सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद ढहाए जाने के बाद अब एक नया मामला सामने आया है। शनिवार को बुलडोजर कार्रवाई के बाद जब मस्जिद के मलबे को पूरी तरह हटाया गया तो उसके नीचे एक कुएं जैसी संरचना दिखाई दी। इसका वीडियो भी सामने आया है, जिसके बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
मस्जिद को प्रशासन ने अदालत के आदेश के अनुपालन में हटाए जाने की बात कही है। वहीं, करीब 70 साल पुरानी बताई जा रही इस मस्जिद को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM समेत विपक्षी दलों ने बुलडोजर कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
मलबा हटने के बाद दिखाई दिया कुआं
मस्जिद का मलबा हटाए जाने के बाद स्ट्रक्चर के नीचे कुएं जैसी संरचना दिखाई दी। सामने आए वीडियो में ईंटों से बनी गोलाकार संरचना नजर आ रही है। प्रशासन के अधिकारियों ने भी शुरुआती तौर पर इसे कुआं बताया है, हालांकि इसकी वास्तविक स्थिति, आकार और निर्माण से जुड़ी जानकारी तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होने की बात कही गई है।
SDM सदर सुबोध कुमार ने कहा कि मस्जिद को हटाने की कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की गई। इसी प्रक्रिया के दौरान यहां एक कुआं मिला है। उन्होंने बताया कि संबंधित एजेंसियां इसकी जांच करेंगी और जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि कुआं कितना बड़ा है और इसकी वास्तविक स्थिति क्या है।
ईंटों से बना है कुएं का स्ट्रक्चर
SDM सुबोध कुमार के मुताबिक, मौके पर दिखाई दे रही संरचना ईंटों से बनी हुई है। कुएं की बाहरी बनावट भी ईंटों से निर्मित नजर आ रही है।
उन्होंने कहा कि पहली नजर में यह कुआं ही प्रतीत हो रहा है, लेकिन इसकी पूरी जानकारी तकनीकी टीमों की जांच के बाद सामने आएगी। प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया है कि जांच के बाद ही इस संरचना को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा।
7 सितंबर को सहारनपुर पहुंचेगा सपा प्रतिनिधिमंडल
इधर, मस्जिद गिराए जाने को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी ने इस मामले को लेकर सहारनपुर जाने का फैसला किया है। पार्टी का प्रतिनिधिमंडल 7 सितंबर को सहारनपुर पहुंचेगा और कलेक्ट्रेट परिसर का दौरा करेगा।
जानकारी के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल में शामिल नेता सबसे पहले पूर्व सांसद हाजी फजलुर्रहमान के आवास पर एकत्र होंगे। इसके बाद सभी नेता वहां से सहारनपुर कलेक्ट्रेट जाएंगे और उस स्थान का जायजा लेंगे जहां मस्जिद को गिराया गया है।
सपा प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल?
सहारनपुर जाने वाले समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल में विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव, जिलाध्यक्ष चौधरी अब्दुल वाहिद, महानगर अध्यक्ष हाजी नवाब अंसारी, सांसद हरेंद्र मलिक और कैराना सांसद इकरा हसन के नाम शामिल हैं।
इसके अलावा राष्ट्रीय महासचिव चौधरी रूद्रसेन, पूर्व सांसद हाजी फजलुर्रहमान, सरधना विधायक अतुल प्रधान, विधायक आशु मलिक, विधायक उमर अली, विधायक रामऔतार सैनी और MLC किरन पाल कश्यप भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल बताए गए हैं।
पूर्व विधायक माविया अली, सपा SC मोर्चा के अध्यक्ष राहुल भारती, पूर्व राज्यमंत्री मांगेराम कश्यप और मुजफ्फरनगर के जिलाध्यक्ष जिया चौधरी के भी इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने की जानकारी दी गई है।
ओवैसी ने भी योगी सरकार पर साधा निशाना
सहारनपुर मस्जिद मामले को लेकर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साध चुके हैं। ओवैसी ने दावा किया है कि यह मस्जिद कलेक्ट्रेट कार्यालय के निर्माण से पहले से मौजूद थी। उन्होंने मस्जिद गिराए जाने की कार्रवाई को लेकर योगी सरकार पर सवाल उठाए हैं।
ओवैसी के इन दावों के बीच अब सहारनपुर में मस्जिद के मलबे से कुएं जैसी संरचना मिलने का मामला भी चर्चा में आ गया है। हालांकि इस संरचना की उम्र, निर्माण का उद्देश्य और इससे जुड़ी अन्य जानकारी अभी तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी मस्जिद गिराए जाने की कार्रवाई को लेकर प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि प्रशासन ने जल्दबाजी में कार्रवाई की। उन्होंने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की बात कही है।
इस तरह सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने का मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी बड़ा मुद्दा बन चुका है। एक तरफ प्रशासन अदालत के आदेश का पालन करने की बात कह रहा है, वहीं विपक्षी दल कार्रवाई की प्रक्रिया और मस्जिद से जुड़े पुराने रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
अब तकनीकी जांच पर टिकी नजर
मस्जिद का मलबा हटने के बाद सामने आई कुएं जैसी संरचना ने मामले में एक नया पहलू जोड़ दिया है। प्रशासन के अनुसार संबंधित तकनीकी एजेंसियां इसकी जांच करेंगी। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह संरचना वास्तव में कुआं है, इसका निर्माण कब हुआ और इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाता था।
फिलहाल सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में हुई कार्रवाई के बाद राजनीतिक बयानबाजी जारी है और 7 सितंबर को प्रस्तावित सपा प्रतिनिधिमंडल के दौरे पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में तकनीकी जांच और प्रशासनिक रिकॉर्ड से इस मामले से जुड़े कई सवालों के जवाब सामने आने की उम्मीद है।
