Surajpur Double Murder Case: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में महिला शिक्षिका रजनी बरेठ और उनके बेटे सुजल बरेठ की निर्मम हत्या का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। ग्राम पंचायत केशवनगर स्थित ममता कॉलोनी में 10 अक्टूबर को हुई इस दोहरे हत्याकांड के पांच दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस को अब तक कोई ऐसा ठोस सुराग नहीं मिला है, जिससे आरोपियों तक पहुंचने का रास्ता साफ हो सके। मां-बेटे की हत्या से इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है। अब सामाजिक संगठन भी सामने आने लगे हैं और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए जल्द गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई है। इसी क्रम में संभागीय धोबी समाज के प्रतिनिधिमंडल ने सूरजपुर के पुलिस अधीक्षक योगेश पटेल को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच, विशेष जांच दल (SIT) के गठन और वास्तविक दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की है।
सूरजपुर में मां-बेटे की हत्या से इलाके में आक्रोश, पांचवें दिन भी नहीं मिला सुराग
सूरजपुर जिले के केशवनगर ग्राम पंचायत की ममता कॉलोनी में शिक्षिका रजनी बरेठ और उनके बेटे सुजल बरेठ की हत्या की वारदात ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। 10 अक्टूबर को सामने आए इस दोहरे हत्याकांड के बाद से ही पुलिस मामले की गुत्थी सुलझाने में जुटी हुई है।
घटना को पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक पुलिस के हाथ कोई ऐसा ठोस सुराग नहीं लगा है, जिससे हत्या के पीछे की वजह और इसमें शामिल लोगों की पहचान स्पष्ट हो सके। पुलिस जांच जारी है, लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से लोगों में बेचैनी और नाराजगी बढ़ रही है।
मां-बेटे की हत्या के मामले में स्थानीय स्तर पर न्याय की मांग तेज हो रही है। सामाजिक संगठनों ने भी अब इस प्रकरण में हस्तक्षेप करते हुए पुलिस से जांच में तेजी लाने और दोषियों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग उठाई है।
संभागीय धोबी समाज ने एसपी योगेश पटेल को सौंपा ज्ञापन
मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग को लेकर बुधवार को संभागीय धोबी समाज के प्रतिनिधिमंडल ने सूरजपुर के पुलिस अधीक्षक योगेश पटेल से मुलाकात की। प्रतिनिधियों ने उन्हें ज्ञापन सौंपकर शिक्षिका रजनी बरेठ और उनके बेटे सुजल बरेठ की हत्या की निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रभावी जांच कराने की मांग की।
समाज ने मांग रखी कि मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी में विशेष जांच दल (SIT) गठित किया जाए। साथ ही जांच की नियमित समीक्षा हो, ताकि किसी भी महत्वपूर्ण तथ्य को नजरअंदाज न किया जाए और वास्तविक दोषियों की पहचान कर उन्हें जल्द गिरफ्तार किया जा सके।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इस तरह के गंभीर अपराध में जांच पूरी गंभीरता के साथ होनी चाहिए। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना और हत्या में शामिल वास्तविक आरोपियों को कानून के कटघरे तक पहुंचाना प्राथमिकता होनी चाहिए।
पुलिस अधीक्षक खुद कर रहे जांच की निगरानी
शिक्षिका और उनके बेटे की हत्या के मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक योगेश पटेल स्वयं जांच की निगरानी कर रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिले के विभिन्न थानों और पुलिस चौकियों के पुलिसकर्मियों को भी मामले की जांच में लगाया गया है।
पुलिस हत्या के पीछे की वजह और घटना को अंजाम देने वालों का पता लगाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, पांच दिन बीतने के बाद भी कोई ठोस सुराग सामने नहीं आने से मामले की जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
फिलहाल हत्या के कारणों और आरोपियों की पहचान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्य और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां इस मामले की गुत्थी सुलझाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
साक्ष्यों से छेड़छाड़ या लापरवाही मिली तो कार्रवाई की मांग
संभागीय धोबी समाज ने अपने ज्ञापन में जांच के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतने पर जोर दिया है। प्रतिनिधियों ने मांग की कि यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है अथवा साक्ष्यों से छेड़छाड़ किए जाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
समाज ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी दोषी को उसके प्रभाव, पहुंच या आर्थिक स्थिति के कारण संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। वहीं, पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में किसी निर्दोष व्यक्ति को आरोपी नहीं बनाया जाना चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि जांच के दौरान तथ्यों और सबूतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सभी पहलुओं की निष्पक्ष पड़ताल के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोप पत्र दाखिल किया जाए और अदालत में प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित किया जाए।
CCTV फुटेज से लेकर मोबाइल ट्रेसिंग तक, सभी पहलुओं की जांच की मांग
पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए ज्ञापन में समाज के प्रतिनिधियों ने वैज्ञानिक तरीके से जांच कराने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने घटनास्थल के निरीक्षण, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल ट्रेसिंग और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की बारीकी से जांच करने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल के मुताबिक, हत्या के पीछे संभावित कारणों, आपसी रंजिश और किसी संभावित साजिश समेत सभी पहलुओं की गहनता से पड़ताल होनी चाहिए। जांच में किसी भी ऐसे तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, जो मामले को सुलझाने में मदद कर सकता है।
समाज का कहना है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ने से वास्तविक दोषियों की पहचान करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इन सभी पहलुओं पर पुलिस की जांच और उसके निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है।
‘पीड़ित परिवार को न्याय मिले, दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए’
संभागीय धोबी समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि मां-बेटे की हत्या की घटना बेहद हृदयविदारक है। इस वारदात ने आम लोगों के मन में सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा कर दी है। प्रतिनिधियों ने जोर दिया कि पुलिस को जल्द से जल्द मामले का खुलासा कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना चाहिए।
समाज ने यह भी कहा कि मामले में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है। जांच की नियमित समीक्षा होनी चाहिए और वास्तविक दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में संभागीय धोबी समाज के अध्यक्ष राकेश कुमार रजक के साथ बाबूलाल, रामफल रजक, नीलम, उमेश कुमार, जगदेव रजक, महेश कौशिक समेत अन्य सदस्य शामिल रहे।
कार्रवाई नहीं हुई तो शासन तक पहुंचेगा मामला, धरना-प्रदर्शन की चेतावनी
संभागीय धोबी समाज ने स्पष्ट किया कि यदि मामले में उचित और प्रभावी कार्रवाई नहीं होती है, तो न्याय की मांग को लेकर सक्षम उच्चाधिकारियों और शासन के समक्ष मुद्दा उठाया जाएगा। जरूरत पड़ने पर समाज धरना-प्रदर्शन करने से भी पीछे नहीं हटेगा।
प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि पुलिस मामले की गंभीरता को समझते हुए जांच में तेजी लाएगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करेगी।
फिलहाल सूरजपुर पुलिस के सामने इस दोहरे हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने की चुनौती है। शिक्षिका रजनी बरेठ और उनके बेटे सुजल बरेठ की हत्या के पांच दिन बाद भी ठोस सुराग नहीं मिलने के बीच अब सामाजिक संगठनों का दबाव बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में पुलिस जांच से क्या तथ्य सामने आते हैं और मामले का खुलासा कब होता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
