नई दिल्ली: यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI के 2,000 रुपये से अधिक के कुछ मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई और मनीष तिवारी ने दावा किया है कि वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति के सामने हाल में घोषित 0.4 प्रतिशत MDR का कोई विशिष्ट प्रस्ताव नहीं रखा गया था। दूसरी ओर, सरकार से जुड़े सूत्रों ने समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि पैनल ने UPI के लिए टियर आधारित MDR मॉडल को लागू करने की जरूरत का समर्थन किया था और उस समय कांग्रेस के पांच सांसद समिति का हिस्सा थे।
गौरव गोगोई ने उठाया संसदीय समिति की चर्चा का मुद्दा
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने 17 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि जिस UPI शुल्क प्रस्ताव की हाल में घोषणा हुई है, उस पर वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति में चर्चा नहीं हुई थी। उनका कहना है कि जब वित्त विभाग के अधिकारी समिति के सदस्यों से मिले थे, तब उनके सामने UPI शुल्क को लेकर कोई विशिष्ट प्रस्ताव नहीं था।
गोगोई के अनुसार, समिति के सदस्यों ने MDR की जरूरत को लेकर सवाल जरूर उठाए थे, लेकिन बैठक के दौरान सरकारी प्रतिनिधियों की ओर से उन्हें कोई विशिष्ट या संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नई UPI शुल्क व्यवस्था का असर छोटे कारोबारियों, विक्रेताओं और उद्यमियों पर पड़ सकता है।
असली विवाद 0.4% MDR के विशिष्ट प्रस्ताव को लेकर
यहां विवाद का अहम बिंदु यह है कि संसदीय समिति की रिपोर्ट में टियर आधारित MDR व्यवस्था की जरूरत का उल्लेख और 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले मौजूदा 0.4 प्रतिशत MDR प्रस्ताव को कांग्रेस सांसद अलग-अलग मुद्दे के रूप में देख रहे हैं।
सरकार की ओर से सामने आए पक्ष के अनुसार, वित्त संबंधी संसदीय समिति ने UPI के लिए टिकाऊ राजस्व मॉडल और टियर आधारित MDR ढांचे को जल्द लागू करने की जरूरत बताई थी। समिति की रिपोर्ट में डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की परिचालन लागत और मौजूदा सरकारी प्रोत्साहन के बीच अंतर का भी उल्लेख किया गया था।
वहीं, कांग्रेस सांसदों का कहना है कि समिति की ओर से जिस व्यापक MDR ढांचे की चर्चा की गई थी, उसे हाल में घोषित 0.4 प्रतिशत शुल्क के विशिष्ट प्रस्ताव की मंजूरी के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता।
मनीष तिवारी ने भी किया गोगोई के दावे का समर्थन
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी गौरव गोगोई के रुख का समर्थन किया। तिवारी ने कहा कि संसदीय स्थायी समितियों की कार्यवाही गोपनीय होती है और उनके मुताबिक, समिति की आंतरिक चर्चाओं का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
तिवारी ने यह भी कहा कि समिति के सामने हाल में घोषित MDR व्यवस्था से जुड़ी दर, सीमा और छूट जैसी विशिष्ट जानकारियों वाला प्रस्ताव पेश नहीं किया गया था। उनके अनुसार, समिति के सदस्यों ने MDR लागू करने के पीछे के व्यापक सिद्धांत और तर्क को लेकर सवाल उठाए थे।
समिति में कौन-कौन से कांग्रेस सांसद थे?
वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति में कांग्रेस के पांच सांसद शामिल थे। इनमें पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ के नाम शामिल हैं। सरकार से जुड़े सूत्रों ने इसी तथ्य और समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि कांग्रेस के सदस्य उस बैठक और रिपोर्ट प्रक्रिया का हिस्सा थे।
कांग्रेस सांसदों का जवाब है कि समिति में MDR के व्यापक ढांचे पर चर्चा और हाल में घोषित 0.4 प्रतिशत शुल्क के विशिष्ट प्रस्ताव पर चर्चा, दोनों को एक ही बात नहीं माना जा सकता।
2,000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर क्या है नया MDR?
