रांची में छात्रों का बड़ा ऐलान: 20 अगस्त को CM आवास का घेराव, हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग

रांची। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर शनिवार को राजधानी रांची में आंदोलनरत छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों ने तिरंगा यात्रा निकाली। इस दौरान छात्रों ने साफ ऐलान किया कि अगर उनकी मांगों पर सरकार ने ठोस कार्रवाई नहीं की तो 20 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास का घेराव किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के इस्तीफे की भी मांग की है।

20 अगस्त को CM आवास घेरने का ऐलान

JSSC-JPSC रिफॉर्म मंच के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन का शनिवार को 22वां दिन रहा। स्वतंत्रता दिवस पर निकाली गई तिरंगा यात्रा में बड़ी संख्या में छात्र और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि झारखंड की पूरी भर्ती व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है।

JSSC-JPSC रिफॉर्म मंच के नेता रविंद्र पासवान ने कहा कि 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि झामुमो-कांग्रेस गठबंधन छात्रों की मांगों को लेकर गंभीरता नहीं दिखा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि जब तक उनकी मांगों पर निर्णायक कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।

24 जिलों में पुतला दहन की तैयारी

आंदोलनकारी छात्रों ने रविवार को झारखंड के सभी 24 जिलों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पुतले जलाने का ऐलान किया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के मुद्दे पर ठोस कदम उठाने में विफल रही है।

छात्र नेताओं ने कांग्रेस पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि राहुल गांधी ने पहले छात्रों के मुद्दे पर समर्थन जताया था, लेकिन उसके बाद उनकी समस्याओं के समाधान के लिए कोई प्रभावी कदम सामने नहीं आया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि झामुमो सरकार छात्रों की मांगों पर कार्रवाई नहीं करती है तो कांग्रेस को सरकार से समर्थन वापस लेने पर विचार करना चाहिए।

तिरंगा यात्रा में उमड़ी छात्रों की भीड़

रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से तिरंगा यात्रा की शुरुआत हुई। यह वही स्थान है जहां छात्र लंबे समय से भर्ती परीक्षाओं में सुधार और कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। हाथों में तिरंगा लेकर छात्र अल्बर्ट एक्का चौक तक पहुंचे। इस दौरान भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारों से माहौल गूंजता रहा।

इस आंदोलन में ऐसे प्रदर्शनकारी भी शामिल रहे जो व्हीलचेयर पर हैं और अनशन कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना युवाओं के भविष्य को सुरक्षित नहीं किया जा सकता।

भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने की मांग

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में कथित गड़बड़ी वाली परीक्षाओं को रद्द करना और पूरी भर्ती प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराना शामिल है। छात्र संगठनों ने संदिग्ध मानी जा रही JSSC-CGL और कुछ JPSC परीक्षाओं को भी रद्द करने की मांग उठाई है।

छात्रों का कहना है कि कथित अनियमितताओं की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी CBI या झारखंड से बाहर के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की समिति से कराई जानी चाहिए, ताकि जांच की निष्पक्षता को लेकर किसी तरह का सवाल न रहे।

JLKM नेता देवेंद्र मांझी को लेकर भी विवाद

आंदोलन के बीच झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा यानी JLKM नेता देवेंद्र मांझी का मामला भी सामने आया है। वह पिछले 14 दिनों से अनशन पर हैं। मांझी ने आरोप लगाया कि उन्हें तिरंगा यात्रा में शामिल होने से रोकने के लिए पुलिस ने सदर अस्पताल से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी।

इस मामले से जुड़े कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आए हैं, जिनमें कथित तौर पर देवेंद्र मांझी और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प जैसी स्थिति दिखाई दे रही है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर संबंधित पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

छात्रों ने कहा- यह हजारों युवाओं के भविष्य की लड़ाई

प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि उनका संघर्ष सिर्फ JSSC-CGL या किसी एक भर्ती परीक्षा को लेकर नहीं है। उनके मुताबिक यह लड़ाई झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता और हजारों युवाओं के भविष्य से जुड़ी हुई है।

