नेपाल में बारिश और लैंडस्लाइड से तबाही, यूपी-बिहार में बढ़ा बाढ़ का खतरा; चंपारण में 4 जगह टूटे तटबंध, इंद्रावती ने तोड़ा 53 साल का रिकॉर्ड

नई दिल्ली: पड़ोसी देश नेपाल में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और भूस्खलन ने हालात बिगाड़ दिए हैं। भारी बारिश के कारण नेपाल के कई इलाकों में बाढ़ और लैंडस्लाइड की स्थिति पैदा हो गई है। अब तक 21 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई लोग लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल में नदियों के उफान का असर अब भारत के सीमावर्ती राज्यों उत्तर प्रदेश और बिहार में भी दिखाई देने लगा है। त्रिशूली, नारायणी यानी गंडक और बागमती नदियों का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

नेपाल के साथ-साथ बिहार, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी मौसम ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बिहार के चंपारण में गंडक नदी के तेज बहाव और पानी के दबाव के कारण चार स्थानों पर तटबंध टूटने की सूचना है। वहीं छत्तीसगढ़ में इंद्रावती नदी का जलस्तर 53 साल पुराने रिकॉर्ड को पार कर गया है। दूसरी ओर राजस्थान में ओलावृष्टि और उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में घने कोहरे ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।

नेपाल में भारी बारिश और लैंडस्लाइड से 21 से ज्यादा मौतें

नेपाल के आदित्यपुर और नारायणी बेसिन क्षेत्र में लगातार बारिश के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई है। भारी बारिश के साथ कई जगहों पर भूस्खलन हुआ, जिसकी चपेट में आने से 21 से अधिक लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है। कई लोगों के लापता होने की भी खबर है, जिसके कारण मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

नेपाल की त्रिशूली, नारायणी और बागमती नदियों में पानी लगातार बढ़ रहा है। कई स्थानों पर नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। बाढ़ और भूस्खलन के कारण पृथ्वी हाईवे और बीपी हाईवे समेत कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ है। कई सड़क मार्गों पर मलबा आने और पानी भरने से आवाजाही रोकनी पड़ी है।

नारायणी-गंडक के उफान से बिहार और यूपी में बढ़ा खतरा

नेपाल में भारी बारिश का सीधा असर भारत की ओर बहने वाली नदियों पर पड़ रहा है। नारायणी नदी भारत में प्रवेश करने के बाद गंडक के नाम से जानी जाती है। वाल्मीकिनगर बैराज से लगातार बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।

गंडक में पानी बढ़ने से बिहार के सीमावर्ती और नदी किनारे बसे इलाकों में बाढ़ का खतरा गहरा गया है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों पर निगरानी बढ़ाई गई है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया है।

चंपारण में चार जगह तटबंध टूटने से मची चिंता

गंडक नदी में पानी का दबाव बढ़ने के बीच बिहार के चंपारण इलाके में चार स्थानों पर तटबंध टूटने की सूचना सामने आई है। तटबंध टूटने के बाद आसपास के गांवों और रिहायशी क्षेत्रों में बाढ़ का पानी तेजी से फैलने लगा है।

प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए सीमावर्ती और नदी के आसपास के इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया है। स्थानीय स्तर पर राहत और बचाव की तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं। ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।

गोपालगंज की पांच पंचायतों में घुसा बाढ़ का पानी

बिहार के गोपालगंज जिले में भी गंडक नदी का बढ़ता जलस्तर चिंता का कारण बना हुआ है। बैराज से करीब पांच लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद नदी का पानी आसपास के गांवों तक पहुंच गया। कई इलाकों में घरों के अंदर तक पानी प्रवेश कर गया है।

बैकुंठपुर के शीतलपुर क्षेत्र में तटबंध टूटने के बाद आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है। पानी तेजी से गांवों की ओर बढ़ रहा है, जिसके चलते ग्रामीणों ने सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की तैयारी शुरू कर दी है। पांच पंचायतों में बाढ़ का पानी पहुंचने की जानकारी सामने आई है।

