मेरठ मिक्की हत्याकांड: पत्नी रविता और प्रेमी अमरदीप को फांसी की सजा, बच्चों और बूढ़े माता-पिता की दुहाई भी नहीं आई काम

Amit Kashyap Murder Case: पति की हत्या को सर्पदंश दिखाने की रची गई थी साजिश, मनुस्मृति और महाभारत का जिक्र कर कोर्ट ने सुनाया फैसला

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में बहुचर्चित अमित कश्यप उर्फ मिक्की हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। बहसूमा थाना क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव में हुए इस हत्याकांड में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयवीर सिंह नागर की अदालत ने मृतक की पत्नी रविता (25) और उसके प्रेमी अमरदीप (22) को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों दोषियों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इसके अलावा साक्ष्य मिटाने और अपराधी को संरक्षण देने से संबंधित अपराधों में दोनों को सात-सात साल के कठोर कारावास और 20-20 हजार रुपये के अतिरिक्त जुर्माने की सजा दी गई है।

यह मामला 13 अप्रैल 2025 का है, जब अमित कश्यप का शव उनके घर में बिस्तर पर मिला था। शुरुआत में घटना को सांप के काटने से हुई मौत दिखाने की कोशिश की गई, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की जांच ने पूरे मामले की दिशा बदल दी। अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर यानी दुर्लभतम श्रेणी का मामला माना।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई पेशी, सजा सुनते ही बेसुध हुए दोषी

सात अक्टूबर को अदालत ने रविता और अमरदीप को दोषी करार दिया था। इसके बाद शुक्रवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई हुई। दोनों दोषियों को जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत के सामने पेश किया गया। सजा सुनाने से पहले न्यायाधीश ने दोनों से पूछा कि वे अपने बचाव में क्या कहना चाहते हैं।

रविता ने अपने तीन छोटे बच्चों का हवाला देते हुए उनके भविष्य और देखभाल की गुहार लगाई। वहीं, अमरदीप ने अपने बूढ़े माता-पिता का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी सेवा करने वाला कोई दूसरा नहीं है। दोनों ने अदालत से अपने परिवारों का ध्यान रखने की अपील की। हालांकि, अदालत ने अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए दोनों को मृत्युदंड सुनाया।

जेल प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक, सजा सुनाए जाने के बाद दोनों की तबीयत बिगड़ गई और वे गश खाकर गिर पड़े। रविता को बुखार आने की भी जानकारी सामने आई। इस मामले में अदालत का फैसला सुनवाई के दौरान दिए गए बचाव पक्ष के तर्कों के बाद आया।

बिस्तर पर मिला था अमित का शव, सर्पदंश दिखाने की हुई थी कोशिश

अमित कश्यप उर्फ मिक्की की उम्र 31 वर्ष थी। वह टाइल्स लगाने का काम करते थे। अमरदीप भी उसी गांव का रहने वाला था और पेशे से मिस्त्री था। इसी वजह से उसका अमित के घर आना-जाना था। जांच के दौरान सामने आया कि इसी दौरान रविता और अमरदीप के बीच नजदीकियां बढ़ीं।

13 अप्रैल 2025 की सुबह अमित का शव घर में बिस्तर पर मिला। घटना को सांप के काटने से हुई मौत का रूप देने के लिए शव के नीचे एक जीवित घोड़ा पछाड़ सांप यानी रैट स्नेक रखा गया था। अमित के शरीर पर सांप के काटने जैसे 10 निशान भी बताए गए।

इसके बाद मृतक का भाई मोनू शव को जिला अस्पताल लेकर पहुंचा। वहां डॉक्टरों ने मौत को सामान्य सर्पदंश का मामला मानने के बजाय पोस्टमार्टम कराने की सलाह दी। जब मोनू ने इस बारे में रविता को बताया, तो वह पोस्टमार्टम नहीं कराने पर अड़ गई। हालांकि, मोनू ने पोस्टमार्टम करा दिया, जिसके बाद मामले में अहम खुलासा हुआ।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोला मौत का राज

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि अमित की मौत सांप के काटने से नहीं, बल्कि गला, नाक और मुंह दबाने के कारण दम घुटने से हुई थी। रिपोर्ट में गर्दन की हायोइड बोन और थायरॉइड कार्टिलेज टूटने की बात भी सामने आई।

इस खुलासे के बाद मामले ने गंभीर आपराधिक जांच का रूप ले लिया। मृतक के भाई मोनू ने 16 अप्रैल 2025 को रविता और अमरदीप के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस ने जांच के दौरान रविता की कॉल डिटेल खंगाली। पुलिस जांच के अनुसार, हत्या की रात से लेकर गिरफ्तारी तक रविता और अमरदीप के बीच 51 बार फोन पर बातचीत हुई थी। इन तथ्यों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।

