Surat Cyber Crime News: गुजरात के सूरत में साइबर ठगी के एक मामले की जांच के दौरान पुलिस को कथित तौर पर जामताड़ा से जुड़े साइबर अपराध नेटवर्क का सुराग मिला है। सूरत सिटी साइबर क्राइम सेल ने 43 वर्षीय दीन मोहम्मद शेख को गिरफ्तार किया है। पुलिस का आरोप है कि उसने साइबर ठगी से हासिल रकम को नकद में बदलने और आगे भेजने में नेटवर्क की मदद की।
यह मामला उस शिकायत से जुड़ा है, जिसमें एक व्यक्ति के साथ कुल 6,31,414.68 रुपये की कथित साइबर ठगी हुई थी। पुलिस के मुताबिक, पीड़ित के मोबाइल फोन पर एक APK फाइल इंस्टॉल कराई गई थी। इसके बाद मैलवेयर के जरिए संवेदनशील जानकारी हासिल कर बैंक खाते से उसकी जानकारी के बिना कई लेनदेन किए गए।
APK फाइल इंस्टॉल होते ही शुरू हुआ साइबर फ्रॉड
पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधियों ने कथित तौर पर पीड़ित के मोबाइल पर APK फाइल भेजी थी। इसे इंस्टॉल करने के बाद मोबाइल में मौजूद संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाई गई। इसके बाद शिकायतकर्ता के बैंक खाते से करीब आठ लेनदेन किए जाने की बात सामने आई है।
जब पीड़ित को खाते से रकम निकलने की जानकारी हुई तो उसने तत्काल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क किया। शिकायत मिलने के बाद सूरत साइबर क्राइम सेल ने मामले की जांच शुरू की।
6.31 लाख रुपये की ठगी के मामले में FIR
इस मामले में सूरत साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 318(4), 336(2), 338, 336(3), 340(2), 61(2) और 3(5) के अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2008 की धारा 66(डी) के तहत एफआईआर दर्ज की गई।
मामले की जांच साइबर क्राइम सेल के पुलिस इंस्पेक्टर वी.डी. मंडोरा के नेतृत्व में की गई। पुलिस टीम ने तकनीकी जांच के जरिए कथित तौर पर ठगी की रकम के लेनदेन और उससे जुड़े लोगों की पहचान करने की कोशिश शुरू की।
सूरत से पकड़ा गया 43 वर्षीय दीन मोहम्मद शेख
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी की पहचान दीन मोहम्मद शेख के रूप में हुई है। 43 वर्षीय शेख सूरत के भेस्तान इलाके में रहता है और मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले की बुढाना तहसील के जोवला गांव का रहने वाला बताया गया है।
पुलिस का आरोप है कि शेख ने साइबर ठगी से हासिल धनराशि को इस्तेमाल करने और उसे नकदी में बदलने में कथित तौर पर सहायता की। इसके लिए उसने अपने एक्सिस बैंक और केनरा बैंक के क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराए थे।
क्रेडिट कार्ड से 2.28 लाख रुपये खर्च किए जाने का आरोप
जांच में पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता के 2,28,226.68 रुपये दो क्रेडिट कार्ड के माध्यम से खर्च किए गए। आरोप है कि साइबर ठगी से जुड़े लोगों ने इन कार्डों का इस्तेमाल बिलों के भुगतान के लिए किया और बाद में रकम को नकदी में बदल दिया।
साइबर सेल की डीसीपी बिशाखा जैन के अनुसार, इस प्रक्रिया में कथित तौर पर करीब 10 प्रतिशत कमीशन रखा गया और बाकी रकम फरार सह-आरोपी को ट्रांसफर कर दी गई।
Cash Deposit Machine के जरिए जामताड़ा तक पहुंची रकम?
पुलिस जांच में एक और महत्वपूर्ण कड़ी सामने आने की बात कही गई है। पुलिस के अनुसार, कथित तौर पर नकदी में बदली गई रकम को बाद में कैश डिपॉजिट मशीन (CDM) के जरिए कुछ व्यक्तिगत बैंक खातों में जमा/ट्रांसफर किया गया।
इन खातों का कथित संबंध जामताड़ा स्थित साइबर अपराध नेटवर्क से सामने आया है। अब पुलिस इस दिशा में जांच कर रही है कि सूरत में हुई कथित साइबर ठगी और जामताड़ा में मौजूद नेटवर्क के बीच वास्तविक कनेक्शन क्या है।
पुलिस का कहना है कि जांच का एक प्रमुख उद्देश्य उस मुख्य आरोपी तक पहुंचना है, जिसके जामताड़ा में होने की बात सामने आई है। फरार सह-आरोपी और अन्य संभावित लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
साइबर ठग APK फाइल के जरिए कैसे बनाते हैं शिकार?
पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधी लोगों को अलग-अलग बहानों से APK फाइल भेज सकते हैं। फाइल को मोबाइल में इंस्टॉल करने के बाद मैलवेयर के जरिए संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश की जाती है। इसके बाद बैंकिंग या अन्य निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल कर आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
यही वजह है कि पुलिस लोगों को अनजान स्रोत से मिलने वाली APK फाइलों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दे रही है।
पुलिस की लोगों से अपील- अनजान APK फाइल पर क्लिक न करें
साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप या किसी अज्ञात नंबर से प्राप्त APK फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल न करें। अगर किसी अनजान नंबर से ऐसी फाइल या संदिग्ध लिंक आता है तो उस पर क्लिक करने से बचें।
पुलिस के मुताबिक, ऐसी संदिग्ध फाइल मिलने पर संबंधित नंबर को ब्लॉक करने के साथ स्थानीय पुलिस को सूचना दी जानी चाहिए। किसी बैंक खाते से अनधिकृत लेनदेन होने पर बिना देरी किए 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत करना भी बेहद जरूरी है।
जामताड़ा कनेक्शन की जांच से खुल सकता है बड़ा नेटवर्क
सूरत साइबर क्राइम सेल की जांच अब केवल गिरफ्तार आरोपी तक सीमित नहीं है। पुलिस कथित तौर पर उन बैंक खातों, क्रेडिट कार्ड लेनदेन, नकदी जमा और अन्य वित्तीय गतिविधियों की कड़ियां जोड़ रही है, जिनके जरिए ठगी की रकम को आगे पहुंचाया गया।
जामताड़ा से जुड़े संभावित नेटवर्क की भूमिका की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल पुलिस फरार आरोपियों तक पहुंचने और साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि मोबाइल पर आने वाली संदिग्ध APK फाइल कितनी बड़ी साइबर सुरक्षा समस्या बन सकती है। ऐसे में किसी भी अनजान फाइल को इंस्टॉल करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करना और संदिग्ध गतिविधि होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करना बेहद महत्वपूर्ण है।
