CJP के ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन पर SC का तत्काल सुनवाई से इनकार, कारोबारियों ने जताई रोजाना ₹250 करोड़ तक के व्यापार पर असर की आशंका

CJP Tiranga Protest News: दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की मांग उठी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने मामले में तत्काल निर्देश देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि प्रदर्शन और उससे जुड़े प्रतिबंधों के विभिन्न पहलुओं पर दिल्ली हाईकोर्ट पहले ही विचार कर रहा है। इस बीच कारोबारियों ने त्योहारों के मौसम में व्यापार प्रभावित होने की आशंका जताते हुए रोजाना 200 से 250 करोड़ रुपये के कारोबार पर असर पड़ने का दावा किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने छोटे दुकानदारों और रोज कमाकर आजीविका चलाने वाले लोगों की परेशानियों का भी उल्लेख किया। अदालत ने उम्मीद जताई कि सभी पक्ष समझदारी से काम लेंगे, ताकि आम लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। साथ ही, अदालत ने यह संकेत भी दिया कि यदि कारोबारियों के कामकाज में अनुचित तरीके से बाधा पहुंचने की बात सामने आती है, तो उचित कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है।

कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका

दिल्ली के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र कनॉट प्लेस में CJP की ओर से घोषित ‘लहरा दो तिरंगा’ कार्यक्रम को लेकर व्यापारिक संगठनों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। इस मामले में दिल्ली किराना कमेटी और दिल्ली आयरन एंड हार्डवेयर मर्चेंट्स एसोसिएशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जय अनंत देहाद्राई ने पक्ष रखा।

कारोबारियों की ओर से आशंका जताई गई कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और क्षेत्र में लगने वाली पाबंदियों के कारण दुकानों तथा अन्य व्यावसायिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। व्यापारियों का कहना है कि त्योहारों का मौसम कारोबार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे समय में बाजार की गतिविधियां बाधित होने से दुकानदारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

छोटे दुकानदारों की आजीविका पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता

सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने छोटे दुकानदारों और रोजाना कमाई पर निर्भर लोगों की स्थिति पर ध्यान दिलाया। अदालत ने उम्मीद जताई कि सभी संबंधित पक्ष समझदारी से काम करेंगे और ऐसी स्थिति पैदा नहीं होगी, जिससे आम नागरिकों को परेशानी झेलनी पड़े।

पीठ ने कहा कि छोटे दुकानदारों के लिए इन दिनों की कमाई काफी अहम है। इसी आमदनी से कई परिवारों का खर्च चलता है। अदालत ने उनकी आजीविका से जुड़ी कठिनाइयों को समझने की बात कही।

सुनवाई में जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने प्रदर्शन करने के अधिकार, मूंगफली बेचकर रोजी-रोटी कमाने वाले लोगों की जरूरत और प्रशासन की कानून-व्यवस्था संबंधी जिम्मेदारी जैसे पहलुओं का उल्लेख किया। उन्होंने संकेत दिया कि इन सभी हितों को एक साथ ध्यान में रखना होगा। किसी एक पक्ष की गतिविधि का दूसरे पक्ष की आजीविका पर क्या प्रभाव पड़ता है, यह भी महत्वपूर्ण है।

कारोबारियों का दावा: रोजाना 200 से 250 करोड़ रुपये का व्यापार प्रभावित हो सकता है

व्यापारिक संगठनों की ओर से पेश हुए अधिवक्ता जय अनंत देहाद्राई ने अदालत को बताया कि कनॉट प्लेस में रोजाना करीब 200 से 250 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। उनके अनुसार, प्रस्तावित प्रदर्शन और उससे जुड़ी पाबंदियों के कारण इस व्यापार पर असर पड़ने की आशंका है।

कारोबारियों ने यह भी कहा कि त्योहारों का सीजन नजदीक होने के कारण दुकानदारों के लिए कारोबार में व्यवधान विशेष रूप से नुकसानदेह हो सकता है। उनका तर्क है कि बाजार तक ग्राहकों की पहुंच, दुकानों का संचालन और सामान्य व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित होने से आर्थिक नुकसान की स्थिति बन सकती है।

हालांकि, रोजाना 200 से 250 करोड़ रुपये के कारोबार का आंकड़ा याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से अदालत में रखा गया दावा है। इसे अदालत द्वारा प्रमाणित वास्तविक नुकसान या अंतिम रूप से निर्धारित आर्थिक क्षति नहीं माना जाना चाहिए।

NDMC के सेंट्रल पार्क बंद करने के आदेश पर भी उठे सवाल

इस विवाद में नई दिल्ली नगरपालिका परिषद यानी NDMC की ओर से सेंट्रल पार्क को बंद करने से संबंधित नोटिस भी महत्वपूर्ण मुद्दा रहा। कारोबारियों की ओर से कहा गया कि पार्क बंद होने और क्षेत्र में लागू प्रतिबंधों से आसपास की व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि प्रदर्शन के चलते लगाए जाने वाले प्रतिबंधों का असर केवल कार्यक्रम स्थल तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि आसपास के बाजार और दुकानदारों पर भी पड़ सकता है। इसी आधार पर अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई।

हाईकोर्ट में मामला लंबित, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल नहीं दिया तत्काल आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल निर्देश जारी करने से इनकार करते हुए कहा कि मामले से जुड़े पहलुओं पर दिल्ली हाईकोर्ट पहले ही विचार कर रहा है। अदालत के अनुसार, प्रदर्शन, प्रशासनिक प्रतिबंध और कारोबारियों की चिंताएं आपस में जुड़ी हुई हैं। ऐसे में फिलहाल हाईकोर्ट की कार्यवाही के बीच हस्तक्षेप करना उचित नहीं समझा गया।

सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने यह भी संकेत दिया कि यदि किसी कार्रवाई को अनुपातहीन पाया जाता है और उससे कारोबारियों की आजीविका पर अनुचित प्रभाव पड़ता है, तो अदालत अपने संवैधानिक अधिकार क्षेत्र के तहत उचित कदम उठाने पर विचार कर सकती है। मुआवजे का पहलू भी इसी संदर्भ में सामने आया।

इसलिए सुप्रीम कोर्ट का तत्काल सुनवाई या निर्देश से इनकार करना यह नहीं दर्शाता कि कारोबारियों की शिकायतों को पूरी तरह खारिज कर दिया गया है। अदालत ने फिलहाल मामले में तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया, जबकि आगे की सुनवाई में संबंधित पहलुओं पर विचार किया जाना है।

अब 26 अक्टूबर को सुनवाई पर नजर

मामले में आगे की कार्यवाही के लिए 26 अक्टूबर को सुनवाई की बात सामने आई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट में कारोबारियों की ओर से उठाए गए मुद्दों पर आगे क्या रुख सामने आता है।

फिलहाल इस मामले में तीन प्रमुख पहलू चर्चा में हैं—प्रदर्शन करने का अधिकार, प्रशासन की कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी और कारोबारियों तथा छोटे दुकानदारों की आजीविका की सुरक्षा। अदालत की टिप्पणियों से स्पष्ट है कि इन सभी पहलुओं के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया गया है।

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