Meerut Central Market Demolition: उत्तर प्रदेश के मेरठ में शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल मार्केट में बुधवार को ध्वस्तीकरण की बड़ी कार्रवाई हुई। आवास एवं विकास परिषद की टीम ने बुलडोजर और अन्य भारी मशीनों की मदद से चिह्नित भवनों को गिराना शुरू किया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में की जा रही इस कार्रवाई के पहले चरण में छह भवनों को ध्वस्त किया गया। कार्रवाई के दौरान मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा और पूरे इलाके में बैरिकेडिंग की गई।
सबसे ज्यादा भावुक करने वाला दृश्य उस समय सामने आया, जब अपने घर और दुकान को टूटने से बचाने की मांग कर रही महिलाएं धरने पर बैठ गईं। महिला पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शन कर रही महिलाओं को वहां से हटाया। इस दौरान कई महिलाएं रोती नजर आईं और उन्होंने प्रशासन तथा आवास एवं विकास परिषद पर गंभीर आरोप लगाए।
‘रोज आश्वासन मिला, लेकिन आज सब बर्बाद कर दिया’
प्रदर्शन कर रही महिलाओं का कहना था कि वे काफी समय से आवास एवं विकास परिषद के अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रही थीं। उनके मुताबिक, उन्हें बार-बार भरोसा दिलाया जाता रहा कि तत्काल कोई कार्रवाई नहीं होगी। लेकिन बुधवार को अचानक उनके मकानों और दुकानों पर ध्वस्तीकरण शुरू हो गया।
महिलाओं ने कहा कि जिस बाजार में उनका घर, दुकान और रोजी-रोटी जुड़ी हुई है, वहां अचानक भारी पुलिस बल और बुलडोजर देखकर वे हैरान रह गईं। उनका आरोप था कि लंबे समय तक अधिकारियों से बातचीत और बैठकों के बावजूद आखिरकार कार्रवाई शुरू कर दी गई।
सुबह दूध लेने निकलीं तो दिखी पुलिस की भारी तैनाती
स्थानीय महिलाओं के अनुसार, बुधवार सुबह करीब छह बजे जब वे दूध लेने के लिए घर से बाहर निकलीं तो सेंट्रल मार्केट में भारी पुलिस बल और बैरिकेडिंग देखकर उन्हें कार्रवाई की जानकारी हुई।
महिलाओं ने आरोप लगाया कि सुबह से ही क्षेत्र में बिजली और पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई थी। उनका कहना था कि पानी और भोजन को लेकर बच्चों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने दावा किया कि आवास विकास के अधिकारी पहले लगातार बैठकें करते रहे और उन्हें कार्रवाई नहीं होने का आश्वासन मिलता रहा, लेकिन अब उनके सामने उनके घर और कारोबार को गिराया जा रहा है।
मकान टूटता देख पति से लिपटकर रोने लगी महिला
ध्वस्तीकरण के दौरान एक महिला अपने मकान को टूटते देखकर भावुक हो गई। वह अपने पति से लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगी। महिला की हालत बिगड़ने के बाद मौके पर मौजूद महिला पुलिसकर्मियों ने उसे वहां से हटाया और पति के साथ पास के एक मकान में भेज दिया।
इस दौरान अन्य महिलाएं भी कार्रवाई का विरोध करती रहीं। उनका कहना था कि वे लंबे समय से अधिकारियों से संपर्क कर रही थीं और उन्हें उम्मीद थी कि उनके मकान और दुकानों को बचाने का कोई रास्ता निकलेगा। महिलाओं ने प्रशासन से कार्रवाई रोकने की मांग भी की।
सेंट्रल मार्केट में पहुंची टीम, छह भवनों पर चला बुलडोजर
शास्त्री नगर के सेंट्रल मार्केट में बुधवार सुबह करीब नौ बजे आवास एवं विकास परिषद की टीम बुलडोजर और अन्य संसाधनों के साथ पहुंची। इसके बाद चिह्नित संपत्तियों पर ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में सील की गई 44 संपत्तियों को मूल स्वरूप में लाने की प्रक्रिया के तहत पहले चरण में छह भवनों को गिराया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ भवनों को जेसीबी से ध्वस्त किया गया, जबकि जी प्लस-3 मंजिल वाली एक इमारत के हिस्से को गिराने में जेसीबी की क्षमता पर्याप्त नहीं रही। इसके बाद पोर्कलेन मशीन को मौके पर बुलाया गया और उसकी मदद से इमारत के हिस्से को तोड़ा गया।
भारी पुलिस बल और बैरिकेडिंग से आवाजाही प्रभावित