एक हजार रुपये में खरीदा गया था सांप, जागरण का बनाया था बहाना

विशेष लोक अभियोजक फरजाना मकसूद के अनुसार, पुलिस की जांच में सामने आया कि रविता और अमरदीप के बीच संबंध थे और अमित उनके रिश्ते में बाधा बन रहे थे। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, इसी वजह से दोनों ने अमित की हत्या की साजिश रची।

आरोपों के अनुसार, साजिश को अंजाम देने के लिए अमरदीप ने कृष्ण नाम के सपेरे से एक हजार रुपये में सांप खरीदा था। बताया गया कि उसने माता के जागरण का बहाना बनाया था और कृष्ण यह सांप अपने नाना प्रीतमनाथ से लेकर आया था।

अभियोजन के मुताबिक, अमित का गला घोंटने के बाद बिस्तर पर सांप रख दिया गया, ताकि मौत को सर्पदंश का मामला दिखाया जा सके। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच में सामने आए तथ्यों ने इस कथित साजिश का खुलासा करने में अहम भूमिका निभाई।

मनुस्मृति, आत्रेय संहिता और महाभारत का जिक्र कर न्यायाधीश ने की टिप्पणी

फैसला सुनाते समय न्यायाधीश जयवीर सिंह नागर ने विवाह, विश्वास और पारिवारिक जिम्मेदारियों का उल्लेख किया। अदालत की टिप्पणी के अनुसार, हिंदू धर्मशास्त्रों में पत्नी को अर्धांगिनी और धर्मपत्नी का दर्जा दिया गया है। न्यायाधीश ने माता सावित्री के आदर्श का भी जिक्र किया, जिन्हें अपने पति के प्राण यमराज से वापस प्राप्त करने के लिए जाना जाता है।

न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि जिस पत्नी पर पति ने अपनी जिंदगी और विश्वास की डोर सौंपी थी, उसी ने प्रेमी के मोह में आकर सोते हुए पति की सांसें छीन लीं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि घर की रक्षा करने वाला ही भक्षक बन जाए, तो विवाह जैसे सामाजिक संस्कारों में लोगों का विश्वास प्रभावित हो सकता है।

अदालत ने अपने फैसले में धर्म, नीति और न्याय व्यवस्था से जुड़े विचारों को रेखांकित करते हुए मनुस्मृति, आत्रेय संहिता और महाभारत के श्लोकों का उल्लेख किया। न्यायाधीश ने अपराध की गंभीरता और समाज पर उसके प्रभाव को ध्यान में रखते हुए कठोर दंड की आवश्यकता पर जोर दिया।

बेटे को खोने वाली मां ने कहा- आज मुझे इंसाफ मिला

अदालत के फैसले के बाद अमित की मां मुनेश देवी भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि उन्हें आज इंसाफ मिला है। जिस बेटे को उन्होंने बड़े अरमानों और प्यार से पाल-पोसकर बड़ा किया था, उसकी बेरहमी से हत्या करने वालों को अदालत ने सजा दी है।

मुनेश देवी ने कहा कि इस फैसले से उनके दिवंगत बेटे की आत्मा को भी संतुष्टि मिली होगी। उन्होंने अपनी इच्छा जाहिर करते हुए कहा कि वह दोनों दोषियों को फांसी के फंदे पर लटकते देखना चाहती हैं।

परिवार के लिए यह मामला केवल एक आपराधिक मुकदमा नहीं, बल्कि बेटे की मौत के पीछे की सच्चाई सामने लाने और न्याय पाने की लंबी लड़ाई भी रहा।

रविता के भाई ने भी फैसले को बताया सही

रविता मुजफ्फरनगर जिले के बघरा विकासखंड के गांव सैदपुरा की रहने वाली है। अदालत के फैसले के बाद उसके भाई गुलाब ने कहा कि उनकी बहन ने गलत किया था और अदालत ने उसे उसी के अनुसार सजा दी है। उन्होंने कहा, जैसी करनी, वैसी भरनी।

ई-रिक्शा चलाने वाले गुलाब के मुताबिक, रविता उनके परिवार की इकलौती बहन है, लेकिन परिवार ने उससे नाता तोड़ लिया है। उन्होंने बताया कि परिवार न तो मामले की पैरवी करने गया और न ही आगे पैरवी करने का इरादा रखता है। उन्होंने अदालत के फैसले को सही बताया।

क्या है मेरठ का मिक्की हत्याकांड?

मेरठ का अमित कश्यप उर्फ मिक्की हत्याकांड इसलिए चर्चा में आया क्योंकि शुरुआती तौर पर मौत को सांप के काटने से जोड़कर पेश करने की कोशिश की गई थी। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट, कॉल डिटेल और पुलिस की जांच से सामने आए तथ्यों ने मामले की दिशा बदल दी। अदालत ने रविता और अमरदीप को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड सुनाया।

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