Tamil Nadu Politics: लोकसभा सीटों के प्रस्तावित परिसीमन को लेकर तमिलनाडु की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। थलपति विजय की ओर से शनिवार 8 अगस्त को बुलाई गई सर्वदलीय सांसदों की बैठक से राज्य की प्रमुख द्रविड़ पार्टियों DMK और AIADMK ने दूरी बनाने का फैसला किया है। DMK ने बैठक को लेकर सरकार पर सवाल उठाते हुए मेकेदातु बांध विवाद को भी चर्चा में शामिल करने की मांग की है।
चेन्नई: तमिलनाडु में प्रस्तावित लोकसभा परिसीमन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। केंद्र सरकार की ओर से लोकसभा क्षेत्रों के संभावित परिसीमन पर चर्चा के लिए शनिवार को बुलाई गई सभी पार्टियों के सांसदों की बैठक में DMK और AIADMK शामिल नहीं होंगी। यह बैठक थलपति विजय की ओर से बुलाई गई है। दोनों प्रमुख द्रविड़ दलों के बैठक से दूर रहने के फैसले ने तमिलनाडु की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
DMK के संगठन सचिव आरएस भारती ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पर आरोप लगाया कि परिसीमन की प्रक्रिया पर चर्चा के नाम पर बैठक बुलाना महज राजनीतिक ड्रामा है। उनका दावा है कि इसके जरिए कावेरी जल विवाद जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है।
DMK ने बैठक में शामिल होने के लिए रखी बड़ी शर्त
DMK महासचिव दुरईमुरुगन ने स्पष्ट किया कि पार्टी परिसीमन के मुद्दे के खिलाफ नहीं है, लेकिन वह इस विषय पर होने वाली बैठक में तभी हिस्सा लेगी, जब राज्य सरकार पहले मेकेदातु बांध परियोजना के मुद्दे पर भी इसी तरह की सर्वदलीय बैठक बुलाए।
DMK की ओर से कहा गया है कि मेकेदातु बांध का मुद्दा तमिलनाडु के जल अधिकारों से सीधे जुड़ा हुआ है। ऐसे में केवल परिसीमन पर चर्चा करना पर्याप्त नहीं है। पार्टी चाहती है कि सरकार मेकेदातु को लेकर भी तमिलनाडु के सभी राजनीतिक दलों को एक मंच पर लाए और राज्य के हितों को लेकर सामूहिक रुख सामने रखे।
DMK सांसदों की ओर से यह भी कहा गया कि उन्हें शनिवार को चेन्नई में मौजूद रहने के संबंध में पार्टी की ओर से कोई निर्देश नहीं दिया गया है। ऐसे में पार्टी सांसदों के बैठक में शामिल होने की संभावना नहीं है।
AIADMK ने भी बैठक से किया किनारा
दूसरी ओर, AIADMK ने भी विजय की ओर से बुलाई गई बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सांसदों को सीधे बैठक में बुलाने से पहले राजनीतिक दलों के नेताओं को आमंत्रित किया जाना चाहिए था।
AIADMK के एक वरिष्ठ नेता ने बैठक की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसकी तुलना फिल्म इंडस्ट्री से की। उन्होंने कहा कि यह ऐसा है जैसे कोई प्रोड्यूसर डिस्ट्रीब्यूटर्स को दरकिनार करते हुए सीधे सिनेमाघरों में फिल्म रिलीज कर दे।
AIADMK ने पुष्टि की है कि पार्टी के तीन राज्यसभा सांसद शनिवार को होने वाली बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे। इससे साफ है कि परिसीमन के मुद्दे पर तमिलनाडु में विपक्षी दलों के बीच रणनीति को लेकर अभी पूरी तरह सहमति नहीं बन पाई है।
DMK का दावा- BJP ने परिसीमन बिल पर मांगा समर्थन
परिसीमन को लेकर DMK ने यह भी दावा किया है कि BJP ने पार्टी से प्रस्तावित परिसीमन बिल पर समर्थन मांगा था। DMK के एक नेता के मुताबिक, पार्टी परिसीमन प्रक्रिया के विरोध में नहीं है, लेकिन वह चाहती है कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और राज्यों के हितों को ध्यान में रखते हुए हो।
DMK नेता ने कहा कि पार्टी की चिंताओं को पहले पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया था। बाद में BJP की ओर से दोबारा संपर्क किया गया और DMK ने अपनी मांगें उनके सामने रखीं।
DMK की सबसे बड़ी चिंता दक्षिणी राज्यों के संसदीय प्रतिनिधित्व को लेकर है। पार्टी चाहती है कि दक्षिणी राज्यों की मौजूदा लोकसभा सीटों की संख्या सुरक्षित रखी जाए। इसके अलावा यदि लोकसभा सीटों में करीब 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाती है, तो यह बढ़ोतरी सभी राज्यों में समान अनुपात में लागू होनी चाहिए।
