Mother Dairy के प्लांट से जुड़े किसानों की जिंदगी अब तेजी से बदल रही है। रांची के पास नगरी गांव के किसान कैलाश बताते हैं कि कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग मॉडल ने खेती को घाटे के सौदे से फायदे के बिजनेस में बदल दिया है। वे स्वीट कॉर्न की खेती करते हैं और कंपनी खुद खेत तक पहुंचकर फसल खरीद लेती है।
कैलाश के मुताबिक, सबसे बड़ी राहत यह है कि उन्हें बाजार में जाकर खरीदार ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ती। मदर डेयरी की टीम सीधे खेत में आती है, स्वीट कॉर्न की मिठास और वजन जांचती है और उसी आधार पर भुगतान करती है। किसान का दावा है कि करीब 3 महीने में उन्हें लगभग 2 लाख रुपये तक की कमाई हो जाती है।

डेढ़ एकड़ खेती से 150 क्विंटल तक उत्पादन
कैलाश करीब डेढ़ एकड़ जमीन में स्वीट कॉर्न की खेती करते हैं। उनका कहना है कि इस जमीन से 150 क्विंटल से ज्यादा उत्पादन हो जाता है। पहले उन्हें अपनी फसल बाजार में बेचनी पड़ती थी, जहां कभी सही दाम नहीं मिलता था तो कभी मौसम नुकसान पहुंचा देता था। लेकिन अब कंपनी तय रेट पर सीधे खेत से खरीद करती है, जिससे नुकसान का डर काफी कम हो गया है।
उनका कहना है कि पिछले तीन सालों में उनकी आर्थिक स्थिति पूरी तरह बदल गई है। अब उनके पास अपना घर, ट्रैक्टर, आधुनिक कृषि उपकरण और कार तक है। पहले खेती सिर्फ परिवार का खर्च चलाने तक सीमित थी, लेकिन अब इससे बेहतर कमाई होने लगी है।

मेहनत और देखभाल से मिलती है अच्छी कमाई
कैलाश बताते हैं कि स्वीट कॉर्न की खेती आसान नहीं है। कंपनी सिर्फ अच्छी क्वालिटी की फसल खरीदती है। बड़े आकार और मीठे दाने वाली फसल तैयार करने के लिए खेत की लगातार निगरानी करनी पड़ती है।
वे हर 15 दिन में गोबर और केंचुआ खाद का इस्तेमाल करते हैं। खरपतवार को नियमित हटाया जाता है और सप्ताह में एक बार नीम का पानी जड़ों में डाला जाता है। किसान के अनुसार, फसल की देखभाल बिल्कुल बच्चों की तरह करनी पड़ती है। कई बार वे रोजाना 10 से 12 घंटे तक खेत में काम करते हैं।
कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के इस मॉडल को अब इलाके के दूसरे किसान भी अपनाने लगे हैं, क्योंकि इससे बाजार के उतार-चढ़ाव का खतरा कम हो जाता है और आय का भरोसा बढ़ता है।
