हिंदी सिनेमा और भारतीय टेलीविजन जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपनी दमदार आवाज, प्रभावशाली व्यक्तित्व और खलनायक के यादगार किरदारों के लिए मशहूर अभिनेता प्रदीप रावत का 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे अभिनेता ने इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई।
अभिनेता और उनके करीबी मित्र यशपाल शर्मा ने सोशल मीडिया के माध्यम से उनके निधन की जानकारी साझा की। उनके इस संदेश के बाद प्रशंसकों, कलाकारों और फिल्म जगत से जुड़े लोगों ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देना शुरू कर दिया।
कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद जिंदगी की जंग हार गए
जानकारी के अनुसार प्रदीप रावत पिछले काफी समय से कैंसर का इलाज करा रहे थे। शुरुआती इलाज मुंबई के अंधेरी स्थित कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में चल रहा था। स्वास्थ्य लगातार बिगड़ने पर उन्हें दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
उनके निधन की खबर ने उन लाखों प्रशंसकों को गहरा सदमा दिया है, जिन्होंने दशकों तक उन्हें बड़े पर्दे और छोटे पर्दे पर अलग-अलग दमदार किरदारों में देखा।
‘महाभारत’ के अश्वत्थामा ने दिलाई घर-घर पहचान
21 जनवरी 1952 को मध्य प्रदेश के जबलपुर में जन्मे प्रदीप रावत ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 1980 के दशक में की थी। हालांकि उन्हें असली पहचान बीआर चोपड़ा के लोकप्रिय पौराणिक धारावाहिक ‘महाभारत’ से मिली। इस सीरियल में उन्होंने गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों ने बेहद पसंद किया।
उनकी प्रभावशाली स्क्रीन प्रेजेंस और दमदार संवाद अदायगी ने उन्हें टेलीविजन के सबसे यादगार कलाकारों में शामिल कर दिया।
‘लगान’, ‘सरफरोश’ और ‘गजनी’ में निभाए यादगार किरदार
प्रदीप रावत ने अपने लंबे फिल्मी करियर में कई ऐसी भूमिकाएं निभाईं, जिन्हें आज भी दर्शक नहीं भूल पाए हैं। आमिर खान की फिल्म ‘सरफरोश’ में उनका निभाया गया सुल्तान का किरदार काफी चर्चित रहा। इसके बाद ‘लगान’ में देवा सिंह सोढी की भूमिका ने उन्हें एक अलग पहचान दिलाई।
बाद में उन्होंने ए.आर. मुरुगादॉस की फिल्म ‘गजनी’ में मुख्य विलेन बनकर अपनी दमदार अभिनय क्षमता का एक और उदाहरण पेश किया। उनके द्वारा निभाया गया यह किरदार हिंदी सिनेमा के यादगार खलनायकों में गिना जाता है।
साउथ सिनेमा में भी बनाया अलग मुकाम
प्रदीप रावत केवल बॉलीवुड तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम फिल्मों में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई। निर्देशक एस.एस. राजामौली की तेलुगु फिल्म ‘सई’ से उन्होंने दक्षिण भारतीय सिनेमा में कदम रखा और अपने शानदार अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ खलनायक का फिल्मफेयर और नंदी पुरस्कार भी हासिल किया।
इसके बाद उन्होंने कई भाषाओं की फिल्मों में नकारात्मक भूमिकाएं निभाकर अपनी बहुमुखी अभिनय प्रतिभा का परिचय दिया।
कई भाषाओं की फिल्मों में छोड़ी अमिट छाप
चार दशकों से अधिक लंबे करियर में प्रदीप रावत ने हिंदी, तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम, बंगाली, भोजपुरी और नेपाली फिल्मों में अभिनय किया। चाहे पर्दे पर उनका किरदार कुछ मिनटों का रहा हो या पूरी फिल्म का मुख्य विलेन, उन्होंने हर भूमिका को अपने अभिनय से यादगार बना दिया।
उनकी दमदार आवाज, सशक्त अभिनय और प्रभावशाली स्क्रीन प्रेजेंस ने उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे भरोसेमंद चरित्र अभिनेताओं और खलनायकों में शामिल किया। उनके निधन से भारतीय फिल्म उद्योग ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया है, जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।
