BRICS Summit 2026: नई दिल्ली घोषणापत्र को सर्वसम्मति से मिली मंजूरी
नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में राजधानी नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’ को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS सदस्य देशों के सामने घोषणापत्र का मसौदा रखा और पूछा कि क्या किसी सदस्य देश को इस पर कोई आपत्ति है। किसी भी देश की ओर से आपत्ति नहीं जताई गई, जिसके बाद घोषणापत्र को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया।
BRICS के इस महत्वपूर्ण घोषणापत्र में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, व्यापार से जुड़ी बाधाओं पर चिंता जताने, आतंकवाद की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाने और अंतरराष्ट्रीय विवादों का शांतिपूर्ण समाधान तलाशने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके साथ ही युद्ध और टकराव को रोकने के लिए बातचीत, कूटनीति और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
पीएम मोदी ने कहा- घोषणाओं को जमीन पर उतारना जरूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ ने BRICS देशों के साझा संकल्प और प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए स्पष्ट दिशा तय की है। उन्होंने जोर दिया कि अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी इन फैसलों और संकल्पों को प्रभावी तरीके से जमीन पर लागू करने की है।
पीएम मोदी ने कहा कि केवल घोषणाएं करने से कोई बदलाव नहीं आएगा। जरूरी यह है कि इन फैसलों को ठोस परिणामों में बदला जाए। उन्होंने संघर्षों की रोकथाम, विवादों के शांतिपूर्ण समाधान, मजबूत बहुपक्षवाद और एकतरफा व्यापारिक उपायों से जुड़ी चिंताओं को घोषणापत्र के प्रमुख मुद्दों में शामिल बताया।
आतंकवाद पर BRICS का सख्त संदेश
नई दिल्ली घोषणापत्र में आतंकवाद को लेकर BRICS देशों ने कड़ा रुख अपनाया है। घोषणापत्र में सीमा पार आतंकवाद, आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकियों को सुरक्षित पनाह देने सहित आतंकवाद के सभी स्वरूपों की कड़ी निंदा की गई है।
शिखर सम्मेलन में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की भी निंदा की गई। सदस्य देशों ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने और आतंकवादी गतिविधियों के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की जरूरत पर जोर दिया।
BRICS देशों ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर संयुक्त राष्ट्र के व्यापक सम्मेलन यानी CCIT (Comprehensive Convention on International Terrorism) को जल्द से जल्द पारित करने का भी आह्वान किया।
युद्ध और अंतरराष्ट्रीय विवादों पर क्या कहा गया?
BRICS घोषणापत्र में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी संघर्ष और तनाव को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है। सदस्य देशों ने युद्ध और टकराव को रोकने के प्रयासों को तेज करने की जरूरत बताई।
घोषणापत्र में दोहराया गया कि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान बातचीत, आपसी सलाह और कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए। BRICS देशों ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय विवाद का स्थायी समाधान युद्ध के बजाय शांतिपूर्ण वार्ता और कूटनीतिक प्रयासों से तलाशा जाना चाहिए।
पश्चिम एशिया के हालात पर भी BRICS की नजर
नई दिल्ली घोषणापत्र में पश्चिम एशिया यानी मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव पर भी गहरी चिंता जताई गई। BRICS देशों ने क्षेत्र में तनाव कम करने और हालात को और बिगड़ने से रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सदस्य देशों ने सभी संबंधित पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और विवादों को बातचीत तथा कूटनीतिक माध्यमों से सुलझाने की अपील की। घोषणापत्र में वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की जरूरत भी रेखांकित की गई।
व्यापारिक बाधाओं और एकतरफा उपायों पर चिंता
BRICS के दिल्ली डिक्लेरेशन में वैश्विक व्यापार व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता दी गई है। सदस्य देशों ने एकतरफा व्यापारिक बाधाओं और उपायों को लेकर चिंता जताई तथा व्यापारिक संबंधों में सहयोग और संतुलन की आवश्यकता पर जोर दिया।
घोषणापत्र में व्यापार को वैश्विक आर्थिक विकास और सहयोग का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए ऐसे कदमों से बचने की जरूरत पर बल दिया गया, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित कर सकते हैं।
Renewable Energy पर सहयोग बढ़ाने की तैयारी
नई दिल्ली घोषणापत्र में नवीकरणीय ऊर्जा को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। BRICS देशों के बीच Renewable Energy के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े प्रयासों को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
ऊर्जा सुरक्षा, सतत विकास और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में आपसी सहयोग को BRICS देशों के लिए महत्वपूर्ण प्राथमिकता के तौर पर देखा गया है।
नई दिल्ली घोषणापत्र से BRICS का क्या संदेश गया?
18वें BRICS शिखर सम्मेलन में स्वीकार किया गया ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’ आतंकवाद, युद्ध, वैश्विक व्यापार, नवीकरणीय ऊर्जा और अंतरराष्ट्रीय विवादों जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर BRICS देशों की साझा सोच को सामने रखता है।
घोषणापत्र में आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख, युद्ध के बजाय बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता, व्यापारिक बाधाओं पर चिंता, नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग और वैश्विक बहुपक्षवाद को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दिखाई गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की मेजबानी में हुए इस BRICS सम्मेलन में घोषणापत्र का सर्वसम्मति से पारित होना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब चुनौती इन साझा संकल्पों को प्रभावी नीतियों और ठोस परिणामों में बदलने की होगी।
