अनुसार, किशनगंज और पूर्णिया जिलों में विदेश भेजने के नाम पर धोखाधड़ी से जुड़े आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं। आरोप है कि युवाओं को दुबई, सऊदी अरब, थाईलैंड और मलेशिया में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर उनसे मोटी रकम वसूली गई। कुछ पीड़ितों ने अवैध रास्तों से विदेश भेजे जाने, तय काम के बजाय दूसरा काम कराने और बंधुआ मजदूरी जैसी परिस्थितियों में रखे जाने की शिकायत भी की है।

विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर कैसे की गई कथित ठगी?
पुलिस के मुताबिक, हाजी नाहिद गनी प्राइवेट लिमिटेड और तैयबा इंटरनेशनल टूर एंड ट्रैवल्स के माध्यम से युवाओं को विदेश में रोजगार दिलाने का भरोसा दिया जाता था। आरोप है कि दुबई, सऊदी अरब, थाईलैंड और मलेशिया में नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से बड़ी रकम ली गई। विदेश में बेहतर नौकरी और अच्छी कमाई की उम्मीद में युवाओं ने पैसे दिए, लेकिन कुछ मामलों में उन्हें कथित तौर पर गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ा।
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि कुछ युवाओं को डंकी रूट के जरिए अवैध रूप से मलेशिया भेजा गया। वहां पहुंचने के बाद उन्हें वीजा के अनुसार काम नहीं दिया गया और कथित तौर पर जबरन दूसरे काम में लगाया गया। पीड़ितों की शिकायत के अनुसार, कुछ युवाओं को ऐसी परिस्थितियों में रखा गया, जिन्हें बंधुआ मजदूरी जैसा बताया गया है। इन आरोपों की जांच पुलिस कर रही है।

1.80 लाख रुपये लेकर युवक को विदेश भेजने का आरोप
इस मामले में विशनपुर थाना कांड संख्या 47/26 का भी उल्लेख सामने आया है। शिकायतकर्ता मो. सुलेमान ने आरोप लगाया कि उनके पुत्र नूरजफर को विदेश भेजने के नाम पर 1 लाख 80 हजार रुपये लिए गए थे। प्राथमिकी के अनुसार, नूरजफर को 9 सितंबर 2026 को पटना से दिल्ली और फिर थाईलैंड के क्राबी भेजा गया।
शिकायत में आगे आरोप लगाया गया है कि 18 सितंबर 2026 को नूरजफर को कथित तौर पर अवैध रास्ते से मलेशिया में प्रवेश कराया गया। विदेश में नौकरी पाने की उम्मीद लेकर गए युवक के लिए इसके बाद की परिस्थितियां कथित तौर पर बेहद मुश्किल हो गईं।
मलेशिया में कमरे में बंद रखने और काम कराने की शिकायत
वादी मो. सुलेमान के मुताबिक, मलेशिया पहुंचने के बाद एक कथित पाकिस्तानी एजेंट ने नूरजफर समेत कई युवकों को एक कमरे में बंद रखा। इसके बाद उन्हें जोहोर क्षेत्र में काम पर लगाए जाने का आरोप है।
शिकायत के अनुसार, वहां इमिग्रेशन पुलिस ने छापेमारी की, जिसके दौरान कई युवकों को गिरफ्तार किया गया। नूरजफर किसी तरह जंगल में छिपकर बच निकला। बाद में एक अन्य स्थानीय एजेंट की मदद से वह भारत लौट आया। इस घटनाक्रम ने विदेश में रोजगार के नाम पर युवाओं को कथित तौर पर फंसाने और उन्हें अवैध रास्तों से दूसरे देशों में भेजने के आरोपों को गंभीर बना दिया है।
हालांकि, इन घटनाओं और कथित पाकिस्तानी एजेंट की भूमिका से संबंधित सभी तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है। मामले में पुलिस की जांच और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
किशनगंज और पूर्णिया में पहले से दर्ज हैं कई मामले
पुलिस द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, हाजी नाहिद गनी के खिलाफ किशनगंज जिले के कोचाधामन, बहादुरगंज और विशनपुर थानों के अलावा पूर्णिया जिले के रौटा थाने में भी मामले दर्ज हैं। इन मामलों में विदेश भेजने के नाम पर धोखाधड़ी, जालसाजी, अवैध उत्प्रवासन और अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है।
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि कथित नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, कितने युवाओं से पैसे लिए गए और विदेश भेजने की पूरी प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही। जांच का दायरा बढ़ने के साथ अन्य पीड़ितों से जुड़ी जानकारियां भी सामने आने की संभावना है।
एसपी के निर्देश पर गठित हुई विशेष टीम, STF की मदद से पटना में छापेमारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए किशनगंज के पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार के निर्देश पर विशेष टीम का गठन किया गया था। इस टीम का नेतृत्व अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-1 खुशरू सिराज कर रहे थे।
पुलिस के मुताबिक, टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और मानवीय सूचना के आधार पर आरोपियों की तलाश की। इसके बाद बिहार एसटीएफ के सहयोग से पटना में छापेमारी की गई और 16 अक्टूबर 2026 को दोनों प्राथमिकी अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जांचकर्ताओं का उद्देश्य कथित ठगी के तरीके, नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और विदेश भेजने से जुड़े लेन-देन की जानकारी जुटाना है।
आरोपियों की संपत्ति की भी होगी जांच
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार हाजी नाहिद गनी और मो. तवरेज से पूछताछ जारी है। उनके कथित नेटवर्क, अन्य गतिविधियों और अपराध से अर्जित संपत्ति की जांच की जा रही है। यदि जांच में ऐसी संपत्ति का पता चलता है, तो उसे जब्त करने के लिए कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया भी की जा रही है। फिलहाल पुलिस अन्य पीड़ितों की पहचान करने और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच में जुटी है।
बेरोजगार युवाओं के लिए जरूरी है सतर्कता
विदेश में नौकरी पाने की चाह रखने वाले युवाओं के लिए यह मामला सावधानी बरतने की जरूरत को सामने लाता है। विदेश में रोजगार दिलाने का दावा करने वाली एजेंसियों के दस्तावेज, नौकरी का प्रस्ताव, वीजा और भर्ती से संबंधित अनुमति की जांच करना जरूरी है। किसी भी एजेंट को बड़ी रकम देने से पहले उसकी वैधता और संबंधित भर्ती प्रक्रिया की पुष्टि करना जोखिम कम कर सकता है।
फिलहाल मामले में पुलिस की जांच जारी है। हाजी नाहिद गनी और मो. तवरेज के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगी। पुलिस कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों और संभावित पीड़ितों के संबंध में जानकारी जुटा रही है।
