रांची: झारखंड में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के आंदोलन को लेकर सरकार और छात्रों के बीच हुई वार्ता के बाद भी गतिरोध खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। सरकार की ओर से छात्रों की 98 प्रतिशत मांगें मानने का दावा किया गया है, लेकिन JSSC CGL परीक्षा को रद्द करने की मांग पर छात्र नेता अब भी अड़े हुए हैं। यही मुद्दा सरकार और आंदोलनरत अभ्यर्थियों के बीच सबसे बड़ी अड़चन बना हुआ है।
CGL परीक्षा रद्द करने के अधिकार पर सरकार ने क्या कहा?
मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि JSSC CGL परीक्षा को रद्द करने का अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद परीक्षा आयोजित की गई है। ऐसी स्थिति में सरकार अपने स्तर से परीक्षा को रद्द करने का फैसला नहीं ले सकती।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि JSSC CGL के माध्यम से जिन अभ्यर्थियों की नियुक्ति हो चुकी है, उनकी नियुक्ति भी सरकार अपने स्तर से रद्द नहीं कर सकती। सरकार का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया और अदालतों के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए ही इस मामले में आगे कदम उठाया जा सकता है।
कथित अनियमितताओं की जांच के लिए बन सकती है कमेटी
हालांकि, सरकार ने छात्रों की मांग को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया है। मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो JSSC CGL परीक्षा में सामने आई कथित अनियमितताओं की जांच कराई जा सकती है।
उन्होंने संकेत दिया कि इस मामले की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी गठित की जा सकती है। ऐसे में सरकार की ओर से परीक्षा रद्द करने के बजाय कथित अनियमितताओं की जांच का विकल्प सामने रखा गया है।
छात्र नेता बोले- CGL रद्द होने तक आंदोलन जारी रहेगा
दूसरी ओर, छात्र नेता रविंद्र पासवान ने सरकार के रुख पर असहमति जताई है। उनका कहना है कि छात्रों की सबसे महत्वपूर्ण मांगों में JSSC CGL परीक्षा को रद्द करना शामिल है और जब तक यह मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
रविंद्र पासवान ने कहा कि सरकार और छात्रों के बीच वार्ता के बावजूद CGL परीक्षा रद्द करने की मांग पर सहमति नहीं बन पाई है। ऐसे में अभ्यर्थी अपने आंदोलन को आगे भी जारी रखेंगे।
10 अगस्त को विधानसभा मार्च की तैयारी
छात्र नेता ने बताया कि आंदोलन के अगले चरण में 10 अगस्त को छात्र शांतिपूर्ण तरीके से विधानसभा मार्च निकालेंगे। इसको लेकर अभ्यर्थियों के बीच तैयारी चल रही है। छात्रों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाते रहेंगे।
वहीं, सरकार की ओर से छात्रों की 98 प्रतिशत मांगें मानने का दावा किया जा रहा है। लेकिन CGL परीक्षा रद्द करने के मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पाने से विवाद अभी भी कायम है।
98 प्रतिशत मांगें बनाम CGL रद्द करने की मांग
पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार और छात्रों के बीच इस एक मुद्दे पर सहमति कैसे बनेगी। एक तरफ सरकार का कहना है कि वह छात्रों की अधिकांश मांगें मान चुकी है और CGL परीक्षा रद्द करना उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। दूसरी तरफ आंदोलनरत अभ्यर्थी परीक्षा रद्द करने की मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
ऐसे में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों का आंदोलन आगे किस दिशा में जाता है, यह 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा मार्च के बाद और स्पष्ट हो सकता है। फिलहाल सरकार और छात्रों के बीच बातचीत के बावजूद CGL परीक्षा रद्द करने के मुद्दे पर गतिरोध बना हुआ है।
