मध्य प्रदेश : मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में पिछले 15 दिनों से जारी जल सत्याग्रह शनिवार को प्रशासन ने समाप्त करा दिया। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए आंदोलन स्थल को खाली कराया और वहां मौजूद प्रदर्शनकारियों को हटाया। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं को बसों के माध्यम से उनके घर भेजा गया। प्रशासन का कहना है कि लगातार हो रही बारिश के कारण निर्माणाधीन पुल के पास नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया था, जिससे आंदोलन स्थल पर लोगों का रुकना जोखिम भरा हो गया था।
सुरक्षा कारणों का हवाला देकर खाली कराया गया आंदोलन स्थल
प्रशासन के अनुसार, जिस स्थान पर जल सत्याग्रह चल रहा था वह निर्माणाधीन पुल के समीप स्थित था। लगातार बारिश के बाद नदी का जलस्तर बढ़ने से किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना की आशंका बनी हुई थी। इसी को देखते हुए पुलिस, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों का प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण कराया और इसके बाद महिलाओं सहित सभी लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजते हुए सत्याग्रह स्थल खाली करा दिया।
15 दिनों से जारी था आंदोलन, पुनर्वास और मुआवजे को लेकर जताई जा रही थी नाराजगी
यह अनिश्चितकालीन आंदोलन करीब 15 दिनों से चल रहा था, जिसमें बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाएं, किसान और परियोजना से प्रभावित परिवार शामिल थे। आंदोलन का नेतृत्व सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर कर रहे थे, जो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर भी बैठे हुए थे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि केन-बेतवा लिंक परियोजना के साथ-साथ मझगांव, रूंझ और नैगुवा सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों को न तो पर्याप्त मुआवजा मिला और न ही वादा किया गया पुनर्वास। उनका कहना है कि प्रशासन द्वारा पहले दिए गए आश्वासनों को भी अब तक पूरा नहीं किया गया।
पुलिस ने बताई कार्रवाई की वजह
छतरपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आदित्य पाटले ने बताया कि प्रशासन की प्राथमिकता प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना थी। उन्होंने कहा कि लगातार बारिश के कारण नदी का जलस्तर बढ़ गया था और आंदोलन स्थल सुरक्षित नहीं रह गया था। इसी कारण पुलिस और प्रशासन ने शांतिपूर्ण तरीके से लोगों को वहां से हटाया। अधिकारियों के अनुसार पूरी कार्रवाई के दौरान किसी तरह की अप्रिय स्थिति नहीं बनने दी गई।
आंदोलन के दौरान अपनाए गए अलग-अलग विरोध के तरीके
अपनी मांगों को लेकर आंदोलनकारियों ने केवल जल सत्याग्रह ही नहीं बल्कि चिता सत्याग्रह और प्रतीकात्मक फांसी सत्याग्रह जैसे विरोध के तरीकों का भी सहारा लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक प्रभावित परिवारों को न्याय, उचित मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास नहीं मिलेगा, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। इससे पहले अप्रैल में प्रशासन की ओर से आश्वासन मिलने पर आंदोलन स्थगित कर दिया गया था, लेकिन मांगें पूरी नहीं होने का आरोप लगाते हुए जुलाई में इसे फिर से शुरू किया गया।
क्या है केन-बेतवा लिंक परियोजना?
केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना मानी जाती है। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना और पेयजल उपलब्ध कराना है। सरकार का दावा है कि इस परियोजना से सूखा प्रभावित क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलेगा और पात्र परिवारों के पुनर्वास के लिए विशेष पैकेज भी स्वीकृत किया गया है। हालांकि प्रभावित परिवारों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण, मुआवजा और पुनर्वास से जुड़े कई मुद्दों का समाधान अभी तक संतोषजनक तरीके से नहीं किया गया है, जिसके चलते उनका विरोध लगातार जारी है।