JSSC-JPSC रिफॉर्म मंच का कहना है कि स्वतंत्रता का मतलब केवल औपनिवेशिक शासन से मुक्ति नहीं, बल्कि अवसरों में असमानता, भ्रष्टाचार और अन्याय से भी मुक्ति है। मंच ने युवाओं से शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने और 20 अगस्त के प्रस्तावित आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।

बीजेपी ने भी CBI जांच को लेकर सरकार पर उठाए सवाल

भर्ती परीक्षाओं को लेकर जारी विवाद के बीच बीजेपी ने भी राज्य सरकार पर निशाना साधा है। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी विधायक चंपई सोरेन ने हेमंत सोरेन सरकार को ‘तानाशाह सरकार’ बताते हुए कथित भर्ती अनियमितताओं की CBI जांच की मांग की।

जमशेदपुर के भुइयांडीह में पत्रकारों से बातचीत के दौरान चंपई सोरेन ने कहा कि बड़ी संख्या में छात्र स्वतंत्रता दिवस पर भी अपने घरों से दूर जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में रहने को मजबूर हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार का भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से कोई संबंध नहीं है तो CBI जांच की सिफारिश करने में उसे परेशानी क्यों हो रही है।

सरकार ने छात्रों को दिया निष्पक्ष जांच का भरोसा

दूसरी ओर, राज्य सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए कई कदम उठाने की बात कही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में भर्ती परीक्षाओं को लेकर उठे सवालों पर चिंता जताई और कहा कि इससे नौकरी की तैयारी कर रही युवाओं की पूरी पीढ़ी के भरोसे पर असर पड़ा है।

मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके पद या प्रभाव की परवाह किए बिना कार्रवाई होगी। साथ ही उन्होंने बिना प्रमाण किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने से बचने की बात कही और कहा कि न्याय तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर होना चाहिए।

भर्ती व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार की तैयारी

सरकार की ओर से भर्ती व्यवस्था में सुधार के लिए वार्षिक परीक्षा कैलेंडर समय पर जारी करने, तकनीक आधारित सुरक्षित परीक्षाएं आयोजित करने, उत्तर कुंजी और OMR शीट समय पर उपलब्ध कराने तथा भर्ती प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में जवाबदेही तय करने जैसे कदमों की बात कही गई है।

इसके अलावा परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए छात्रों, शिक्षकों, शिक्षा विशेषज्ञों और अभिभावकों से सुझाव लेने के उद्देश्य से ‘छात्रों की आवाज छात्रों के साथ’ अभियान शुरू करने की जानकारी भी दी गई है।

पेपर लीक को मुख्यमंत्री ने बताया राष्ट्रीय समस्या

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पेपर लीक के मामलों को केवल झारखंड तक सीमित समस्या नहीं बताया। उन्होंने इसे राष्ट्रीय स्तर की चुनौती बताते हुए कहा कि युवाओं को निष्पक्ष और भरोसेमंद परीक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि रोजगार के अवसर पैदा करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार का लक्ष्य केवल सरकारी विभागों में रिक्त पदों को भरना नहीं, बल्कि भर्ती एजेंसियों और दूसरे माध्यमों से युवाओं के लिए रोजगार के व्यापक अवसर तैयार करना भी है।

राज्यपाल ने भी परीक्षा अनियमितताओं पर जताई चिंता

झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने भी कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र लीक होने जैसी घटनाएं उन छात्रों के मनोबल और भविष्य को प्रभावित करती हैं, जो मेहनत और अपनी प्रतिभा के दम पर प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल करने की तैयारी करते हैं।

अब सभी की नजर 20 अगस्त पर है। छात्रों ने मुख्यमंत्री आवास के घेराव का ऐलान कर दिया है और आंदोलन को अपनी मांगें पूरी होने तक जारी रखने की बात कही है। ऐसे में आने वाले दिनों में झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा यह आंदोलन किस दिशा में जाता है और सरकार छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाती है, यह देखना अहम होगा।

Share:
Copied!