NPCI की ओर से घोषित नए ढांचे के तहत 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के कुछ Person-to-Merchant यानी P2M UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत तक MDR लागू होगा। यह शुल्क मर्चेंट से संबंधित है, ग्राहक से सीधे वसूले जाने वाला शुल्क नहीं है। 2,000 रुपये तक के मर्चेंट UPI भुगतान और Person-to-Person यानी P2P भुगतान इस MDR के दायरे से बाहर रहेंगे।
उदाहरण के तौर पर, 10,000 रुपये के ऐसे मर्चेंट UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR का हिसाब 40 रुपये बनता है। वहीं, कुछ विशेष क्षेत्रों के लिए अलग फ्लैट शुल्क और बड़े लेनदेन पर शुल्क की अधिकतम सीमा भी तय की गई है।
ग्राहकों से शुल्क वसूलने पर सरकार की नजर
नई व्यवस्था को लेकर एक अहम सवाल यह भी है कि क्या व्यापारी MDR का बोझ ग्राहकों पर डालेंगे। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, केंद्र सरकार ने बैंकों और संबंधित संस्थाओं को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि MDR को ग्राहकों पर सीधे न डाला जाए। सरकार 15 अक्टूबर से इस स्थिति पर निगरानी रखने की तैयारी कर रही है।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि नया MDR मॉडल UPI के बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल पेमेंट व्यवस्था की लागत को टिकाऊ तरीके से संभालने के उद्देश्य से लाया गया है।
कांग्रेस का आरोप- छोटे कारोबारियों पर पड़ सकता है असर
कांग्रेस ने नई व्यवस्था को लेकर छोटे व्यापारियों और उद्यमियों पर संभावित आर्थिक प्रभाव का मुद्दा उठाया है। गौरव गोगोई ने दावा किया कि नए शुल्क से छोटे कारोबारियों और वेंडर्स की लागत बढ़ सकती है। कांग्रेस ने इस व्यवस्था के जरिए बड़ी विदेशी कंपनियों को फायदा पहुंचने की आशंका भी जताई है। ये राजनीतिक दावे हैं और इनके प्रभाव को लेकर अंतिम तस्वीर नई व्यवस्था लागू होने के बाद उसके वास्तविक आर्थिक असर से स्पष्ट होगी।
दूसरी ओर, सरकार का पक्ष है कि MDR व्यवस्था का उद्देश्य UPI इकोसिस्टम को लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना है और शुल्क सीधे उपभोक्ताओं पर डालने की अनुमति नहीं होगी। सरकार ने इस फैसले के पीछे किसी विदेशी दबाव के आरोप को भी खारिज किया है।
संसदीय समिति की रिपोर्ट और नए फैसले के बीच क्या अंतर है?
मौजूदा विवाद को समझने के लिए यह अंतर महत्वपूर्ण है कि संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में UPI के लिए एक टियर आधारित और कैलिब्रेटेड MDR मॉडल की जरूरत पर बात की थी, जबकि अब NPCI द्वारा घोषित व्यवस्था में 2,000 रुपये से अधिक के पात्र मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR की व्यवस्था की गई है। सरकार समर्थक पक्ष समिति की सिफारिश को वर्तमान कदम के समर्थन के रूप में देख रहा है, जबकि कांग्रेस सांसदों का कहना है कि समिति के सामने इसी दर और इसी सीमा वाला विशिष्ट प्रस्ताव नहीं रखा गया था।
इस तरह UPI MDR का मुद्दा अब केवल डिजिटल भुगतान की फीस तक सीमित नहीं रहा है। इसके साथ संसदीय समिति की भूमिका, समिति की गोपनीय कार्यवाही और सरकार तथा विपक्ष के बीच नए शुल्क की व्याख्या को लेकर भी राजनीतिक विवाद जुड़ गया है। 15 अक्टूबर से व्यवस्था लागू होने के बाद व्यापारियों, ग्राहकों और डिजिटल पेमेंट कंपनियों पर इसके वास्तविक प्रभाव को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होगी।
