बदायूं में गोशालाओं में गोवंशों की मौत पर सियासत तेज, AAP ने उठाए सवाल; 100 गायों की मौत का दावा, प्रशासन ने 34 की पुष्टि की

लखनऊ/बदायूं। उत्तर प्रदेश के बदायूं में भारी बारिश के बाद गोशालाओं में गोवंशों की मौत का मामला अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता वंशराज दुबे ने घटना को लेकर भाजपा सरकार और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि बदायूं की गोशालाओं में अव्यवस्थाओं और जलभराव के कारण करीब 100 गायों की मौत हुई है, जबकि प्रशासन की ओर से फिलहाल 34 गोवंशों की मौत की पुष्टि की गई है।

बदायूं की गोशालाओं में जलभराव से बिगड़े हालात

वंशराज दुबे के मुताबिक, म्याऊं ब्लॉक के अभिगांव और सालारपुर क्षेत्र के ब्यौर स्थित गोशालाओं में कई दिनों से बारिश का पानी जमा था। आरोप है कि गोवंशों को बारिश और ठंड से बचाने के लिए पर्याप्त शेड नहीं थे। इसके अलावा सूखे भूसे और जलनिकासी की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, लगातार बारिश के बाद इन गोशालाओं में बड़ी संख्या में गोवंश प्रभावित हुए। स्थानीय लोगों और कुछ संगठनों ने मृत गोवंशों की संख्या प्रशासन के आंकड़े से कहीं अधिक होने का दावा किया। अलग-अलग रिपोर्टों में 50, 80 और 100 से अधिक गोवंशों की मौत के दावे सामने आए हैं, जबकि प्रशासन ने दो प्रमुख गोशालाओं में कुल 34 मौतों की पुष्टि की।

प्रशासनिक आंकड़ा 34, स्थानीय दावे इससे कहीं ज्यादा

जिला प्रशासन के मुताबिक म्याऊं की अभिगांव गोशाला में 20 और ब्यौर की गोशाला में 14 गोवंशों की मौत हुई। अधिकारियों ने मौतों की वजह लंबे समय तक बारिश और ठंड के संपर्क में रहने से हुई हाइपोथर्मिया बताई है। इस स्थिति में शरीर का तापमान सामान्य से काफी नीचे चला जाता है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकता है।

वहीं, स्थानीय लोगों और कुछ संगठनों की ओर से मृत गोवंशों की संख्या 80 से 100 या उससे अधिक बताए जाने का दावा किया गया। हालांकि, इन दावों और प्रशासनिक आंकड़ों के बीच अंतर बना हुआ है। इसलिए मृत गोवंशों की वास्तविक संख्या को लेकर अंतिम स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

AAP प्रवक्ता ने सरकार पर साधा निशाना

AAP नेता वंशराज दुबे ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने गोवंश संरक्षण के नाम पर राजनीति की, लेकिन जमीनी स्तर पर गोशालाओं की स्थिति चिंताजनक है। उनका कहना है कि जिन गोशालाओं में बारिश का पानी जमा था, वहां समय रहते जलनिकासी, सूखे चारे और आश्रय की व्यवस्था नहीं की गई।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना सामने आने के बाद प्रशासन ने जिम्मेदारी तय करने के लिए ग्राम पंचायत सचिव और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की, जबकि पशु चिकित्सकों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

सचिव और अधिकारियों पर कार्रवाई, NGO के खिलाफ FIR

मामले में बदायूं जिला प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। रिपोर्टों के मुताबिक दो ग्राम पंचायत सचिवों को निलंबित किया गया है। साथ ही संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है और पशु चिकित्सा अधिकारियों पर कार्रवाई की संस्तुति की गई है।

अभिगांव की गोशाला में गोवंशों की मौत के मामले में पुलिस ने गोशाला संचालक और केयरटेकर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। एक मामले में केयरटेकर की गिरफ्तारी की भी जानकारी सामने आई है। आरोपों में गोवंशों की उचित देखभाल नहीं करने और सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़े आरोप शामिल हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

पशु चिकित्सकों ने भी उठाए जिम्मेदारी से जुड़े सवाल

मामले में पशु चिकित्सकों की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज हुई है। सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, कुछ पशु चिकित्सकों का कहना है कि गोशालाओं में जलभराव और बुनियादी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत तथा ग्राम्य विकास से जुड़े तंत्र की थी। डॉक्टरों का कहना है कि सूचना मिलने के बाद उन्होंने मौके पर पहुंचकर बीमार गोवंशों का उपचार किया।

वहीं प्रशासन ने मामले की जांच के लिए समितियां गठित की हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि गोशालाओं में जलभराव, चारा, आश्रय और देखभाल की व्यवस्था में कहां और किस स्तर पर लापरवाही हुई।

दूसरे जिलों की अस्थायी गोशालाओं पर भी उठे सवाल

AAP प्रवक्ता ने बदायूं की घटना को व्यापक गोवंश संरक्षण व्यवस्था से जोड़ते हुए बुंदेलखंड और पूर्वांचल के कई जिलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बांदा, महोबा, प्रयागराज और मऊ जैसे जिलों की अस्थायी गोशालाओं में कथित तौर पर बाउंड्री, शेड और अन्य जरूरी सुविधाओं की कमी का दावा किया।

उनका कहना है कि यदि अस्थायी गोशालाओं में बारिश, ठंड, कीचड़ और चारे की कमी जैसी परिस्थितियां बनी रहती हैं तो गोवंशों की सुरक्षा गंभीर चुनौती बन सकती है। इन आरोपों पर संबंधित जिलों की अलग-अलग प्रशासनिक स्थिति और आधिकारिक आंकड़े अलग विषय हैं।

गोशाला व्यवस्था पर फिर उठे बड़े सवाल

बदायूं की घटना ने एक बार फिर सरकारी गोशालाओं में जलनिकासी, शेड, चारा, पशु चिकित्सा सुविधा और नियमित निगरानी जैसे बुनियादी इंतजामों पर बहस छेड़ दी है। फिलहाल प्रशासनिक जांच और पुलिस कार्रवाई के बाद यह सामने आना बाकी है कि लापरवाही किस स्तर पर हुई और गोवंशों की मौत की अंतिम संख्या कितनी रही।

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