छत्तीसगढ़ में इंद्रावती ने तोड़ा 53 साल का रिकॉर्ड

नेपाल और बिहार में बाढ़ की स्थिति के बीच छत्तीसगढ़ में भी भारी बारिश ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़कर 12.39 मीटर तक पहुंच गया, जो 53 साल के पुराने रिकॉर्ड से ऊपर बताया जा रहा है।

नदी का जलस्तर बढ़ने से जगदलपुर के निचले इलाकों में पानी भर गया है। प्रशासन और राहत टीमों ने प्रभावित क्षेत्रों में बचाव अभियान चलाया। अब तक 833 लोगों को सुरक्षित निकालकर 65 राहत शिविरों में पहुंचाए जाने की जानकारी सामने आई है।

राजस्थान में ओलावृष्टि, यूपी में घने कोहरे से विजिबिलिटी 25 मीटर

मौसम का असर देश के दूसरे हिस्सों में भी दिखाई दे रहा है। राजस्थान के जयपुर, बीकानेर और चूरू में ओलावृष्टि के कारण मौसम में अचानक ठंडक बढ़ गई। ओलों के कारण कई इलाकों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई।

वहीं उत्तर प्रदेश के अमेठी, रामपुर और बदायूं में सितंबर के दौरान ही घना कोहरा देखने को मिला। कुछ स्थानों पर दृश्यता घटकर करीब 25 मीटर तक पहुंच गई। इतनी कम विजिबिलिटी के कारण सड़क यातायात पर भी असर पड़ने की स्थिति बनी रही।

उत्तराखंड में बर्फबारी के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

उत्तराखंड में बर्फबारी के बाद अलग-अलग पर्वतीय क्षेत्रों में फंसे ट्रैकर्स और पर्वतारोहियों को निकालने के लिए राहत एवं बचाव अभियान जारी रहा। मंगलवार सुबह भी रेस्क्यू टीमों ने कई इलाकों में अभियान चलाया।

सुबह चलाए गए अभियान के दौरान कालिंदी पास बेस क्षेत्र से 10, सतोपंथ बेस क्षेत्र से चार और जोगिन-1 पास बेस क्षेत्र से आठ सदस्यों को सुरक्षित निकाला गया। इस तरह सुबह 11:15 बजे तक कुल 22 ट्रैकर्स को सुरक्षित बाहर निकाले जाने की जानकारी सामने आई।

इससे एक दिन पहले सोमवार को भी कालिंदी पास बेस और ओडन कोल बेस क्षेत्र से 40 ट्रैकर्स को सुरक्षित निकाला गया था। खराब मौसम और बर्फबारी के बीच रेस्क्यू टीमों के सामने चुनौती बनी हुई है, लेकिन प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने का अभियान लगातार जारी है।

कई राज्यों में एक साथ मौसम का असर

नेपाल में भारी बारिश और भूस्खलन से शुरू हुआ संकट अब भारत के कई राज्यों में अलग-अलग रूप में दिखाई दे रहा है। बिहार में गंडक के बढ़ते जलस्तर ने सीमावर्ती जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ाया है, जबकि छत्तीसगढ़ में इंद्रावती नदी रिकॉर्ड जलस्तर के कारण चिंता का कारण बनी हुई है।

दूसरी ओर राजस्थान में ओलावृष्टि और उत्तर प्रदेश में असामान्य रूप से घना कोहरा मौसम के बदलते मिजाज की तस्वीर दिखा रहा है। उत्तराखंड में बर्फबारी के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने के लिए बचाव अभियान जारी है। ऐसे में नेपाल से लेकर उत्तर भारत और मध्य भारत तक कई इलाकों में प्रशासन की निगरानी और राहत-बचाव गतिविधियां बढ़ गई हैं।

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