पार्टी की एक और मांग है कि यह व्यवस्था भविष्य की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर बदलने के बजाय अगले 30 वर्षों तक स्थिर रखी जाए। DMK का तर्क है कि परिसीमन की ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले दक्षिणी राज्यों को उनके संसदीय प्रतिनिधित्व में नुकसान न उठाना पड़े।
उदयनिधि स्टालिन ने भी साफ किया DMK का रुख
इस पूरे विवाद के बीच तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन का बयान भी सामने आया। उन्होंने कहा कि परिसीमन के मुद्दे पर अंतिम फैसला DMK अध्यक्ष एमके स्टालिन करेंगे।
यह बयान उस समय आया जब PWD मंत्री आधव अर्जुन ने उदयनिधि स्टालिन से परिसीमन को लेकर DMK का स्पष्ट रुख बताने को कहा था। इससे पहले ऐसी चर्चाएं भी सामने आई थीं कि DMK प्रस्तावित परिसीमन बिल का समर्थन कर सकती है या मतदान के दौरान वोटिंग से दूरी बना सकती है।
उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि DMK उन शुरुआती राजनीतिक दलों में शामिल रही है, जिसने प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने याद दिलाया कि पार्टी ने दक्षिणी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाने की पहल भी की थी।
मेकेदातु बांध को लेकर DMK ने विजय सरकार पर साधा निशाना
शनिवार शाम जारी किए गए बयान में DMK ने परिसीमन के बजाय मेकेदातु बांध के मुद्दे को प्राथमिकता देने की मांग की। पार्टी महासचिव दुरईमुरुगन ने कहा कि TVK सरकार को कांग्रेस के साथ नए गठबंधन के कारण मेकेदातु मुद्दे पर चुप नहीं रहना चाहिए।
DMK का कहना है कि राज्य सरकार को केवल परिसीमन तक अपनी चर्चा सीमित नहीं रखनी चाहिए। उसे मेकेदातु बांध परियोजना पर भी सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए, ताकि तमिलनाडु के राजनीतिक दल इस परियोजना के खिलाफ अपना सामूहिक विरोध दर्ज करा सकें।
पार्टी के मुताबिक, मेकेदातु मुद्दा तमिलनाडु के जल अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है और राज्य के हितों की रक्षा के लिए सभी दलों को एकजुट होकर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
परिसीमन पर DMK ने बताया अपना रुख
DMK ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह निष्पक्ष परिसीमन प्रक्रिया के खिलाफ नहीं है। पार्टी की मुख्य चिंता यह है कि परिसीमन के कारण तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों के संसदीय प्रतिनिधित्व पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।
पार्टी चाहती है कि दक्षिणी राज्यों की मौजूदा लोकसभा सीटों को सुरक्षित रखा जाए और यदि सीटों की संख्या बढ़ाई जाती है तो उसका लाभ सभी राज्यों को समान रूप से मिले। DMK यह भी चाहती है कि इस व्यवस्था को लंबे समय तक स्थिर रखा जाए, ताकि राज्यों को भविष्य की जनगणना के आधार पर अचानक राजनीतिक प्रतिनिधित्व में नुकसान का सामना न करना पड़े।
किन दलों के सांसद बैठक में हो सकते हैं शामिल?
विजय की ओर से बुलाई गई इस बैठक से DMK और AIADMK के अलावा PMK अध्यक्ष अंबुमणि रामदास, DMDK नेता एलके सुधीश और MNM नेता कमल हासन के भी शामिल नहीं होने की संभावना जताई जा रही है।
वहीं, कांग्रेस, VCK, CPI, CPM और IUML के सांसदों के बैठक में शामिल होने की संभावना है। ऐसे में शनिवार की बैठक में परिसीमन को लेकर तमिलनाडु के अलग-अलग राजनीतिक दलों के रुख सामने आने की उम्मीद है।
फिलहाल DMK ने अपनी रणनीति को लेकर यह संकेत दे दिया है कि वह परिसीमन के मुद्दे पर बातचीत से पीछे नहीं हट रही, लेकिन मेकेदातु बांध और तमिलनाडु के जल अधिकारों को भी राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रखना चाहती है। दूसरी ओर AIADMK ने बैठक बुलाने की प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में परिसीमन का मुद्दा आने वाले दिनों में तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा सियासी मुद्दा बन सकता है।
