Giridih News: Parasnath News: झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित पारसनाथ के मरांग बुरु दिशोम मांझीथान में बकरे की बलि को लेकर दर्ज प्राथमिकी का मामला अब राजनीतिक विवाद का रूप लेता जा रहा है। जुलाई 2024 में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और गांडेय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन के पूजा कार्यक्रम से जुड़े इस मामले में पांच स्थानीय आदिवासियों को आरोपी बनाए जाने पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता सुरेश साव ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पांचों आदिवासियों को कथित रूप से परेशान किए जाने का आरोप लगाया है। वहीं, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर पूरे मामले में हस्तक्षेप करने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
पांच आदिवासियों को आरोपी बनाने पर भाजपा ने उठाए सवाल
भाजपा नेता सुरेश साव ने पुलिस और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि जिस धार्मिक अनुष्ठान में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन स्वयं मौजूद थीं, उसी कार्यक्रम से जुड़े मामले में पांच स्थानीय आदिवासियों को आरोपी बनाकर परेशान किया जा रहा है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने की मांग की है। सुरेश साव का कहना है कि ग्रामीणों को कथित पुलिसिया प्रताड़ना से राहत मिलनी चाहिए और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष तरीके से जांच कराई जानी चाहिए, ताकि किसी भी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय न हो।
55 आदिवासी ग्रामीणों ने बाबूलाल मरांडी को सौंपा संयुक्त आवेदन
इस मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। सुरेश साव के मुताबिक, पीरटांड़ प्रखंड के 55 आदिवासी ग्रामीणों ने अपनी शिकायतों को लेकर बाबूलाल मरांडी को संयुक्त अभ्यावेदन सौंपा था।
इस अभ्यावेदन में साहेबराम मुर्मू, फागु मरांडी, बुधन हेम्ब्रम, अर्जुन हेम्ब्रम और सिकन्दर हेम्ब्रम समेत पांच ग्रामीणों का नाम शामिल है। ग्रामीणों का आरोप है कि मधुबन थाना कांड संख्या 13/24 के आधार पर उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है।
शिकायत में यह दावा भी किया गया है कि कथित घटना के समय दो आरोपी घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं थे। ऐसे में उनकी भूमिका और प्राथमिकी में उन्हें आरोपी बनाए जाने के आधार पर सवाल उठाए गए हैं।
19 जुलाई 2024 को मरांग बुरु पहुंचे थे हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन
बाबूलाल मरांडी की ओर से मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र के अनुसार, 19 जुलाई 2024 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी और गांडेय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन के साथ पारसनाथ स्थित मरांग बुरु के दिशोम मांझीथान पहुंचे थे।
यह धार्मिक अनुष्ठान 2024 के गांडेय विधानसभा उपचुनाव में जीत और मुख्यमंत्री की जेल से रिहाई की मन्नत पूरी होने के बाद आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में जिला प्रशासन के अधिकारी और पुलिस बल भी मौजूद थे।
आदिवासी धार्मिक परंपरा के अनुसार वहां पूजा-अर्चना की गई थी। इस दौरान कुल नौ बकरे चढ़ाए गए थे, जिनमें से एक बकरे की बलि नायके बाबा ने दी थी। बाबूलाल मरांडी ने इस पूरे घटनाक्रम के संदर्भ में उस दिन की पूजा-अर्चना से जुड़ी दो तस्वीरें भी सार्वजनिक की हैं।
मुख्यमंत्री के लौटने के बाद वायरल हुई बलि की तस्वीर, फिर दर्ज हुई FIR
इस मामले में दर्ज प्राथमिकी में घटनाक्रम का अलग विवरण दिया गया है। प्राथमिकी के मुताबिक, पूजा-अर्चना संपन्न होने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत कार्यक्रम में शामिल सभी लोग मुख्य कार्यक्रम स्थल की ओर रवाना हो गए थे।
इसके बाद मुख्य कार्यक्रम समाप्त होने और मुख्यमंत्री के वहां से लौटने के पश्चात दिशोम मांझीथान में प्रतिनियुक्त मजिस्ट्रेट को बकरे की बलि से संबंधित तस्वीर वायरल होने की जानकारी मिली। इसी के बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की गई।
प्राथमिकी के अनुसार, 24 जुलाई 2024 को तत्कालीन प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी सह प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी दिनेश्वर महतो के आवेदन पर मधुबन थाना में कांड संख्या 13/24 दर्ज की गई थी।
इस प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196, 299, 298, 223 और 3(5) के तहत आरोप लगाए गए थे। इसके साथ ही सम्मेद शिखरजी क्षेत्र में मांस और मदिरा के निषेध से संबंधित केंद्र सरकार के कार्यालय ज्ञापन का भी उल्लेख किया गया था।
बाबूलाल मरांडी का सवाल- जब मुख्यमंत्री और अधिकारी मौजूद थे तो आदिवासी आरोपी कैसे बने?
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस पूरे मामले को लेकर राज्य सरकार और प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका सवाल है कि जब 19 जुलाई 2024 को पूजा-अर्चना मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में संपन्न हुई थी, तो फिर उसी धार्मिक कार्यक्रम से जुड़े मामले में स्थानीय आदिवासियों को आरोपी बनाने का आधार क्या है?
उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर ग्रामीणों की शिकायतों पर गंभीरता से विचार करने और मामले में उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
मरांग बुरु की धार्मिक परंपरा और सम्मेद शिखरजी की पवित्रता पर छिड़ी बहस
भाजपा नेता सुरेश साव ने कहा कि मरांग बुरु क्षेत्र आदिवासी समाज की धार्मिक आस्था और परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है। वहीं, सम्मेद शिखरजी की पवित्रता का विषय भी अत्यंत संवेदनशील है। ऐसे में राज्य सरकार को इस पूरे मामले पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूरे प्रकरण की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पुलिस और जिला प्रशासन को आवश्यक निर्देश देने की मांग की है। उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और किसी भी निर्दोष ग्रामीण को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
फिलहाल पारसनाथ के मरांग बुरु दिशोम मांझीथान में बकरे की बलि से जुड़ा यह मामला झारखंड की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ आदिवासी धार्मिक परंपराओं और ग्रामीणों के अधिकारों का सवाल उठाया जा रहा है, तो दूसरी तरफ सम्मेद शिखरजी की धार्मिक पवित्रता और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर बहस तेज हो गई है। अब सबकी नजर राज्य सरकार के रुख और इस मामले में आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी है।
