BJP से धर्मेंद्र कश्यप का इस्तीफा, राज्यसभा टिकट नहीं मिलने पर जताई नाराजगी; बोले- ‘टाटा-बाय-बाय’

Dharmendra Kashyap Resigns from BJP: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा टिकट को लेकर बीजेपी के भीतर नाराजगी का मामला सामने आया है। आंवला से दो बार सांसद रह चुके धर्मेंद्र कश्यप ने पार्टी की प्राथमिक और सक्रिय सदस्यता से इस्तीफा देने का ऐलान किया है। इससे पहले 7 अक्टूबर को उन्होंने फेसबुक पर ‘टाटा-बाय-बाय’ लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। अब उनके इस्तीफे के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को उस समय झटका लगा, जब आंवला लोकसभा सीट से दो बार सांसद रहे धर्मेंद्र कश्यप ने पार्टी से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। राज्यसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने से नाराज चल रहे कश्यप ने सोशल मीडिया पर अपनी असंतुष्टि जाहिर की थी। अब उन्होंने सार्वजनिक रूप से पार्टी की प्राथमिक और सक्रिय सदस्यता छोड़ने का ऐलान किया है।

धर्मेंद्र कश्यप ने अपने इस्तीफे के पीछे पार्टी के भीतर कथित भेदभाव और पिछड़े तथा अति पिछड़े समाज को उचित सम्मान नहीं मिलने का मुद्दा उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी को नुकसान पहुंचाने वाले नेताओं को संगठन में अहम स्थान मिला, जबकि पिछड़े और अति पिछड़े समाज के लोगों को अपेक्षित सम्मान नहीं दिया गया। उनके इस बयान से बीजेपी में टिकट वितरण और संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर बहस शुरू हो गई है।

‘टाटा-बाय-बाय’ पोस्ट से पहले ही दिए थे नाराजगी के संकेत

धर्मेंद्र कश्यप की नाराजगी 7 अक्टूबर को उनके फेसबुक पोस्ट के बाद सार्वजनिक चर्चा में आई थी। उन्होंने अपनी पोस्ट में केवल दो शब्द लिखे थे—‘टाटा-बाय-बाय’। उस समय उन्होंने न तो सीधे बीजेपी का नाम लिया था और न ही पार्टी छोड़ने की स्पष्ट घोषणा की थी, लेकिन उनके इस संदेश को राजनीतिक गलियारों में असंतोष के संकेत के रूप में देखा गया।

जब उनसे इस पोस्ट के बारे में पूछा गया और उनके अगले कदम को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने सीधे तौर पर पार्टी छोड़ने की पुष्टि नहीं की थी। इसके बजाय उन्होंने शायराना अंदाज में कहा था, “आंखों में रहा, दिल में उतरकर नहीं देखा, कश्ती के मुसाफिर ने कभी समंदर नहीं देखा।”

उनकी इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक हलकों में उनके अगले कदम को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं। अब इस्तीफे की घोषणा के साथ उनके पहले के पोस्ट और बयान फिर चर्चा में आ गए हैं।

फेसबुक पोस्ट के जरिए धर्मेंद्र कश्यप ने बताया इस्तीफे का कारण

धर्मेंद्र कश्यप ने फेसबुक पर अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए बीजेपी के संगठनात्मक फैसलों पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि पार्टी में उन नेताओं को पहली पंक्ति में जगह दी गई, जिन्होंने उनके आरोप के मुताबिक, भीतरघात किया और लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी को कमजोर करने का काम किया।

उन्होंने अपने बयान में कहा कि पिछड़े और अति पिछड़े समाज को पार्टी में अपेक्षित स्थान और सम्मान नहीं मिल रहा है। इसी बात से आहत होकर उन्होंने बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता और सक्रिय सदस्यता से इस्तीफा देने का फैसला किया है।

कश्यप की नाराजगी मुख्य रूप से राज्यसभा के लिए उम्मीदवारों के चयन और पार्टी के भीतर नेताओं को दिए जा रहे महत्व को लेकर है। हालांकि, पार्टी के भीतर कथित भीतरघात और सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर लगाए गए आरोप धर्मेंद्र कश्यप के अपने दावे हैं।

आंवला से दो बार सांसद रहे धर्मेंद्र कश्यप, 2024 में मिली थी हार

धर्मेंद्र कश्यप उत्तर प्रदेश के बरेली जिले की आंवला लोकसभा सीट से दो बार सांसद चुने गए थे। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल कर पहली बार संसद में प्रवेश किया। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने आंवला सीट पर जीत दर्ज की और लगातार दूसरी बार सांसद बने।

हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में वह अपनी जीत का सिलसिला बरकरार नहीं रख सके और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद भी वह बीजेपी की राजनीति में सक्रिय रहे।

अब राज्यसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद उनके इस्तीफे ने उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर उनके अगले राजनीतिक कदम या किसी दूसरी पार्टी में शामिल होने की पुष्टि नहीं की जा सकती।

धर्मपाल सिंह और श्रुति गंगवार को राज्यसभा भेजे जाने से बढ़ी नाराजगी

राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने उत्तर प्रदेश से अपने उम्मीदवारों की सूची में धर्मपाल सिंह और श्रुति गंगवार को भी जगह दी। समाचार में दिए गए विवरण के मुताबिक, इन दोनों नामों को लेकर धर्मेंद्र कश्यप के क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों में चर्चा हुई।

धर्मपाल सिंह उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं, जबकि श्रुति गंगवार पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार की बेटी हैं। दोनों को राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाए जाने के बाद धर्मेंद्र कश्यप की नाराजगी की चर्चा और तेज हुई।

कश्यप स्वयं आंवला से दो बार सांसद रह चुके हैं। ऐसे में राज्यसभा के लिए मौका नहीं मिलने को उनके पार्टी से असंतोष का एक प्रमुख कारण बताया जा रहा है। हालांकि, उनके इस्तीफे में उठाए गए सामाजिक सम्मान और संगठनात्मक भेदभाव के मुद्दे भी उनके फैसले के पीछे बताए गए हैं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर के परिवार में भी सामने आई नाराजगी

राज्यसभा टिकट वितरण को लेकर असंतोष की चर्चा केवल धर्मेंद्र कश्यप तक सीमित नहीं रही। पूर्व केंद्रीय मंत्री और मोहनलालगंज से पूर्व सांसद कौशल किशोर के परिवार से भी सोशल मीडिया पर नाराजगी जाहिर किए जाने की बात सामने आई।

कौशल किशोर के बेटे विकास किशोर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि जिस परिवार में मां-बाप का मान और सम्मान न हो, उस परिवार में नहीं रहना चाहिए। विकास किशोर बीजेपी अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं।

कौशल किशोर को 2024 के लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। राज्यसभा चुनाव के लिए उनके नाम की भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी, लेकिन बीजेपी ने अवध क्षेत्र से पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत को उम्मीदवार बनाया और उन्हें राज्यसभा भेजने का फैसला किया।

इस घटनाक्रम ने पार्टी में टिकट वितरण, नेताओं की अपेक्षाओं और सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर चर्चा को और बढ़ा दिया है। हालांकि, धर्मेंद्र कश्यप और कौशल किशोर के परिवार से जुड़ी नाराजगी अलग-अलग घटनाक्रम हैं और दोनों के कारणों को एक जैसा मानना उचित नहीं होगा।

उत्तर प्रदेश बीजेपी के लिए क्या है इस घटनाक्रम का राजनीतिक महत्व?

धर्मेंद्र कश्यप का इस्तीफा ऐसे समय सामने आया है, जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की राजनीतिक तैयारियों को लेकर गतिविधियां बढ़ रही हैं। दो बार सांसद रह चुके नेता का पार्टी छोड़ना संगठनात्मक राजनीति और टिकट वितरण से जुड़े सवालों को सामने लाता है।

कश्यप ने अपने बयान में पिछड़े और अति पिछड़े समाज के सम्मान को प्रमुखता दी है। इससे पार्टी के भीतर प्रतिनिधित्व और नेताओं की राजनीतिक भूमिका को लेकर बहस का एक और पहलू सामने आया है।

हालांकि, उनके इस्तीफे का व्यापक राजनीतिक असर क्या होगा, यह आने वाले समय में सामने आने वाली परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि धर्मेंद्र कश्यप ने राज्यसभा टिकट नहीं मिलने के बाद अपनी नाराजगी सार्वजनिक की और फिर बीजेपी की प्राथमिक तथा सक्रिय सदस्यता से इस्तीफे की घोषणा की।

निष्कर्ष: बीजेपी के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप का इस्तीफा राज्यसभा टिकट को लेकर शुरू हुई नाराजगी के बाद सामने आया है। 7 अक्टूबर के ‘टाटा-बाय-बाय’ पोस्ट से लेकर फेसबुक पर इस्तीफे की घोषणा तक, उनके बयानों में पार्टी के भीतर सम्मान, प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक फैसलों को लेकर असंतोष दिखाई देता है। अब उनके अगले राजनीतिक कदम पर नजर रहेगी।

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