अयोध्या : अयोध्या स्थित श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़े प्रशासनिक बदलाव की संभावना तेज हो गई है। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की एसआईटी जांच, आठ आरोपितों के जेल जाने और दो ट्रस्टियों के इस्तीफे के बाद अब ट्रस्ट के पुनर्गठन को लेकर चर्चाएं तेज हैं। ऐसे में 11 जुलाई को प्रस्तावित ट्रस्ट की त्रैमासिक बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां कई अहम फैसले लिए जा सकते हैं।
एसआईटी रिपोर्ट के बाद बढ़ी पुनर्गठन की संभावना
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में ट्रस्ट के पुनर्गठन की आवश्यकता जताई है। रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि ट्रस्ट के प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए किसी अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी को मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) नियुक्त किया जाना चाहिए।
11 जुलाई की बैठक में हो सकते हैं अहम फैसले
ट्रस्ट की अगली त्रैमासिक बैठक 11 जुलाई को प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इस बैठक में ट्रस्टियों के इस्तीफे, संभावित पुनर्गठन और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर चर्चा होगी। इस बीच केंद्र सरकार भी सीईओ नियुक्ति को लेकर अंतिम निर्णय ले सकती है। प्रधानमंत्री के विदेश दौरे से लौटने के बाद इस प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।
दो ट्रस्टियों के इस्तीफे से बढ़ी हलचल
एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आने, प्राथमिकी दर्ज होने और आठ आरोपितों के जेल भेजे जाने के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल कुमार मिश्र पर इस्तीफे का दबाव बढ़ा। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और संगठन स्तर पर बनी परिस्थितियों के बीच दोनों पदाधिकारियों ने अपना इस्तीफा सौंप दिया। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि ने ट्रस्ट के आधिकारिक एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल के माध्यम से इसकी जानकारी सार्वजनिक की और बताया कि इन इस्तीफों पर अंतिम निर्णय ट्रस्ट की बैठक में लिया जाएगा।
CEO पद के लिए किन नामों की चर्चा?
ट्रस्ट में सीईओ नियुक्ति को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन दो सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के नाम चर्चा में हैं। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र का नाम पहले से ही संभावित उम्मीदवारों में शामिल बताया जा रहा है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी योगेश्वरराम मिश्र का नाम भी प्रमुखता से सामने आया है।
योगेश्वरराम मिश्र प्रयागराज के मूल निवासी हैं और वर्ष 2005 बैच के आईएएस अधिकारी रहे हैं। वर्तमान में वे उत्तर प्रदेश राज्य लोक सेवा अधिकरण में सदस्य (प्रशासनिक) के पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले जनवरी से मार्च 2016 के बीच वे अयोध्या के जिलाधिकारी भी रह चुके हैं।
इस्तीफे मंजूर हुए तो ट्रस्ट में खाली होंगे तीन पद
यदि दोनों ट्रस्टियों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए जाते हैं तो ट्रस्ट में तीन पद रिक्त हो जाएंगे। इनमें एक पद पहले से ही अयोध्या राजपरिवार के मुखिया रहे बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद खाली है। ऐसे में ट्रस्ट के पुनर्गठन के दौरान नए सदस्यों की नियुक्ति पर भी विचार किया जा सकता है।
वरिष्ठ ट्रस्टियों की सक्रियता भी हुई सीमित
ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास, वरिष्ठ सदस्य एवं अधिवक्ता के. परासरण सहित कई ट्रस्टी अधिक आयु और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से पहले की तरह सक्रिय नहीं हैं। अधिकांश बैठकों में वे ऑनलाइन माध्यम से शामिल होते हैं। ऐसे में भविष्य में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नए चेहरों को जिम्मेदारी मिलने की संभावना भी जताई जा रही है।
CEO नियुक्ति के लिए बदलनी होगी नियमावली
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यदि ट्रस्ट में मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की जाती है तो सबसे पहले ट्रस्ट की उपविधि (Bylaws) में संशोधन करना होगा। मौजूदा नियमावली में सीईओ पद का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए नियुक्ति से पहले नियमों में आवश्यक बदलाव करना अनिवार्य होगा।
