मानसून सत्र के दूसरे दिन संसद के बाहर और प्रधानमंत्री आवास के आसपास उस समय राजनीतिक माहौल बेहद गर्म हो गया, जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत विपक्ष के कई वरिष्ठ नेताओं ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने कई नेताओं को हिरासत में लिया, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया। पूरे घटनाक्रम ने संसद से लेकर सियासी गलियारों तक नई बहस छेड़ दी है।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ प्रदर्शन
कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च करते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई। विपक्ष का आरोप था कि छात्रों से जुड़े गंभीर मुद्दों और परीक्षा व्यवस्था पर सरकार जवाब देने से बच रही है। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि देश के युवाओं का भविष्य दांव पर लगा है और सरकार को इस पर संसद में जवाब देना चाहिए।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि जिस देश में छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हों और सरकार जिम्मेदारी लेने से इनकार करे, वहां लोकतांत्रिक जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने सरकार से छात्रों के मुद्दों पर विस्तृत चर्चा और जवाबदेही तय करने की मांग दोहराई।
राहुल गांधी से मिले केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह
धरने के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह प्रदर्शन स्थल पहुंचे और राहुल गांधी से लंबी बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच करीब आधे घंटे तक चर्चा हुई। इसके बाद जितेंद्र सिंह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने पहुंचे और फिर दोबारा धरनास्थल लौटकर राहुल गांधी से बातचीत की।
सरकारी पक्ष का कहना था कि सरकार संसद में NEET और परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है। हालांकि राहुल गांधी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर कायम रहे। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने चर्चा की मांग स्वीकार कर ली थी, लेकिन कांग्रेस ने अपनी मांगों में इस्तीफे का मुद्दा भी जोड़ दिया।
दिल्ली पुलिस ने नेताओं को हिरासत में लिया
धरना लंबा खिंचने के बाद दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन समाप्त कराने की कोशिश की। पुलिस अधिकारियों ने राहुल गांधी से बातचीत कर प्रदर्शन खत्म करने का आग्रह किया, लेकिन सहमति नहीं बनने पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू की।
इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लेकर बसों के जरिए अलग-अलग स्थानों पर ले जाया गया। कुछ समय बाद सभी नेताओं को रिहा कर दिया गया।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी देखने को मिली। हिरासत में लिए जाने के बाद राहुल गांधी की नाक से खून निकलने की तस्वीरें भी चर्चा का विषय बनीं, जबकि प्रियंका गांधी पुलिस कार्रवाई के दौरान लगातार नारे लगाती रहीं।
रिहाई के बाद प्रियंका गांधी का बयान
दिल्ली पुलिस की हिरासत से रिहा होने के बाद प्रियंका गांधी ने कहा कि छात्र देश का भविष्य हैं और उनकी आवाज सुनी जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ अन्याय हुआ है और लोकतंत्र में हर नागरिक को शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है।
प्रियंका गांधी ने कहा कि कांग्रेस संसद के भीतर छात्रों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा चाहती है, लेकिन सरकार इस विषय पर गंभीर बहस से बच रही है। उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी दोहराई।
राहुल गांधी ने जनता से की अपील
हिरासत के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर कहा कि छात्रों के साथ अन्याय पूरे देश के भविष्य के साथ अन्याय है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे छात्रों के न्याय की लड़ाई में साथ आएं और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करें।
राहुल गांधी ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था पर छात्रों का भरोसा कमजोर हुआ है और सरकार को इस पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
धर्मेंद्र प्रधान का कांग्रेस पर पलटवार
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस के प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष छात्रों के मुद्दों का राजनीतिक इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार संसद में सभी विषयों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन कांग्रेस ने संवाद की बजाय राजनीतिक प्रदर्शन का रास्ता चुना।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री आवास जैसे संवेदनशील क्षेत्र में प्रदर्शन करने से आम लोगों को असुविधा हुई और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई।
बीजेपी ने बताया ‘इतिहास का काला दिन’
भारतीय जनता पार्टी की ओर से भी कांग्रेस के प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। बीजेपी नेता नितिन नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास के आसपास इस तरह का प्रदर्शन लोकतांत्रिक विरोध नहीं बल्कि अराजकता की श्रेणी में आता है। उन्होंने इसे “इतिहास का काला दिन” बताते हुए कांग्रेस पर राजनीतिक माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया।
दिल्ली पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल कांग्रेस नेताओं के खिलाफ दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत कार्रवाई की। अधिकारियों के अनुसार सभी नेताओं को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद रिहा कर दिया गया।
संसद से सड़क तक छिड़ी नई राजनीतिक बहस
मानसून सत्र के बीच छात्रों के मुद्दे, परीक्षा प्रणाली, संसद में चर्चा की मांग और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब पूरी तरह राजनीतिक रूप ले चुका है। एक ओर कांग्रेस सरकार पर जवाबदेही से बचने का आरोप लगा रही है, वहीं सरकार का कहना है कि वह चर्चा के लिए तैयार थी लेकिन विपक्ष ने राजनीतिक टकराव का रास्ता चुना। आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर सियासी घमासान जारी रहने की संभावना है।
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