Sunetra Pawar NCP Meeting: महाराष्ट्र की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में अंदरूनी मतभेदों की चर्चाओं के बीच सियासी हलचल तेज हो गई है। उपमुख्यमंत्री और पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार की ओर से मुंबई स्थित सरकारी आवास देवगिरी में बुलाई गई बैठक में 50 में से 33 विधायक ही पहुंचे। यानी 17 विधायक बैठक से गैरहाजिर रहे। बैठक में कुछ विधायकों ने अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों की धीमी रफ्तार, विभागों में काम नहीं होने और संगठनात्मक फैसलों में वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी का मुद्दा उठाया। वहीं, पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी के बीच बुधवार सुबह 9 बजे कोर कमेटी की एक और महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या NCP का आंतरिक विवाद अब किसी बड़े राजनीतिक फैसले की ओर बढ़ रहा है?
देवगिरी बैठक के बाद NCP में हलचल, आज सुबह 9 बजे फिर जुटेंगे बड़े नेता
महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही गतिविधियां एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद संगठन में बैठकों का सिलसिला तेज हो गया है।
मंगलवार रात उपमुख्यमंत्री और NCP की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार ने मुंबई स्थित अपने सरकारी आवास देवगिरी में पार्टी के विधायकों और वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई थी। यह बैठक करीब चार घंटे तक चली। हालांकि, बैठक में सभी विधायकों की मौजूदगी नहीं रही, जिसके बाद पार्टी के अंदर नाराजगी और आपसी मतभेदों को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं।
इसी बीच बुधवार सुबह 9 बजे पार्टी की कोर कमेटी की एक और अहम बैठक आयोजित करने का फैसला लिया गया है। इस बैठक में संगठन के मौजूदा हालात और वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
50 में से सिर्फ 33 विधायक पहुंचे, 17 की गैरमौजूदगी ने बढ़ाई चर्चा
देवगिरी में आयोजित बैठक में विधायकों की उपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के मुताबिक, पार्टी के कुल 50 विधायकों में से केवल 33 विधायक ही बैठक में शामिल हुए, जबकि 17 विधायक अनुपस्थित रहे।
आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र विधानसभा में NCP के 41 विधायक हैं। इनमें से 29 विधायक मंगलवार रात की बैठक में पहुंचे, जबकि 12 विधायक गैरहाजिर रहे। इसके अलावा पार्टी के अन्य विधायकों की अनुपस्थिति को मिलाकर कुल 17 विधायकों के बैठक में शामिल नहीं होने की बात सामने आई है।
बैठक में इतनी बड़ी संख्या में विधायकों की गैरमौजूदगी को पार्टी के मौजूदा आंतरिक हालात से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, केवल अनुपस्थिति के आधार पर किसी विधायक की नाराजगी या विरोध को निश्चित नहीं माना जा सकता।
विधायकों ने उठाया विकास कार्यों का मुद्दा, सत्ता में होने के बावजूद काम नहीं होने की शिकायत
देवगिरी में हुई बैठक के दौरान कुछ विधायकों ने अपने विधानसभा क्षेत्रों में विकास कार्यों की धीमी गति को लेकर नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि पार्टी सत्ता में होने के बावजूद उनके क्षेत्रों में जरूरी विकास योजनाओं को अपेक्षित गति नहीं मिल रही है।
कुछ विधायकों ने एकनाथ शिंदे से जुड़े विभागों में कामकाज को लेकर भी शिकायतें रखीं। उनका आरोप था कि संबंधित विभागों में उनके प्रस्तावों और क्षेत्रीय विकास से जुड़े कार्यों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है।
इसके अलावा विधायकों ने पार्टी के भीतर चल रहे विवादों और संगठनात्मक खींचतान की जानकारी समय पर नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया। उनका मानना था कि जब पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद होते हैं और विधायकों को इसकी जानकारी नहीं मिलती, तो इसका नकारात्मक असर संगठन की छवि और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़ता है।
इस तरह बैठक में केवल राजनीतिक नेतृत्व ही नहीं, बल्कि विधायकों के क्षेत्रीय कामकाज और संगठन के भीतर संवाद की कमी जैसे मुद्दे भी सामने आए।
