Kolkata : कोलकाता में हुए भीषण गोदाम हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। मलबे से गुरुवार को छह और शव बरामद होने के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है। प्रशासन के अनुसार अब तक 20 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है, जबकि आशंका है कि कुछ लोग अभी भी मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं।
हादसे के 26 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, कोलकाता पुलिस, दमकल विभाग और अन्य एजेंसियां संयुक्त रूप से राहत अभियान में जुटी हुई हैं। फंसे लोगों का पता लगाने के लिए सेना ने अत्याधुनिक ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (GPR) सिस्टम का भी इस्तेमाल शुरू कर दिया है।
मलबे में जिंदगी की तलाश जारी
राहत टीमों ने गुरुवार को कई घंटों तक लगातार मलबा हटाने का काम किया। इस दौरान पांच लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। बचाए गए लोगों में दो की हालत गंभीर बताई जा रही है और उनका इलाज आईसीयू में चल रहा है, जबकि अन्य 18 लोगों की स्थिति स्थिर है।
मौके पर सेना ने प्राथमिक उपचार के लिए अस्थायी चिकित्सा सुविधा भी स्थापित की है ताकि घायल लोगों को तत्काल इलाज मिल सके। कई घायलों को स्ट्रेचर के जरिए एंबुलेंस तक पहुंचाया गया और नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
लोहे के ढांचे के नीचे दबे मिले कई लोग
प्रत्यक्षदर्शियों और बचावकर्मियों के अनुसार हादसे के दौरान गोदाम का भारी शेड अचानक गिर गया, जिससे कई मजदूर उसके नीचे दब गए। कुछ लोग लोहे के पोल और भारी मलबे के बीच फंसे हुए थे, जिन्हें बाहर निकालने के लिए विशेष उपकरणों की मदद लेनी पड़ी।
एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जब गिरा हुआ ढांचा उसके सिर पर आ गिरा। वहीं कई अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
हादसे की जांच तेज, अब तक 5 गिरफ्तार
प्रशासन ने घटना की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती स्तर पर निर्माण कार्य में तकनीकी खामी या संरचनात्मक कमजोरी की आशंका जताई जा रही है। मामले में अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
गिरफ्तार आरोपियों में अयान ट्रेडर्स का सुपरवाइजर गुलजार हुसैन, लोहे के ढांचे का फैब्रिकेटर कमल सामंतो, जमीन का लीजधारक संभूनाथ बेहरा, ठेकेदार एवं लेबर सप्लायर दिवाकर भंडारी और निर्माण स्वीकृति प्रक्रिया से जुड़े ब्रोकर अब्दुल हमीद शामिल हैं।
सभी निर्माणाधीन परियोजनाओं का होगा ऑडिट
घटना के बाद राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने कोलकाता नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सभी निर्माणाधीन परियोजनाओं का व्यापक ऑडिट कराने की घोषणा की है।
सरकार का कहना है कि जिन परियोजनाओं को पिछले वर्षों में मंजूरी दी गई थी, उनकी सुरक्षा और निर्माण गुणवत्ता की जांच की जाएगी। यदि किसी प्रोजेक्ट में नियमों का उल्लंघन या सुरक्षा संबंधी गंभीर खामियां पाई जाती हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
क्या है ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (GPR)?
बचाव अभियान में इस्तेमाल किया जा रहा ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार यानी GPR एक उन्नत तकनीक है, जो जमीन या मलबे के भीतर मौजूद वस्तुओं का पता लगाने में मदद करती है। यह तकनीक बिना किसी खुदाई के कंक्रीट, धातु, पाइपलाइन, केबल या दबे हुए ढांचों की पहचान कर सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार GPR लगभग 8 से 10 मीटर तक की गहराई में मौजूद वस्तुओं का पता लगाने में सक्षम है। यही वजह है कि बड़े हादसों और आपदा प्रबंधन अभियानों में इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
राहत एजेंसियों की नजर हर संभावित संकेत पर
बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं और उम्मीद जताई जा रही है कि अभियान के दौरान और लोगों को सुरक्षित निकाला जा सकता है। प्रशासन ने आसपास के इलाके को सील कर दिया है और आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है ताकि राहत कार्य बिना किसी बाधा के जारी रह सके।
फिलहाल पूरे शहर की नजर इस अभियान पर टिकी हुई है और परिजन अपने प्रियजनों की सुरक्षित वापसी की उम्मीद में घटनास्थल और अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं।