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को देखते हुए सेंट्रल मार्केट और आसपास के शास्त्री नगर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। प्रमुख रास्तों और चौराहों पर बैरिकेडिंग की गई और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया।
पुलिस की तैनाती और बैरिकेडिंग के कारण स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई। बाजार की ओर जाने वाले कई रास्तों पर लोगों की आवाजाही सीमित रही। बड़ी संख्या में व्यापारी और संपत्ति मालिक भी मौके पर पहुंच गए। इस दौरान कई दुकानदार अपनी दुकानों से सामान बाहर निकालते हुए नजर आए।
स्कूल जाने वाले बच्चों को भी हुई परेशानी
सेंट्रल मार्केट और आसपास के रास्तों पर बैरिकेडिंग के चलते स्थानीय लोगों के साथ स्कूल जाने वाले बच्चों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ बच्चों को रास्ते में रोके जाने की बात सामने आई। इलाके में पुलिस की मौजूदगी और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के कारण सामान्य आवाजाही प्रभावित रही।
आखिर 44 संपत्तियों पर क्यों हो रही कार्रवाई?
सेंट्रल मार्केट की 44 संपत्तियों को लेकर विवाद आवासीय भूखंडों में व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन से जुड़ा है। आवास एवं विकास परिषद की कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद इन संपत्तियों को सील किया गया था।
इन संपत्तियों में अलग-अलग प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की बात सामने आई थी। इनमें व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स, स्कूल, अस्पताल या नर्सिंग होम, मिठाई की दुकान, ज्वैलरी शोरूम, डेयरी, सैलून और अन्य प्रतिष्ठान शामिल बताए गए हैं। अप्रैल में परिषद ने 44 पूरी तरह व्यावसायिक संपत्तियों को सील करने की कार्रवाई की थी।
जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने इन 44 भवनों को ध्वस्त कर मूल स्वरूप में लाने का आदेश दिया था। भवन मालिकों को निर्धारित समय में अवैध निर्माण हटाने का अवसर भी दिया गया था।
14 जुलाई के आदेश के बाद तेज हुई कार्रवाई
मेरठ सेंट्रल मार्केट मामले में 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद 44 सील भवनों के संबंध में ध्वस्तीकरण का आदेश सामने आया। इसके बाद आवास एवं विकास परिषद ने संपत्तियों का सर्वे कराया और संबंधित संपत्ति मालिकों को नोटिस जारी किए।
अगस्त में भी परिषद की ओर से कहा गया था कि इन संपत्तियों को मूल स्वरूप में लाने की प्रक्रिया के तहत सर्वे और अन्य कार्रवाई जारी रहेगी। 21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में मामले से संबंधित रिपोर्ट पेश किए जाने की बात भी सामने आई थी।
21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तावित सुनवाई
अब मेरठ सेंट्रल मार्केट मामले में अगली महत्वपूर्ण तारीख 21 सितंबर है। इस दौरान आवास एवं विकास परिषद की ओर से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन से जुड़ी रिपोर्ट पेश की जानी है।
बुधवार को पहले चरण में छह भवनों को ध्वस्त किया गया है। बाकी सील की गई संपत्तियों को लेकर भी आगे कार्रवाई जारी रहने की बात कही जा रही है। ऐसे में अब सभी की नजरें 21 सितंबर को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं।
सेंट्रल मार्केट में आगे क्या होगा?
बुधवार की कार्रवाई के बाद यह साफ है कि 44 संपत्तियों से जुड़े मामले में ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया आगे भी महत्वपूर्ण बनी रहेगी। एक तरफ परिषद सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन की प्रक्रिया में जुटी है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित संपत्ति मालिक और स्थानीय महिलाएं कार्रवाई को लेकर अपनी आपत्ति और परेशानियां सामने रख रहे हैं।
फिलहाल पहले चरण में छह भवनों को ध्वस्त किया जा चुका है और 21 सितंबर की प्रस्तावित सुनवाई में परिषद की अनुपालन रिपोर्ट मामले की अगली दिशा के लिए महत्वपूर्ण होगी।