पार्थ पवार के कामकाज को लेकर वरिष्ठ नेताओं में असंतोष की चर्चा
NCP के भीतर चल रही नाराजगी की एक प्रमुख वजह संगठनात्मक फैसलों में वरिष्ठ नेताओं की भूमिका को लेकर बताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता इस बात से असंतुष्ट हैं कि महत्वपूर्ण फैसले लेते समय कोर टीम के सदस्यों से पर्याप्त विचार-विमर्श नहीं किया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि इसी असंतोष के बीच पार्टी के कुछ नेताओं ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इस मुलाकात को NCP के अंदरूनी समीकरणों और नेतृत्व से जुड़े सवालों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पार्टी के भीतर पार्थ पवार के कामकाज को लेकर भी कुछ वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी की चर्चा है। हालांकि, इस संबंध में सामने आ रही बातें सूत्रों पर आधारित हैं और पार्टी की ओर से सभी आरोपों या चर्चाओं पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
जीशान सिद्दीकी और उमेश पाटिल की नियुक्तियों पर भी उठे सवाल
NCP में नाराजगी की एक अन्य वजह हाल में की गई संगठनात्मक नियुक्तियों को बताया जा रहा है। मुंबई राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद पर जीशान सिद्दीकी और राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद पर उमेश पाटिल की नियुक्ति को लेकर कुछ वरिष्ठ नेताओं ने असंतोष जताया है।
इन नेताओं का कहना है कि पार्टी में इतने महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति करने से पहले वरिष्ठ सदस्यों और संगठन के अनुभवी नेताओं से चर्चा की जानी चाहिए थी। उनका मानना है कि संगठन से जुड़े बड़े फैसलों में वरिष्ठ नेताओं की राय को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
इस मुद्दे ने पार्टी के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया और संगठनात्मक अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि कोर कमेटी की बैठक में इन नियुक्तियों और वरिष्ठ नेताओं की शिकायतों पर क्या रुख अपनाया जाता है।
विधायकों ने सुनेत्रा पवार के नेतृत्व पर जताया भरोसा
एक तरफ जहां पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी की चर्चा है, वहीं दूसरी ओर देवगिरी की बैठक में मौजूद ज्यादातर विधायकों ने सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में विश्वास जताया।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में शामिल अधिकांश विधायकों का कहना था कि दिवंगत अजित पवार ने उन्हें राजनीति में आगे बढ़ने का अवसर दिया था। अब अजित पवार के नहीं रहने के बाद सुनेत्रा पवार उनका मार्गदर्शन कर रही हैं और पार्टी का नेतृत्व संभाल रही हैं।
इस घटनाक्रम को NCP के भीतर नेतृत्व को लेकर जारी चर्चाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विधायकों का समर्थन सुनेत्रा पवार के लिए एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी और संगठनात्मक फैसलों को लेकर उठ रहे सवाल अब भी पार्टी के सामने चुनौती बने हुए हैं।
NCP के अंदरूनी समीकरणों पर सबकी नजर, कोर कमेटी की बैठक से मिल सकते हैं संकेत
देवगिरी में हुई बैठक के बाद अब सभी की निगाहें बुधवार सुबह 9 बजे होने वाली कोर कमेटी की बैठक पर टिकी हैं। इस बैठक में पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी, संगठनात्मक नियुक्तियों, विधायकों की शिकायतों और वरिष्ठ नेताओं के साथ संवाद जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
NCP के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है। एक ओर सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में विधायकों का भरोसा बनाए रखना है, वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ नेताओं की शिकायतों और संगठनात्मक असंतोष को दूर करना भी जरूरी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कोर कमेटी की बैठक के बाद पार्टी के भीतर चल रही खींचतान पर विराम लगेगा या महाराष्ट्र की राजनीति में NCP को लेकर कोई नया घटनाक्रम सामने आएगा? बैठक के फैसले पार्टी की आगे की रणनीति और आंतरिक एकजुटता के लिहाज से बेहद अहम हो सकते हैं।
